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संसद की सुरक्षा में चूक: 'PM मोदी-अमित शाह से जवाब मांगा तो हुआ निलंबन'; जानें क्या बोले विपक्षी दलों के सांसद

Thu, 14 Dec 2023 05:07 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 14 Dec 2023 05:07 PM IST
सार

लोकतंत्र के मंदिर में मर्यादा को तार-तार करने वाले माननीयों पर सभापति और लोकसभा स्पीकर ने सख्त कार्रवाई की। कुल 15 सांसदों के निलंबन के बाद सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। निलंबन पर जानिए किन सांसदों ने क्या कहा?

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Parliament Security Breach Lok Sabha Rajya Sabha Members Suspension Who Said what
सांसदों के निलंबन पर कपिल सिब्बल का बयान - फोटो : amar ujala graphics

विस्तार

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान बड़ी संख्या में सांसदों को निलंबित किया गया है। आरोप असंसदीय आचरण का है। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार तानाशाहीपूर्ण रवैया अपना रही है और विपक्षी सांसदों की बातों को अनसुना किया जा रहा है। सदन से निलंबित किए गए सांसदों ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है। विपक्ष का आरोप है कि 13 दिसंबर को दर्शक दीर्घा से दो लोगों का सदन के भीतर कूदना बड़ी खुफिया विफलता है। निलंबन के बाद सांसदों ने क्या बातें कही? जानिए 
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संसद से 15 सांसदों के निलंबन पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा, कल जो हुआ वह बड़ी सुरक्षा और खुफिया विफलता थी। हम चाहते हैं कि सरकार सदन में बयान दे। गृह मंत्री या प्रधानमंत्री को 13 दिसंबर की घटना के बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए। सांसदों को यह भी बताना चाहिए कि आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सरकार क्या कदम उठाने जा रही है? 
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उन्होंने कहा, सरकार सदन में बयान नहीं देने पर अड़ी हुई है। पीएम मोदी या गृह मंत्री शाह के बयान की मांग करने और सदन के भीतर अपना विरोध दर्ज कराने के कारण सरकार विपक्षी सांसदों की आवाज दबा रही है। 15 सांसदों को बाकी बचे शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से सदन के पटल पर स्पष्ट बयान देने की मांग कर रही हैं।

जेडीयू सांसद राजीव रंजन (ललन) सिंह ने 15 सांसदों के निलंबन पर कहा, सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए निलंबन कर रही है। ऐसी कार्रवाई से सत्ताधारी दल विपक्ष को डराना चाहती है। आप खौफ का माहौल बनाकर शासन नहीं कर सकते। अगर विपक्षी सांसद लोकसभा और पूरे संसद की सुरक्षा मे हुई चूक, खुफिया विफलता के संबंध में गृह मंत्री से बयान की मांग कर रहे हैं, तो इसमें गलत क्या था? 
ललन सिंह ने कहा, गृह मंत्री शाह को खुद पहल करनी चाहिए। उन्हें सदन में आकर बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा, सरकार निलंबित करा सकती है, उनके पास बहुमत है और वे जो चाहें कर सकते हैं। जदयू सांसद ललन सिंह के मुताबिक अगर चकमा देकर संसद में घुसने वाले दोनों व्यक्ति मुस्लिम होते या विजिटर पास किसी कांग्रेस सांसद ने जारी किया होता तो सरकार का आचरण बिल्कुल अलग होता।

डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि को भी शीतकालीन सत्र की बाकी अवधि के लिए निलंबित किया है। उन्होंने लोकसभा के स्पीकर की तरफ से दिखाई गई सख्ती पर कहा, संसद में सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के आरोपियों को एक सांसद के कहने पर विजिटर पास दिए गए। 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद इस मामले में सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 
कनिमोझी ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के मामले पर हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा, हमने देखा है कि महुआ के मामले में क्या कार्रवाई हुई है। जांच पूरी हुए बिना ही उन्हें सदन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। लोकसभा की दर्शक दीर्घा से दो लोगों के कूदने के मामले में पास जारी करने वाले सांसद को निलंबित भी नहीं किया गया है। डीएमके सांसद ने कहा, जब हमने विरोध किया और पीएम मोदी या गृह मंत्री के बयान की मांग की तो सरकार ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं।

