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संसदीय समिति की सिफारिश: मोची जूते के कारीगर और नाई कहलाएंगे सौंदर्य सेवा प्रदाता, जाति नहीं हुनर से हो पहचान
Fri, 13 Mar 2026 05:13 AM IST
Devesh Tripathi
अजीत खरे
अजीत खरे
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 13 Mar 2026 05:13 AM IST
सार
छोटे कारोबारियों को बड़ा सहारा देने के लिए समिति ने ‘नैनो उद्यम’ की एक नई श्रेणी तत्काल शुरू करने की वकालत की है। इसके लिए 10 लाख रुपये की आरंभिक निवेश सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है।
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जाति आधारित पेशों के नाम बदलने की सिफारिश
- फोटो : ANI
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विस्तार
वह वक्त अब दूर नहीं जब समाज में सदियों से चली आ रही जाति-सूचक व्यावसायिक पहचान इतिहास बन जाएगी। अब मोची को जूते का कारीगर, कुम्हार को मिट्टी के उत्पाद निर्माता, धोबी लॉन्ड्री एवं क्लीनिंग सर्विस प्रोवाइडर और नाई को व्यक्तिगत सौंदर्य सेवा प्रदाता (पर्सनल केयर सर्विस प्रोवाइडर) के नाम से जाना जाएगा।
तिरुची शिवा की अध्यक्षता वाली उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि व्यवसाय के नामों से जाति और क्षेत्र आधारित पहचान को तत्काल हटाकर उन्हें पेशा-निरपेक्ष बनाया जाए। समिति ने सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग (एमएसएमई) मंत्रालय को सुझाव दिया है कि इन व्यवसायों को जाति की संकीर्ण पहचान से निकालकर ‘कार्य-आधारित’ और गतिशील नाम दिए जाएं।
पूरे देश में एक संशोधित ट्रेड सूची जारी हो: समिति
रिपोर्ट के मुताबिक, नाई, चर्मकार, कुम्हार और धोबी जैसे नामों के साथ जुड़ी सामाजिक रूढ़ियों के कारण कई राज्यों में युवा इन व्यवसायों को अपनाने में कतराते हैं। इससे न सिर्फ व्यवसाय को आगे बढ़ाने में दिक्कत आती है, बल्कि बाजार की प्रतिक्रिया भी सुस्त रहती है। समिति का मानना है कि राज्यों और विशेषज्ञों से राय लेकर पूरे देश में एक संशोधित ट्रेड सूची जारी की जानी चाहिए।
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99.3 फीसद उद्योगों के लिए बने नैनो उद्यम श्रेणी
छोटे कारोबारियों को बड़ा सहारा देने के लिए समिति ने ‘नैनो उद्यम’ की एक नई श्रेणी तत्काल शुरू करने की वकालत की है। इसके लिए 10 लाख रुपये की आरंभिक निवेश सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है। असल में, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत 7.61 करोड़ एमएसएमई में से 99.3 प्रतिशत (लगभग 7.56 करोड़) सूक्ष्म श्रेणी में ही आते हैं। वर्तमान वर्गीकरण के कारण बड़े उद्योग भी सूक्ष्म श्रेणी का लाभ उठा लेते हैं, जिससे छोटे और गृह-स्तरीय उद्यमों के हक मारे जाते हैं। नैनो श्रेणी बनने से सीधे तौर पर अंतिम पायदान के उद्यमी को सरकारी लाभ मिल सकेगा।
अमेरिकी शुल्क से एमएसएमई को बचाने की भी कवायद
रिपोर्ट में अमेरिकी शुल्कों में हुई बढ़ोतरी से भारतीय वस्त्र, इंजीनियरिंग, रसायन और ऑटो उद्योग पर पड़े असर पर भी चिंता जताई गई है। समिति ने सरकार से एक एमएसएमई टैरिफ रेजिलिएंस पैकेज तैयार करने की सिफारिश की है ताकि निर्यातकों को सुरक्षा मिल सके। साथ ही, सलाह दी गई है कि भारतीय कारोबारी केवल अमेरिका पर निर्भर न रहें और यूरोपीय संघ, आसियान तथा अफ्रीका जैसे नए बाजारों की ओर रुख करें। वैश्विक व्यापार नीतियों में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के लिए एक रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है।
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तिरुची शिवा की अध्यक्षता वाली उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि व्यवसाय के नामों से जाति और क्षेत्र आधारित पहचान को तत्काल हटाकर उन्हें पेशा-निरपेक्ष बनाया जाए। समिति ने सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग (एमएसएमई) मंत्रालय को सुझाव दिया है कि इन व्यवसायों को जाति की संकीर्ण पहचान से निकालकर ‘कार्य-आधारित’ और गतिशील नाम दिए जाएं।
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पूरे देश में एक संशोधित ट्रेड सूची जारी हो: समिति
रिपोर्ट के मुताबिक, नाई, चर्मकार, कुम्हार और धोबी जैसे नामों के साथ जुड़ी सामाजिक रूढ़ियों के कारण कई राज्यों में युवा इन व्यवसायों को अपनाने में कतराते हैं। इससे न सिर्फ व्यवसाय को आगे बढ़ाने में दिक्कत आती है, बल्कि बाजार की प्रतिक्रिया भी सुस्त रहती है। समिति का मानना है कि राज्यों और विशेषज्ञों से राय लेकर पूरे देश में एक संशोधित ट्रेड सूची जारी की जानी चाहिए।
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99.3 फीसद उद्योगों के लिए बने नैनो उद्यम श्रेणी
छोटे कारोबारियों को बड़ा सहारा देने के लिए समिति ने ‘नैनो उद्यम’ की एक नई श्रेणी तत्काल शुरू करने की वकालत की है। इसके लिए 10 लाख रुपये की आरंभिक निवेश सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है। असल में, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत 7.61 करोड़ एमएसएमई में से 99.3 प्रतिशत (लगभग 7.56 करोड़) सूक्ष्म श्रेणी में ही आते हैं। वर्तमान वर्गीकरण के कारण बड़े उद्योग भी सूक्ष्म श्रेणी का लाभ उठा लेते हैं, जिससे छोटे और गृह-स्तरीय उद्यमों के हक मारे जाते हैं। नैनो श्रेणी बनने से सीधे तौर पर अंतिम पायदान के उद्यमी को सरकारी लाभ मिल सकेगा।
अमेरिकी शुल्क से एमएसएमई को बचाने की भी कवायद
रिपोर्ट में अमेरिकी शुल्कों में हुई बढ़ोतरी से भारतीय वस्त्र, इंजीनियरिंग, रसायन और ऑटो उद्योग पर पड़े असर पर भी चिंता जताई गई है। समिति ने सरकार से एक एमएसएमई टैरिफ रेजिलिएंस पैकेज तैयार करने की सिफारिश की है ताकि निर्यातकों को सुरक्षा मिल सके। साथ ही, सलाह दी गई है कि भारतीय कारोबारी केवल अमेरिका पर निर्भर न रहें और यूरोपीय संघ, आसियान तथा अफ्रीका जैसे नए बाजारों की ओर रुख करें। वैश्विक व्यापार नीतियों में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के लिए एक रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है।
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