{"_id":"6a58e955fb26a2140f0e3cd7","slug":"parliament-monsoon-session-lok-sabha-national-honour-amendment-women-reservation-delimitation-bill-nda-meetin-2026-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Parliament: लोकसभा में राष्ट्रीय गौरव कानून समेत कई विधेयक पेश करने की तैयारी में सरकार, नए बिल किए सूचीबद्ध","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Parliament: लोकसभा में राष्ट्रीय गौरव कानून समेत कई विधेयक पेश करने की तैयारी में सरकार, नए बिल किए सूचीबद्ध
Thu, 16 Jul 2026 07:53 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 16 Jul 2026 07:53 PM IST
सार
संसद के आगामी मानसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। इनमें राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन, संप्रभु ऋण बाजार, महिला आरक्षण, परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। दूसरी ओर, विपक्ष भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।
विज्ञापन
संसद भवन
- फोटो : ANI
विस्तार
संसद का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस होने के आसार हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सत्र की रणनीति तैयार करने के लिए 17 जुलाई (शुक्रवार) को वरिष्ठ भाजपा नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एनडीए (NDA) के सदन के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जा सकती है। इस सत्र में विपक्ष कई प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जिनमें नीट (NEET) पेपर लीक, पश्चिम एशिया संघर्ष में भारतीय नाविकों की मौत और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण जैसे विषय शामिल हैं।
संसद के मानसून सत्र में सरकार सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अमपान या इसे गाने में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने और जन्म-मृत्यु के देरी से पंजीकरण के नियमों को और कड़ा करने से संबंधित विधेयकों को पेश करेगी। इसके अलावा, आयकर (संशोधन) विधेयक और एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े एक विधेयक समेत कई विधेयक भी लोकसभा में पेश करने की योजना बना रही है। लोकसभा सचिवालय की ओर से बुधवार को जारी बुलेटिन में उन विधेयकों की सूची जारी की गई, जिन्हें आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद के निचले सदन में पेश किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल भी पेश होगा
सरकार मानसून सत्र में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े अध्यादेश की जगह नया विधेयक पेश करेगी। इसके जरिये सीजेआई सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की गई है। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने इस अध्यादेश के खिलाफ वैधानिक प्रस्ताव पेश किया है। संसदीय परंपरा के अनुसार, जब किसी अध्यादेश की जगह विधेयक लाया जाता है, तो विपक्ष उसके विरोध में ऐसा प्रस्ताव ला सकता है। पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पी.के. मल्होत्रा के अनुसार, संसद का सत्र शुरू होने के बाद किसी अध्यादेश को 42 दिन यानी छह सप्ताह के भीतर संसद से पारित कराना होता है। ऐसा नहीं होने पर अध्यादेश स्वतः समाप्त हो जाता है।
विज्ञापन
विदेशी अंशदान (FCRA) और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण विधेयक सूचीबद्ध
सरकार ने आगामी सत्र के लिए लोकसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयक सूचीबद्ध किए हैं। सदन के बुलेटिन के अनुसार, सरकार 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने जा रही है। इस विधेयक के माध्यम से मूल अधिनियम (1971) में संशोधन किया जाएगा, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन में किसी भी प्रकार का अपमान या बाधा उत्पन्न करने को एक दंडनीय अपराध बनाया जाएगा। इसके अलावा, सरकार बहुप्रतीक्षित 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA) को भी विचार और पारित कराने के लिए पटल पर रख सकती है, जो इससे पहले बजट सत्र के दौरान केरल चुनावों के चलते टल गया था।
एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी
सरकार अगले सप्ताह से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने की योजना बना रही है। इस विधेयक का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र के लिए कारोबार को आसान बनाना और पुराने 2006 के कानून को आज की जरूरतों के अनुकूल ढालना है। यह विधेयक भुगतान में देरी की समस्या को दूर करने के तंत्र को मजबूत करेगा। इसके तहत सूक्ष्म और लघु इकाइयों के लिए मध्यस्थता फैसलों को लागू करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, राज्यों को 'सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद' (एमएसईएफसी) के गठन में लचीलापन मिलेगा, जिससे वे ऐसी अधिक परिषदें बना सकेंगे।
ये भी पढ़ें: परिसीमन विधेयक: खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की, रखी ये मांग
संवैधानिक संशोधन और महिला आरक्षण पर परीक्षा
सत्र के दौरान संसद की एक संयुक्त समिति उस संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी रिपोर्ट अपना सकती है, जिसमें गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है। इस संशोधन को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो सत्तापक्ष के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
