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पेगासस स्पाईवेयर: मच सकता है हड़कंप, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के बजट से जासूसी की कड़ियां जोड़ रही 'कांग्रेस'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 23 Jul 2021 06:36 PM IST
सार

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पेगासस सॉफ्टवेयर को एक हथियार बताते हुए कहा कि इस्राइली सरकार इसे हथियार के रूप में क्लासीफिकेशन करती है। ये हथियार आतंकवादियों के खिलाफ, क्रिमिनल्स के खिलाफ़ इस्तेमाल किया जाता है। हमारे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने इस हथियार का हिंदुस्तान के इंस्टीट्यूशन्स के खिलाफ व हिंदुस्तान के लोकतंत्र के खिलाफ़ प्रयोग किया है..

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Pegasus Spyware: Congress party said, Modi government suddenly increased the budget of National Security Council Secretariat for spying
कांग्रेस नेता राहुल गांधी - फोटो : ANI

विस्तार

'पेगासस स्पाईवेयर' केंद्र सरकार के गले की फांस बन गया है। विपक्षी दलों के हंगामे के चलते संसद का कामकाज प्रभावित हो रहा है। दोनों सदनों को कई बार स्थगित करना पड़ा है। शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने पेगासस के मुद्दे पर अंधेरे में एक तीर छोड़ा है। अगर ये तीर निशाने पर लगा तो हंगामा मच सकता है। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कथित तौर पर इस दफा 'राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय' और 'जासूसी' की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि यूपीए सरकार ने 2011-12 में सचिवालय को 17.43 करोड़ रुपये की बजट राशि प्रदान की थी। अगले वित्तीय वर्ष में इस राशि को 20.33 करोड़ रुपये कर दिया गया। 2013-14 में यह राशि 26.06 करोड़ रुपये हो गई।

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वर्ष 2014-15 में जब भाजपा सत्ता में आई तो राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय की अनुदान राशि बढ़कर 44.46 करोड़ कर दी गई। उससे अगले वर्ष यह राशि 33 करोड़ रुपये रह गई। इसके बाद अनुदान में चौंकाने वाली वृद्धि देखने को मिली। 2017-18 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में 'साइबर सुरक्षा अनुसंधान और विकास' नामक एक नया उप-शीर्ष जोड़ा गया। अब बजट राशि 333 करोड़ पर पहुंच गई। बतौर पवन खेड़ा, 'पेगासस जासूसी' प्रकरण भी उसी वर्ष शुरू हुआ था। साल 2021-22 में भी इस मद में 228.72 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साइबर सुरक्षा अनुसंधान और विकास पर खर्च हो रहे करीब 300 करोड़ रुपये किस तरफ इशारा करते हैं।
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पवन खेड़ा ने कहा, अचानक इतनी बड़ी वृद्धि का कोई तो मतलब होगा। सरकार को बताना चाहिए कि 2017-18 से लेकर अब तक इस राशि से क्या हासिल हुआ है। पेगासस जासूसी प्रकरण के मामले भी इसी अवधि यानी 2017 से लेकर 2021-22 तक होने शुरू हुए हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पेगासस सॉफ्टवेयर को एक हथियार बताते हुए कहा कि इस्राइली सरकार इसे हथियार के रूप में क्लासीफिकेशन करती है। ये हथियार आतंकवादियों के खिलाफ, क्रिमिनल्स के खिलाफ़ इस्तेमाल किया जाता है। हमारे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने इस हथियार का हिंदुस्तान के इंस्टीट्यूशन्स के खिलाफ व हिंदुस्तान के लोकतंत्र के खिलाफ़ प्रयोग किया है। मेरा फोन टेप किया, कोई बात नहीं। यह मेरी प्राइवेसी का मामला नहीं है। मैं विपक्ष का एक नेता हूं। मैं जनता की आवाज उठाता हूं, ये उस पर आक्रमण है। ये जनता की आवाज पर आक्रमण है।

