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एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, संसदीय समिति को उम्मीद

Thu, 20 Dec 2018 08:56 PM IST
संदीप भट्ट भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 20 Dec 2018 08:56 PM IST
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Parliamentary committee thinks process of disinvestment of Air India will be completed soon

संसद की एक समिति ने बृहस्पतिवार को उम्मीद जतायी कि सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी। इसके साथ ही समिति ने सरकार से सवाल किया कि कंपनी के निविवेश से ऋणों और देनदारियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय संबंधी सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति की यह रिपोर्ट बृहस्पतिवार को संसद में पेश की गयी। 

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भाजपा नेता शांता कुमार की अध्यक्षता वाली इस समिति की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति को इस बात की जानकारी है कि एयर इंडिया में सरकार की 76 प्रतिशत भागीदारी छोड़ने का निर्णय लिया गया है और इस संबंध में प्रक्रिया जारी है...कंपनी के विनिवेश की स्थिति को नोट करते हुए समिति आशा करती है कि इस प्रक्रिया को जल्दी पूरा कर लिया जाएगा।’ 
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रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति ने सरकारी क्षेत्र के बीमार उपक्रमों के विलय या अधिग्रहण के प्रतिकूल परिणामों को नोट किया है...घाटे में चल रहे सरकारी क्षेत्र के दो उपक्रमों यानी एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के विलय से बेहतर परिणाम नहीं मिले।’ 

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तत्काल निर्णय लेने की क्षमता बहुत अहम : समिति

समिति ने सरकार को आगाह किया है कि घाटे में चल रहे सरकारी क्षेत्र के दो उपक्रमों अर्थात एमटीएनएल और बीएसएनएल के विलय के संदर्भ में कोई भी फैसला करने से पहले सभी कारकों का विश्लेषण करे। समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र के ये उपक्रम ऐसे बाजार ढांचे के तहत काम कर रहे हैं जहां इन्हें निजी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र के उपक्रम सरकारी राजकोष से भारी सहायता से चल रहे हैं लेकिन एक तथ्य यह भी है कि सरकार की ओर से निर्णय लेने में विलंब के कारण इन उपक्रमों में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गयी और उत्पादन में कमी आयी। समिति ने कहा कि सरकार को विलंब को रोकने के लिए उपाय करना चाहिए।

समिति ने यह भी कहा कि आज के लगातार बदलते परिदृश्य को देखते हुए तत्काल निर्णय लेने की क्षमता बहुत अहम हो जाती है। ऐसे में उसकी राय है कि सीपीएसयू के निदेशक मंडल में विशेषज्ञों को शामिल कर उसके निर्णय क्षमता प्रबंधन और प्रशासन की गुणवत्ता में वृद्धि की जानी चाहिए। 

सीपीसीयू को स्वतंत्रता देना जरूरी : रिपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति यह महसूस करती है कि जब तक सीपीएसयू को अपेक्षित स्वतंत्रता नहीं दी जाती, वे बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं हो सकेंगे। कई सीपीएसयू में प्रयोग की जा रही प्रौद्योगिकी अप्रचलित हो गयी है। इस वजह से एचएमटी सहित कई कंपनियों ने अपनी प्रासंगिकता खो दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नीति आयोग ने अपने एक बयान में उल्लेख किया था कि जहां पर प्रतिस्पर्धी बाजार पहले से ही स्थापित हो चुके हैं, वहां सरकार को सेवाओं और सामान के विनिर्माण एवं उत्पादन में कार्यरत नहीं होना चाहिए। समिति ने कहा कि वह नीति आयोग के सुझाव से सहमत है और यह मानती है कि सरकार को विनियामक या सुविधादाता के रूप में कार्य करना चाहिए।

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