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Parliamentary Panel: संसदीय पैनल ने सरकार को दी सलाह, एयरलाइंस कंपनियों में मूल्य निर्धारण को लेकर कही यह बात

Tue, 14 Mar 2023 01:30 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 14 Mar 2023 01:30 AM IST
सार

पैनल ने कहा कि निजी एयरलाइंस के वाणिज्यिक हित और यात्रियों के हित के बीच सही संतुलन बनाए रखना होगा ताकि निजी एयरलाइंस को विकसित किया जा सके और साथ ही यात्रियों के हित को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि व्यावसायीकरण की आड़ में उनका पलायन न हो।

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Parliamentary panel tells govt Ensure airlines not practice predatory pricing under cloak of free mkt economy
नागरिक उड्डयन मंत्रालय। - फोटो : mygov

विस्तार

एक संसदीय पैनल ने सोमवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय से हवाई किराए के ऊपरी और निचले स्तर को सीमित करने का सुझाव दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था की आड़ में एयरलाइंस कंपनियों द्वारा अपने लाभ के लिए शोषण करने वाले मूल्य निर्धारण (Predatory Pricing) तंत्र को नहीं अपनाया जाए।

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पैनल ने कहा कि निजी एयरलाइंस के वाणिज्यिक हित और यात्रियों के हित के बीच सही संतुलन बनाए रखना होगा ताकि निजी एयरलाइंस को विकसित किया जा सके और साथ ही यात्रियों के हित को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि व्यावसायीकरण की आड़ में उनका पलायन न हो। मंत्रालय की 2023-24 के लिए अनुदान की मांग पर विभाग से संबंधित परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में ये सिफारिशें की हैं।
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संसदीय समिति को अन्य बातों के अलावा, पीक ट्रैवल सीजन के दौरान हवाई टिकट की कीमतों में अचानक उछाल की शिकायतें मिली थीं। समिति ने यह भी देखा कि वर्तमान में हवाई किराए में वृद्धि मौजूदा विमान नियम, 1937 के आधार पर किराए को नियंत्रित करने के लिए मंत्रालय की ओर से किसी भी प्रकार के तंत्र को नहीं दर्शाती है। इसलिए हवाई किराए में वृद्धि के दौरान कीमतें 'उचित लाभ और आम तौर पर प्रचलित टैरिफ' की स्वीकार्य या न्यायोचित सीमा से अधिक हो जाती हैं।
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सोमवार को संसद में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, एक तरफ तो सरकार आम आदमी के लिए हवाई परिवहन को सस्ता बनाने की योजना बना रही है और हवाई क्षमता बढ़ाई जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ विमानों को लाने की क्षमता का उसके अनुरूप विस्तार नहीं किया जा रहा है। ऐसी स्थिति की वजह से ज्यादा मांग होने पर एयरलाइन टिकटों की कमी होती है और कंपनियां कीमतों में वृद्धि करती है।


समिति ने सिफारिश की है कि ऊपरी और निचले कीमतों की कैपिंग 'लुभावने मूल्य निर्धारण' या कीमतों में अचानक वृद्धि को रोकने के लिए मंत्रालय के पास एक सिस्टम होना चाहिए। भले ही अंतरराष्ट्रीय विमानन मानदंडों के अनुसार कीमतें तय की जा रहीं हों, लेकिन डीजीसीए और मंत्रालय द्वारा कड़ी निगरानी रखनी होगी और यात्रियों को गुमराह करने से रोकने के लिए विभिन्न एयरलाइंस कंपनियों की वेबसाइटों की निगरानी के लिए एक तंत्र तैयार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, पैनल ने कहा कि यदि निजी एयरलाइंस कंपनियां किराए के संबंध में सही जानकारी प्रकाशित नहीं करती हैं, तो उन्हें इसके लिए दंडित किया जाना चाहिए।

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