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Parliamentary Committee: सामाजिक योजनाओं में देरी पर संसदीय पैनल सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट; लगाई फटकार

Tue, 09 Dec 2025 10:29 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 09 Dec 2025 10:29 PM IST
सार

Delays in Social Welfare Schemes: संसदीय समिति ने सामाजिक न्याय मंत्रालय को चेतावनी दी है कि एससी, ओबीसी और अन्य कमजोर वर्गों के लिए बनी योजनाओं में देरी और फंड के कम इस्तेमाल से इनका प्रभाव कम हो रहा है। पीएम-दक्ष, फ्री कोचिंग और हॉस्टल निर्माण जैसी योजनाएं प्रक्रियागत अड़चनों में अटकी हैं। 

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Parliamentary Committee takes strict stance on delays in social justice scheme demand report from government
संसद की फाइल तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

संसदीय समिति ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि अनुसूचित जाति, ओबीसी और अन्य कमजोर वर्गों के लिए बनाई गई प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में लगातार देरी, धन के सही उपयोग न होना और केंद्र-राज्य समन्वय की कमजोरियों ने इन कार्यक्रमों के प्रभाव को कम कर दिया है। समिति ने चेतावनी दी है कि ऐसी ढिलाई उन समुदायों के विकास के रास्ते में बड़ी बाधा बन सकती है, जिनके लिए ये योजनाएं बनाई गई हैं।

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लोकसभा में पेश की गई अपनी 14वीं रिपोर्ट में समिति ने साफ कहा कि कौशल विकास, फ्री कोचिंग, वेंचर कैपिटल सहायता और हॉस्टल निर्माण जैसी बड़ी योजनाएं फाइलों में अटकी पड़ी हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि बजट तो दिया जाता है, लेकिन प्रक्रियागत देरी और निगरानी की कमजोर व्यवस्था के कारण जमीन पर काम नहीं दिखता। खासतौर पर पीएम-दक्ष योजना में मंत्रालय फरवरी 2024 तक एक रुपये भी खर्च नहीं कर पाया था, जिससे हजारों युवाओं के प्रशिक्षण पर असर पड़ा।
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पीएम-दक्ष में खर्च न होने पर नाराजगी
समिति ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों की समय पर सूची तैयार न करने से पीएम-दक्ष योजना लगभग ठप हो गई। हालांकि मंत्रालय ने बाद में 79.4 करोड़ रुपये जारी किए हैं, लेकिन समिति का कहना है कि 2025-26 के लिए प्रस्ताव पहले ही लेने चाहिए थे। समिति ने यह भी पूछा कि पीएम-दक्ष को पीएमकेवीवाई में मिलाने से कहीं भविष्य के लाभार्थियों पर असर तो नहीं पड़ेगा।
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फ्री कोचिंग योजना में धीमी प्रगति
समिति ने फ्री कोचिंग स्कीम पर भी चिंता जताई। देश की 55 केंद्रीय यूनिवर्सिटियों में से सिर्फ 19 ही डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के साथ एमओयू कर पाई हैं। समिति ने कहा कि बाकी विश्वविद्यालयों को जल्द जुड़ना चाहिए, नहीं तो गरीब छात्रों को अवसर नहीं मिल पाएंगे।

ओबीसी हॉस्टल निर्माण में बड़ी देरी
इसी तरह ओबीसी छात्रों के लिए 1,095 हॉस्टल मंजूर हुए थे, जिनमें 247 अब तक अधूरे हैं। समिति ने कहा कि प्रशासनिक और खरीद प्रक्रिया में देरी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और 18 महीने की तय समयसीमा हर हाल में लागू होनी चाहिए।

छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने की सिफारिश
समिति ने कहा कि पढ़ाई के बढ़ रहे खर्च को देखते हुए कई योजनाओं के तहत दी जाने वाली छात्रवृत्ति काफी कम हो गई है। इसलिए 2026-27 से इसे बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप में सीटें बढ़ाने और आय सीमा में ढील देने की भी सिफारिश की गई है, ताकि ज्यादा योग्य छात्र इसका लाभ उठा सकें।


SHRESHTA योजना में शुल्क संशोधन जरूरी
एससी छात्रों की रेजिडेंशियल स्कूलिंग योजना SHRESHTA में फीस सीमा 1 लाख से 1.35 लाख प्रति छात्र के बीच है, जिसे समिति ने अपर्याप्त बताया। उसने कहा कि इसे बढ़ाया जाए और बच्चों को उनके ही राज्य में स्कूल मिलें, ताकि सामाजिक व सांस्कृतिक परेशानियां कम हों।

सरकार ने दावा किया है कि कई सिफारिशों पर काम शुरू हो चुका है और 2024-25 में कई योजनाओं के तहत खर्च बढ़ा है। लेकिन समिति ने कहा कि 17 में से केवल 10 सुझावों को ही सरकार ने पूरी तरह स्वीकार किया है। बाकी पर स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है। समिति ने मंत्रालय से तीन महीने के भीतर अपडेटेड एक्शन-टेकन रिपोर्ट देने को कहा है और साफ चेतावनी दी कि योजनाओं में देरी कमजोर वर्गों को सीधे नुकसान पहुंचाती है।

 

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