Rajya Sabha: राज्यसभा में चर्चा के दौरान हंगामा, BJP सांसद ने वापस लिया सवाल; विपक्ष ने किया वॉकआउट
राज्यसभा में आज उस समय हंगामा हुआ जब भाजपा सांसद आदित्य प्रसाद ने बिना कारण बताए अपना स्टार्ड प्रश्न वापस ले लिया। कांग्रेस सहित विपक्ष ने स्पष्टीकरण की मांग की और संतोषजनक जवाब न मिलने पर सदन से वॉकआउट किया।
विस्तार
राज्यसभा में बुधवार को उस समय विवाद बढ़ गया जब भाजपा सांसद आदित्य प्रसाद ने बिना किसी स्पष्ट कारण के अपना प्रश्न वापस ले लिया। इस निर्णय से नाराज विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। यह प्रश्न गृह मंत्री अमित शाह से देश में फॉरेंसिक क्षमताओं को बढ़ाने से जुड़े कदमों पर पूछा जाना था। यह प्रश्न बुधवार के प्रश्नकाल में क्रम संख्या 2 पर सूचीबद्ध था और इसे मौखिक रूप से जवाब देने के लिए स्वीकार किया गया था।
लेकिन प्रश्न सूची में लगे सुधार नोट में लिखा गया प्रश्न को वापस ले लिया जाए। सदन की कार्यवाही के दौरान जब सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने प्रश्न को छोड़कर अगले प्रश्न पर बढ़ गए, तो कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित विपक्षी सांसदों ने स्पष्टीकरण की मांग की। सरकार और सभापति द्वारा स्पष्ट कारण न दिए जाने से नाराज विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
'आप नियम जानते हैं… सांसद जब चाहें प्रश्न वापस ले सकते हैं'
विपक्ष के सवालों पर सभापति ने कहा रूल 53 के तहत कोई भी सदस्य जब चाहे अपना प्रश्न वापस ले सकता है। मैं इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। उन्होंने विपक्ष को यह भी कहा कि उन्हें इस मुद्दे को उठाने का कोई अधिकार नहीं है और उनके बयान रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए जाएंगे। सभापति ने विपक्ष को प्रश्नकाल में व्यवधान न डालने को कहा और अगले प्रश्न पर आगे बढ़ गए।
संसदीय समिति ने पर्यावरण मंजूरी में तेजी लाने पर दिया जोर
एक संसदीय समिति ने बुधवार को कहा है कि सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में कोयला खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी और वन मंजूरी प्राप्त करने में लगने वाले औसत समय को कम करने के लिए प्रयास तेज किए जाने चाहिए।
अनुराग सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली कोयला, खान और इस्पात संबंधी स्थायी समिति ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए पर्यावरण मंजूरी में औसतन 15 से 18 महीने लगते हैं, जबकि निजी क्षेत्र के वाणिज्यिक ब्लॉकों के लिए लगभग 26 महीने लगते हैं। वन मंजूरी के लिए यह समय सार्वजनिक क्षेत्र के लिए 24-30 महीने और निजी क्षेत्र के लिए 34 महीने तक है। समिति ने समय में इस अंतर का कारण पूछा है और इसे कम करने की राय दी है।
जया बच्चन ने मांगी एम्बुलेंस के लिए अलग आपातकालीन लेन
समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने बुधवार को सदन में देशभर की सड़कों पर एम्बुलेंस के लिए अलग आपातकालीन लेन बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आज के समय में जहां किराना 15 मिनट में और पिज्जा 30 मिनट में घर पहुंच जाता है, वहीं अस्पताल जाते समय एम्बुलेंस ट्रैफिक में फंस जाती है और मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। जया बच्चन ने यह मुद्दा राज्यसभा के जीरो ऑवर में उठाते हुए कहा कि इस देरी के कारण कितने मरीजों की मौत हो जाती है, इसका कोई राष्ट्रीय आंकड़ा तक नहीं है।
उन्होंने बताया कि 60% एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचतीं। शहरों में औसत देरी 15 से 30 मिनट की होती है। 55% एक्सीडेंट पीड़ितों की गोल्डन ऑवर में इलाज न मिलने के कारण मौत हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में एम्बुलेंस कॉरिडोर बनाने का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुआ। हाईवे पर भी डेडिकेटेड लेन नहीं हैं, जबकि यह राष्ट्रीय एम्बुलेंस कोड 2016 में अनिवार्य है।
भाजपा सांसद ने जेंडर-सेंसिटिव केंद्र बनाने की मांग उठाई
राज्यसभा में चर्चा के दौरान भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने देश में महिलाओं के लिए जेंडर-सेंसिटिव मानसिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि हिंसा, उत्पीड़न और ट्रॉमा झेल चुकी महिलाओं के लिए सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बेहद कम हैं और इन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
ओवैसी का बयान: वायनाड गैर-मुस्लिम चुन सकता है, तो रायबरेली-अमेठी भी मुस्लिम चुन सकती हैं
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान मुस्लिम प्रतिनिधित्व की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम-बहुल सीटें जैसे वायनाड गैर-मुस्लिम नेताओं को चुन सकती हैं, तो रायबरेली, अमेठी और इटावा जैसी सीटें भी मुस्लिम उम्मीदवारों को चुन सकती हैं। ओवैसी ने कहा कि लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की संख्या बेहद कम है और यह स्थिति चिंता का विषय है। उन्होंने भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक शक्ति सबसे कमजोर और वंचित वर्गों के हाथों में होनी चाहिए।
उन्होंने कहा अंबेडकर ने हमेशा कहा कि सामाजिक प्रगति की कुंजी राजनीतिक शक्ति है। यहां सिर्फ 4 प्रतिशत मुस्लिम सांसद हैं। सत्तारूढ़ पार्टी में तो एक भी मुस्लिम सदस्य नहीं है। ओवैसी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर अप्रत्यक्ष तौर पर निशाना साधते हुए कहा जब वायनाड जैसी मुस्लिम-बहुल सीट गैर-मुस्लिम चुन सकती है, तो रायबरेली, अमेठी और इटावा भी मुस्लिम प्रतिनिधि क्यों नहीं चुन सकतीं?