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पुलवामा हमले पर सर्वदलीय बैठक में भी हावी रही ‘दलीय राजनीति’

Sun, 17 Feb 2019 04:41 AM IST
आसिम खान शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sun, 17 Feb 2019 04:41 AM IST
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Party politics dominated all-party meeting on the Pulwama terror attack

पुलवामा हमले पर सरकार की तरफ से अगला कदम उठाने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक भी ‘दलीय राजनीति’ का शिकार हो गई। जहां कुछ विपक्षी दलों ने सरकार को सभी तरह की कार्रवाई की छूट देने का समर्थन किया, वहीं पिछले दिनों मोदी सरकार के घोर विरोधी के तौर पर सामने आए दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन करने से इंकार कर दिया। आखिर में सरकार की तरफ से लाए गए प्रस्ताव में संशोधन के बाद ही विपक्षी दलों ने उसे पारित करने पर मुहर लगाई। दरअसल सरकार की तरफ से बैठक में पेश किए गए प्रस्ताव में अंतिम लाइन थी, ‘आज हम सभी अपने सुरक्षा बलों के साथ खड़े हैं और केंद्र व राज्य सरकार को ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम दृढ़तापूर्वक उठाने के लिए अधिकृत करते हैं।’ 

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बैठक में जब गृहसचिव राजीव गौबा ने यह प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, तो लगभग सभी दल इससे सहमत थे। लेकिन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के डेरेक ओ‘ब्रायन ने उनके हाथ से लेकर पूरा प्रस्ताव फिर से पढ़ा और इसका समर्थन करने से इंकार कर दिया। हालांकि तेलंगाना राष्ट्र समिति और बीजू जनता दल के नेताओं ने आपत्ति जताने के लिए तृणमूल कांग्रेस की आलोचना की, लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता टीएमसी के पक्ष में खड़े हो गए।
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इसके बाद बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गौबा को आपत्ति जता रहे नेताओं से बातचीत कर प्रस्ताव सुधारने के निर्देश दिए। आपत्ति जताने वाले नेताओं की सलाह पर प्रस्ताव की अंतिम लाइन को बदलकर लिखा गया, ‘आज हम सभी देश की एकता और अखंडता के लिए अपने सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं।’ इसके बाद ही यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो पाया।
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मोदी सरकार को ‘ब्लैक चेक’ मिलने का था डर

दरअसल विपक्षी नेताओं को डर था कि सरकार को किसी भी कदम के लिए अधिकृत करना उसके हाथ में ‘ब्लैंक चेक’ देने जैसा हो जाएगा। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि यदि प्रस्ताव को हमारे समर्थन देने के बाद सरकार पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ दे, देश में आपातकाल लगा दे या आम चुनाव स्थगित कर दे, तो विपक्ष के पास विरोध का आधार ही खत्म हो जाएगा।

पाकिस्तान से युद्ध पर भी भिन्न थी राय

बैठक के दौरान जहां शिवसेना सांसद संजय राउत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने को पहला विकल्प मानने की कड़ी वकालत की, तो वहीं सपा के सांसद सुरेंद्र नागर ने इसे अंतिम विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने की अपील की। नागर का कहना था कि पहले भारत को नदियों के पानी के बंटवारे पर पाकिस्तान के साथ हुई संधि को तुरंत रद्द कर देना चाहिए।


कश्मीरी पाकिस्तानी नहीं: फारुख अब्दुल्ला

नेशनल कांफ्रेंस के सांसद व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने कहा, हमें समझना चाहिए कि कश्मीरी पाकिस्तानी नहीं हैं। यदि भारत कश्मीर को अपने साथ रखना चाहता है तो उसे इस घटना को हथियार बनाकर उनके साथ भेदभाव पर रोक लगाने के बजाय उनके जख्मों पर मरहम लगाना चाहिए। भाकपा के डी. राजा ने देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

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