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केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए खेड़ा ने कहा, हर नए खुलासे के बाद एक देश के रूप में हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। दूसरी तरफ बेशर्म सरकार को अपनी घटिया हरकतों पर गर्व होता दिखाई देता है। वास्तव में पेगासस पर 'सरकार और भाजपा' द्वारा किया जा रहा बचाव प्रधानमंत्री की चुप्पी से भी बदतर है। एक पूर्व मंत्री आता है और शिकायत करता है कि अगर 45 देशों ने पेगासस का इस्तेमाल किया है तो भारत को बाहर क्यों किया जा रहा है। कैबिनेट में एक मौजूदा पदाधिकारी का दावा है कि यह सुझाव देने के लिए कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है कि डाटा का उपयोग किसी भी तरह निगरानी के बराबर है। कॉरपोरेट जगत के बड़े लोग और सीबीआई जैसी संस्थाओं के प्रमुख की टेपिंग हो रही है। राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले भी जासूसी हुई। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश और वर्तमान राज्यसभा सदस्य के द्वारा फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद यह जासूसी बंद हो गई। जस्टिस के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया। पीड़ित परिवार के सदस्यों की जासूसी की गई थी।

तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के तीन नंबरों को जासूसी सूची में डाल दिया गया। उनके परिवार के 8 सदस्यों के नंबर भी लिस्ट में डाले गए। सीबीआई के दो अन्य वरिष्ठ अधिकारी राकेश अस्थाना और उनके सहयोगी एके शर्मा के फोन की भी जासूसी की गई। उस वक्त वर्मा ने कुछ दिन पहले प्रशांत भूषण और अरुण शौरी से मुलाकात की थी। उन्होंने राफेल से संबंधित शिकायत व्यक्तिगत रूप से वर्मा को सौंपी थी। डसॉल्ट एविएशन के भारत प्रतिनिधि वेंकट राव पोसीना, एसएएबी इंडिया के पूर्व प्रमुख इंद्रजीत सियाल और बोइंग इंडिया के बॉस प्रत्यूष कुमार के नाम 2018 और 2019 के बीच अलग-अलग समय पर जासूसी करने वालों के डाटाबेस में दिखाई देते हैं। सबसे दिलचस्प नाम हरमनजीत नेगी का है। नेगी, ऊर्जा फर्म ईडीएफ के प्रमुख हैं। वे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो की आधिकारिक भारत यात्रा के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। पेगासस जासूसी मामले की जांच पर चर्चा करने के लिए फ्रांसीसी कैबिनेट की बैठक हुई है। मैक्सिकन सरकार ने पहले ही एक जांच शुरू कर दी है। इस्राइली सरकार ने भी जांच का आदेश दे दिया है। एनएसओ द्वारा पेगासस के निर्यात नियमों की समीक्षा करने पर विचार किया जा रहा है। भारत सरकार को जांच से डर क्यों लगता है।

खेड़ा ने मोदी सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं। क्या भारत सरकार या उसकी किसी एजेंसी ने पेगासस सॉफ्टवेयर खरीदा है या नहीं। यदि सरकार ने सॉफ्टवेयर खरीदा है और सॉफ्टवेयर आतंकवाद का मुकाबला करने के एक उपकरण के रूप में है तो यह बताया जाए कि पत्रकार, कार्यकर्ता, नौकरशाह, न्यायपालिका, व्यवसायी और भाजपा में मोदी के सहयोगियों की जासूसी क्यों की जा रही है। सरकार ने अभी तक सीधे तौर पर पेगासस के इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है। अगर सरकार ने यह सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा तो दूसरी कौन सी सरकार थी जो भारतीय नागरिकों की जासूसी करा रही है। क्या भारत सरकार इतनी कमजोर है कि वह जासूसी करने वालों का पता नहीं लगा सकती।

अगर पेगासस आतंकवाद निरोधी सॉफ्टवेयर है, तो 350 किलोग्राम आरडीएक्स उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में कैसे पहुंच जाता है। हमने अपने 45 जवानों को खो दिया। यह कैसे हुआ कि पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकवादियों ने उरी, पठानकोट, गुरदासपुर, बारामूला, पंपोर, नगरोटा, अमरनाथ यात्रा व पुलवामा में हमला किया। खेड़ा ने कहा, 303 सीटों वाली सरकार, भारत की सीमाओं की रक्षा करने में विफल रही है। भारत के बहादुर जवानों और हवाई अड्डों की रक्षा करने में विफल रही है। क्या पेगासस को खरीदने के लिए ही राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के लिए इस बजटीय अनुदान में वृद्धि की गई थी।

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