बकौल कनिमोझी, जब विपक्षी दलों ने सरकार ने विरोध किया, तो वे विपक्ष के राजनीतिक दलों की तरफ से आवाज उठाने वाले सांसदों को निलंबित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले पांच, फिर नौ और लोगों को निलंबित कर दिया गया। सरकार को बताना चाहिए कि यह कैसा लोकतंत्र है?
 
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, सरकार ने सांसदों को सदन से निलंबित करने की संस्कृति विकसित की है। जैसे ही आप किसी बात का विरोध करते हैं कहा जाता है, आपकी बात रिकॉर्ड पर नहीं जाएगी, फिर सांसदों के चर्चा में भाग लेने का मतलब क्या है?

पीएम मोदी और अमित शाह के बयान की मांग
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, हमारी बस एक ही मांग थी कि गृह मंत्री सदन में आएं और लोकसभा की सुरक्षा में चूक पर बयान दें। इस तानाशाही सरकार को यह स्वीकार्य नहीं। जब तक गृह मंत्री सदन में आकर बयान नहीं देते सदन चलने की संभावना बहुत कम है। विपक्षी दल चर्चा चाहते हैं लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा है कि ऐसा कैसे और क्यों हुआ? प्रधानमंत्री और गृह मंत्री मौन हैं। दोनों सदनों में आकर उन्हें बयान देना चाहिए। उसके बाद ही सदन चलेगा।


जब संसद की हालत ऐसी तो देश भी सुरक्षित नहीं
पूरे प्रकरण पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मनोज झा ने कहा, जब सदन में ऐसी कोई हरकत होती है तो यह सिर्फ संसदीय मामला नहीं। यह सुरक्षा से जुड़ा मामला है। सरकार अपनी संसद को सुरक्षित नहीं रख सकती, ऐसे में देश कैसे सुरक्षित रहेगा? उन्होंने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए और कहा, आपके हाथों में देश सुरक्षित नहीं है। 24 घंटे बाद भी सरकार सामने आकर बयान नहीं दे रही है। हम इस मुद्दे को सदन में उठाते रहेंगे। सदन में सरकार को बयान देना ही होगा।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे- यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन को निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने संसद की सुरक्षा में चूक का मुद्दा उठाया। 14 अन्य सांसदों को भी इसी मुद्दे को उठाने के कारण लोकसभा से निलंबित कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री को 'सुरक्षा चूक' के संबंध में जवाब देना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री जवाबदेही से भाग रहे हैं। भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा के खिलाफ कार्रवाई का सवाल क्यों नहीं उठाया गया?

सीपीआई सांसद बिनॉय विश्वम ने कहा,  विपक्षी पार्टियों के अलग-अलग नाम हैं- कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, सीपीआई। नाम भले ही अलग-अलग हैं, सभी दल INDIA ब्लॉक के रूप में एकजुट है। हमारा केवल एक ही नारा है- लोकतंत्र की रक्षा करें, संसद का सम्मान बनाए रखें। भाजपा के मन में संसद के प्रति कोई सम्मान नहीं। उन्होंने संसद को मजाक बना लिया है। विश्वम ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने सांसद की सहमति से उपद्रवियों को सदन में लाई और संसद के भीतर खेल खेला।

नई संसद में सुरक्षा बंदोबस्त ठीक नहीं
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा, 13 दिसंबर को लोकसभा में जो हुआ उसके बाद विपक्षी दलों का गठबंधन- INDIA चाहता था कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद में बयान दें, उसके बाद पूरे मामले पर चर्चा हो। घटना के 24 घंटे बीतने के बाद भी सरकार ने कोई बयान नहीं दिया है। इससे साबित होता है कि नई संसद में सुरक्षा व्यवस्था अच्छी नहीं है।
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