पीसी चाको ने कांग्रेस छोड़ दी तो कौन सा पहाड़ टूट गया? वरिष्ठ नेता के पार्टी छोड़ने पर कोई हलचल नहीं
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी चाको का धैर्य जवाब दे गया, उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया। चाको के इस्तीफा देने पर दिल्ली में किसी तरह की कोई हलचल नहीं हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जिन मुद्दों पर उन्होंने(चाको) पार्टी छोड़ी है, पूछिए दिल्ली का प्रभारी रहते हुए क्या उन्होंने खुद ऐसी जमीन नहीं तैयार की थी? उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी तो कौन सा पहाड़ टूट गया? पवन खेड़ा ने भी चाको के कांग्रेस छोड़ने पर प्रतिक्रिया दी। पवन खेड़ा के अलावा राज्यसभा में उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि जिसको छोड़कर जाना है, जाए। आनंद शर्मा ने कहा कि जिनको पार्टी छोड़कर जाना है, वो जाएंगे। ऐसा राजनीतिक पार्टियों में होता है, लेकिन कांग्रेस पार्टी बताएगी कि वह इस चुनाव में एकजुट होकर कैसे लड़ सकती है। कांग्रेस का यही प्रयास होगा।
शीला दीक्षित के निधन के बाद ही चमक खो चुके थे चाको
संदीप दीक्षित को अपनी मां शीला दीक्षित के हार्ट अटैक से आकस्मिक निधन पर गहरा क्षोभ है। इसको लेकर संदीप दीक्षित ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भी लिखा था। संदीप दीक्षित के पत्र के बाद पीसी चाको के कामकाज पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया था। पार्टी के एक राज्यसभा सांसद ने कहा कि कहना नहीं चाहिए, लेकिन सच्चाई यही है कि इसके बाद से ही पीसी चाको अपनी राजनीतिक चमक खो चुके थे। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इस विषय में कुछ नहीं कहना चाहते। हालांकि वह भी मानते हैं कि पीसी चाको का दिल्ली में प्रयोग बहुत अच्छा नहीं था। सूत्र का कहना है कि यदि पीसी चाको ने समझदारी से काम लिया होता तो दिल्ली में कांग्रेस 2020 के विधानसभा चुनाव में न केवल अच्छा प्रदर्शन करती, बल्कि दूसरे नंबर की पार्टी होती।
क्यों छोड़ दी चाको ने कांग्रेस?
पीसी चाको ने केरल में कांग्रेस पार्टी को बहुत अच्छा बताया है, लेकिन उनका आरोप है कि यह दो धड़ों (आई और ए) में बंटी हुई है। कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी काफी हावी है। कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र वायनाड से भी कुछ नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी थी। चाको का कहना है कि उन्होंने कई बार कांग्रेस अध्यक्ष से गुटबाजी रोकने और हस्तक्षेप करने की गुजारिश की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।