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Hindi News ›   India News ›   Parliament Rules: before starting the monsoon session of Parliament, Lok Sabha Secretariat issued a long list of words considered unparliamentary

Parliament Rules: हर साल जुड़ते हैं 10 से 15 नए असंसदीय शब्द, महीनों लगते हैं ऐसे शब्दों की सूची तैयार करने में

Thu, 14 Jul 2022 06:37 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 14 Jul 2022 06:37 PM IST
सार

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी कहती हैं कि अब सरकार अगर भ्रष्टाचार करे तो उसे भ्रष्टाचार नहीं बल्कि मास्टर स्ट्रोक कहा जाना चाहिए। अगर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने जैसे कोई जुमले फेंके, तो उसे जुमला जी भी नहीं बल्कि थैंक यू बोला जाना चाहिए...

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Parliament Rules: before starting the monsoon session of Parliament, Lok Sabha Secretariat issued a long list of words considered unparliamentary
संसद में इन शब्दों के प्रयोग पर लगी रोक। - फोटो : अमर उजाला/सोनू कुमार

विस्तार

अगले कुछ दिनों में संसद का मानसून सत्र शुरू हो जाएगा। इस सत्र के शुरू होने से पहले ही लोकसभा सचिवालय ने असंसदीय माने जाने वाले शब्दों की एक लंबी चौड़ी सूची जारी की है। असंसदीय शब्दों की सूची को लेकर देश भर में विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। हालांकि लोकसभा सचिवालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। हर साल तकरीबन 15 से 20 नए शब्द असंसदीय भाषा के तौर पर जोड़े जाते हैं। ये वह शब्द होते हैं जो पिछले सदन की कार्यवाही के दौरान नोट किए जाते हैं और उसके बाद एक अध्यययन के साथ तय किया जाता है कि इन शब्दों को आने वाले लोकसभा सदन की कार्यवाही में असंसदीय शब्दों की सूची में डाल दिया जाए। लेकिन इस बार जो असंसदीय शब्दों की सूची में शब्द डाले गए हैं उन्हें लेकर विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह शब्द ज्यादातर सत्ता पक्ष के नेताओं को आड़े हाथों लेते वक्त इस्तेमाल किए जाते थे। इसलिए जानबूझकर भाजपा सरकार ने ऐसे शब्दों को असंसदीय शब्दों की सीमा रेखा में बांध दिया है।

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लगातार चलता रहेगा ये सिलसिला

लोकसभा सचिवालय से अवकाश प्राप्त एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि असंसदीय शब्दों की सूची तकरीबन हर साल बनाई जाती है। तकरीबन 15 से 20 शब्द एक साल में इसमें जोड़े जाते हैं, जो सदन की शुरुआत से पहले जारी होते हैं। उक्त अधिकारी का कहना है यह वह शब्द होते हैं जो पिछले सदन के दौरान इस्तेमाल हुए होते हैं और बाद में उसको अध्ययन करने पर अमर्यादित भाषा और अमर्यादित शब्दों की कैटेगरी में मान लिया जाता है। लोकसभा सचिवालय से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले सत्र में कई शब्द ऐसे इस्तेमाल किए गए थे, जिन्हें इस बार असंसदीय घोषित कर दिया गया है। वे कहते हैं कि अगले साल शुरू होने वाले सदन में फिर से असंसदीय शब्दों की एक नई सूची जारी होगी। उनका कहना है कि यह सिलसिला लगातार चलता चला आ रहा है। जिसमें न सिर्फ लोकसभा बल्कि राज्यसभा के साथ-साथ देश के अलग-अलग राज्यों के विधानसभा की कार्यवाहियों के दौरान बोले गए शब्दों को अध्ययन के बाद असंसदीय शब्दों की श्रेणी में रखा जाता है।

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लोकसभा सचिवालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक असंसदीय शब्दों की सूची को जारी करने में एक लंबा वक्त लगता है। वे कहते हैं कि जो शब्द असंसदीय होते हैं, उन्हें लोकसभा और राज्यसभा अध्यक्ष पहले से ही असंसदीय घोषित कर देते हैं। फिर भी पूरे सदन की कार्यवाही में बोले जाने वाले शब्दों और उन शब्दों के बाद दी गई लोकसभा और राज्यसभा अध्यक्ष की टिप्पणी के साथ संसदीय शब्दों की एक सूची तैयार की जाती है। जिसमें यह मिलान किया जाता है कि बोले गए शब्द क्या पहले से असंसदीय शब्दों की श्रेणी में हैं या इनको पहली बार असंसदीय शब्दों की श्रेणी में रखा गया है। उसके बाद प्रावधान के मुताबिक शब्दों को असंसदीय भाषा की सीमा रेखा में बांध दिया जाता है। हालांकि असंसदीय शब्दों की पहचान के बाद भी सदन के दौरान ऐसा कई बार होता है कि नेता उन शब्दों का इस्तेमाल करते ही हैं और बाद में इन शब्दों को लिखत-पढ़त से बाहर कर दिया जाता है।

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कांग्रेस, टीएमसी ने कसा तंज

लेकिन इस बार जो असंसदीय शब्दों की नई सूची जारी हुई है, उसे लेकर विपक्षी दल खासे नाराज हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद पीएल पुनिया कहते हैं कि भाजपा ने अपने मन मुताबिक उन शब्दों को असंसदीय शब्दों की श्रेणी में रखा है, जिससे वह खुद को जुड़ा हुआ पाते हैं। पुनिया कहते हैं कि जो शब्द असंसदीय होते हैं, उन्हें सदन में नेताओं के बोलने के बाद भी बाहर कर ही दिया जाता है। लेकिन इस बार असंसदीय शब्दों कि जो परिभाषा गढ़ी गई है वह चौंकाने वाली है। राज्यसभा सांसद कांग्रेस नेता जयराम रमेश कहते हैं की मोदी की सरकार की सच्चाई दिखाने के लिए विपक्ष जिन शब्दों का इस्तेमाल करता है वह सभी असंसदीय माने जाएंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब आगे क्या विषगुरु?


 

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी कहती हैं कि अब सरकार अगर भ्रष्टाचार करे तो उसे भ्रष्टाचार नहीं बल्कि मास्टर स्ट्रोक कहा जाना चाहिए। अगर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने जैसे कोई जुमले फेंके, तो उसे जुमला जी भी नहीं बल्कि थैंक यू बोला जाना चाहिए। कांग्रेसी नहीं बल्कि कल मूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी नए असंसदीय शब्दों पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। महुआ कहती हैं सरकार ने उन सभी शब्दों को प्रतिबंधित कर दिया है, जिसके जरिए वह यह सदन के माध्यम से पूरे देश को बताना चाहती हैं कि भाजपा कैसे देश को बर्बाद कर रही है।

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