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संसदीय समिति के समक्ष पेश हुए फेसबुक इंडिया के प्रमुख अजीत मोहन, हुई पूछताछ
Wed, 02 Sep 2020 11:15 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 02 Sep 2020 11:15 PM IST
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फेसबुक
- फोटो : पेक्सेल्स
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के कथित भेदभाव को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच फेसबुक इंडिया के एमडी अजीत मोहन बुधवार को संसदीय समिति के सामने पेश हुए। समिति ने उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान क्या सवाल पूछे गए और अजीत मोहन ने क्या जवाब दिए, अभी इसकी जानकारी साझा नहीं की गई है।
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कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने के मुद्दे पर सुनवाई के लिए फेसबुक के प्रतिनिधियों को बुलाया था। सुनवाई के दौरान फेसबुक इंडिया के प्रमुख अजीत मोहन खुद समिति के सामने पेश हुए। सुनवाई के दौरान सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे।
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यह सुनवाई ऐसे समय में हुई है जब आरोप लग रहे हैं कि फेसबुक के एक वरिष्ठ एग्जीक्यूटिव ने अपनी टीम से भाजपा नेताओं की कुछ पोस्ट पर हेट स्पीच के नियम लागू न करने को कहा था। कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इसे लेकर पिछले महीने फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को पत्र भी लिखा था।
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फेसबुक ने न तो प्रसाद के पत्र पर और न ही संसदीय समिति को लेकर कोई बयान दिया है। 21 अगस्त को एक ब्लॉग में मोहन ने कहा था कि हेट स्पीच के खिलाफ कंपनी के सामुदायिक मानकों की नीतियां है। उन्होंने लिखा था कि पेसबुक ने भारत में हस्तियों की उन पोस्ट को हटाया है जिन्होंने इन मानकों का उल्लंघन किया।
थरूर ने इस सुनवाई को लेकर ट्वीट किया कि हमने साढ़े तीन घंटे की मुलाकात ही और सर्वसम्मति से तय किया गया कि इस चर्चा को आगे बढ़ाया जाएगा। बता दें कि बढ़ते विवाद के बीच सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक ने कहा है कि साल 2020 की दूसरी तिमाही में उसने दुनियाभर में हेट स्पीच वाली 2.2 करोड़ से ज्यादा पोस्ट अपने प्लेटफॉर्म से हटाई हैं।
रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक को लिखा था शिकायती पत्र
उधर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी मंगलवार को जुकरबर्ग को एक शिकायती पत्र लिखा और उनकी कंपनी पर ‘राजनीतिक भेदभाव’ करने का आरोप लगाया। प्रसाद ने आरोप लगाया है कि फेसबुक के कई शीर्ष अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अन्य केंद्रीय मंत्रियों के लिए अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
प्रसाद ने अपने तीन पेज के पत्र में फेसबुक के कुछ कर्मचारियों पर भारत के प्रति दुर्भावना से ग्रस्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों के फेसबुक पेज जानबूझकर बंद किए जा रहे हैं या उनकी पहुंच सीमित की जा रही है। वहीं, इसके खिलाफ ‘राइट टू अपील’ का इस्तेमाल भी नहीं करने दिया जा रहा है।
प्रसाद ने आरोप लगाया, फेसबुक इंडिया की टीम, खासतौर पर कई वरिष्ठ अधिकारी, एक खास राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं और उसी आधार पर भेदभाव करते हैं। इस विचारधारा को देश की जनता दो बार लगातार स्वतंत्र व पारदर्शी आम चुनावों में खारिज कर चुकी है। प्रसाद ने पत्र में लिखा कि फेसबुक को संतुलित व निष्पक्ष होना चाहिए।