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संसद: पराली पर अंग्रेजी में बहस, हैरत में किसान- आरोप लगाया या शाबाशी दी!

Fri, 22 Nov 2019 02:01 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 22 Nov 2019 02:01 PM IST
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Parliament Winter Session Debate on Parali in English, farmers thinks is this accuse or praise
rajya sabha - फोटो : ANI

संसद के शीतकालीन सत्र के पांचवे दिन राज्यसभा में बढ़ते प्रदूषण और पराली जलाए जाने पर बहस हुई। इस दौरान भाजपा के एक सदस्य ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्रदूषण और पराली जलाये जाने के मुद्दे पर पिछले कुछ दिनों से संसद में चल रही अधिकतर चर्चा अंग्रेजी में हो रही है जिसे सुनकर दिल्ली के आसपास के राज्यों के किसानों को यह नहीं समझ में आ रहा है कि इसमें उन पर आरोप लगाया जा रहा है या उन्हें शाबाशी दी जा रही है।

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राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डीपी वत्स ने जब पूरक प्रश्न पूछते समय यह बात कही तो सदन में बैठे सदस्यों के चेहरे पर मुस्कान उभर आई।
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वत्स ने पंजाब एवं हरियाणा जैसे राज्यों में किसानों द्वारा पुआल और पराली के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे पर पूरक प्रश्न पूछते हुए कहा कि वायु प्रदूषण और पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में पुआल जलाने के विषय पर संसद में पिछले दो दिन चर्चा हुई। 
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उन्होंने कहा कि यह चर्चा अधिकतर अंग्रेजी भाषा में हुई। इसलिए इन राज्यों के हिन्दी एवं पंजाबी भाषी किसानों को यह समझ नहीं आ रहा कि इसमें उन पर आरोप लगाया जा रहा है या उन्हें शाबाशी दी जा रही है।

सदन में प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के रविप्रकाश वर्मा ने पूरक प्रश्न पूछते समय इस बात पर चिंता जताई कि देश के लिए अनाज पैदा करने वाले किसानों को पराली जलाने के कारण गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बहुत चिंताजनक मामला है और किसानों को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।


हालांकि कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने इस प्रश्न के जवाब में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह राज्य का विषय है और इस पर केन्द्र कुछ नहीं कर सकता।

बाद में सभापति एम वेंकैया नायडू ने तृणमूल कांग्रेस के सदस्य एवं वरिष्ठ वकील सुखेन्दु शेखर राय से यह जानना चाहा कि क्या उच्चतम न्यायालय ने पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई करने का कुछ निर्देश दिया है? इस पर राय ने अपना सिर हिलाकर सहमति जतायी। इस पर नायडू ने कहा कि फिर तो यह एक गंभीर मुद्दा है।

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