इसके साथ ही, सरकार पिछले सत्र में आवश्यक संख्या बल न होने के कारण गिरे महिला आरक्षण विधेयक को एक बार फिर परिसीमन विधेयक के साथ ला सकती है। सरकार सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने के विभिन्न विकल्पों पर काम कर रही है, ताकि दक्षिण भारतीय राज्यों की इस चिंता को दूर किया जा सके कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से संसद में उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे कड़े
इसके अलावा, सरकार 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' भी पेश कर सकती है। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के 'देरी से होने वाले पंजीकरण' (Delayed Registration) के नियमों को और अधिक कड़ा और पारदर्शी बनाना है। यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में संशोधन करेगा, जिसमें इससे पहले साल 2023 में भी बदलाव किए गए थे।
विज्ञापन
संसद के मानसून सत्र में सरकार सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अमपान या इसे गाने में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने और जन्म-मृत्यु के देरी से पंजीकरण के नियमों को और कड़ा करने से संबंधित विधेयकों को पेश करेगी। इसके अलावा, आयकर (संशोधन) विधेयक और एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े एक विधेयक समेत कई विधेयक भी लोकसभा में पेश करने की योजना बना रही है। लोकसभा सचिवालय की ओर से बुधवार को जारी बुलेटिन में उन विधेयकों की सूची जारी की गई, जिन्हें आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद के निचले सदन में पेश किया जाएगा।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल भी पेश होगा
सरकार मानसून सत्र में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े अध्यादेश की जगह नया विधेयक पेश करेगी। इसके जरिये सीजेआई सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की गई है। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने इस अध्यादेश के खिलाफ वैधानिक प्रस्ताव पेश किया है। संसदीय परंपरा के अनुसार, जब किसी अध्यादेश की जगह विधेयक लाया जाता है, तो विपक्ष उसके विरोध में ऐसा प्रस्ताव ला सकता है। पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पी.के. मल्होत्रा के अनुसार, संसद का सत्र शुरू होने के बाद किसी अध्यादेश को 42 दिन यानी छह सप्ताह के भीतर संसद से पारित कराना होता है। ऐसा नहीं होने पर अध्यादेश स्वतः समाप्त हो जाता है।
विज्ञापन
विदेशी अंशदान (FCRA) और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण विधेयक सूचीबद्ध
सरकार ने आगामी सत्र के लिए लोकसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयक सूचीबद्ध किए हैं। सदन के बुलेटिन के अनुसार, सरकार 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने जा रही है। इस विधेयक के माध्यम से मूल अधिनियम (1971) में संशोधन किया जाएगा, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन में किसी भी प्रकार का अपमान या बाधा उत्पन्न करने को एक दंडनीय अपराध बनाया जाएगा। इसके अलावा, सरकार बहुप्रतीक्षित 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA) को भी विचार और पारित कराने के लिए पटल पर रख सकती है, जो इससे पहले बजट सत्र के दौरान केरल चुनावों के चलते टल गया था।
एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी
सरकार अगले सप्ताह से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने की योजना बना रही है। इस विधेयक का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र के लिए कारोबार को आसान बनाना और पुराने 2006 के कानून को आज की जरूरतों के अनुकूल ढालना है। यह विधेयक भुगतान में देरी की समस्या को दूर करने के तंत्र को मजबूत करेगा। इसके तहत सूक्ष्म और लघु इकाइयों के लिए मध्यस्थता फैसलों को लागू करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, राज्यों को 'सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद' (एमएसईएफसी) के गठन में लचीलापन मिलेगा, जिससे वे ऐसी अधिक परिषदें बना सकेंगे।
ये भी पढ़ें: परिसीमन विधेयक: खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की, रखी ये मांग
संवैधानिक संशोधन और महिला आरक्षण पर परीक्षा
सत्र के दौरान संसद की एक संयुक्त समिति उस संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी रिपोर्ट अपना सकती है, जिसमें गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है। इस संशोधन को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो सत्तापक्ष के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
इसके साथ ही, सरकार पिछले सत्र में आवश्यक संख्या बल न होने के कारण गिरे महिला आरक्षण विधेयक को एक बार फिर परिसीमन विधेयक के साथ ला सकती है। सरकार सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने के विभिन्न विकल्पों पर काम कर रही है, ताकि दक्षिण भारतीय राज्यों की इस चिंता को दूर किया जा सके कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से संसद में उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे कड़े
इसके अलावा, सरकार 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' भी पेश कर सकती है। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के 'देरी से होने वाले पंजीकरण' (Delayed Registration) के नियमों को और अधिक कड़ा और पारदर्शी बनाना है। यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में संशोधन करेगा, जिसमें इससे पहले साल 2023 में भी बदलाव किए गए थे।