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Sansad Diary: ट्रेनों के देर से चलने पर संसदीय समिति ने जताई चिंता; देश में 5.9 करोड़ फास्टैग सक्रिय

Wed, 04 Feb 2026 06:46 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 04 Feb 2026 06:46 PM IST
सार

सरकार ने बताया कि जनगणना 2027 में जाति गणना दूसरे चरण में होगी। जाति सहित सभी सवाल दूसरे चरण से पहले अधिसूचित किए जाएंगे। जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, स्व-गणना का विकल्प मिलेगा और इसके लिए ₹11,718 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

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Parliament Diary, Caste census will be conducted in the second phase, questions will be notified first
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय - फोटो : एएनआई

विस्तार

सरकार ने बुधवार को संसद को बताया कि जनगणना 2027 के दौरान जाति गणना दूसरे चरण में कराई जाएगी। यह चरण जनसंख्या गणना कहलाता है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से जुड़े जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण एकत्र किए जाएंगे।

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राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्र सरकार की जनगणना 2027 कराने की मंशा अधिसूचित कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे चरण के लिए जाति से जुड़े सवालों सहित सभी प्रश्न निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंतिम रूप देकर, चरण शुरू होने से पहले अधिसूचित किए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि जाति गणना को लेकर तमिलनाडु सहित कई राज्यों के विभिन्न संगठनों से प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए हैं।

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जनगणना दो चरणों में होती है 

  • पहला चरण (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन- एचएलओ): इसमें प्रत्येक परिवार की आवास स्थिति, संपत्तियां, सुविधाएं आदि का विवरण लिया जाता है।
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  • दूसरा चरण (पॉपुलेशन एन्यूमरेशन-पीई): इसमें हर व्यक्ति के जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विवरण जुटाए जाते हैं।

पहले चरण के प्रश्न अधिसूचित किए जा चुके हैं

सरकार ने बताया कि पहले चरण के प्रश्न 22 जनवरी को अधिसूचित किए जा चुके हैं, जबकि दूसरे चरण के प्रश्न, जिसमें जाति से जुड़े सवाल भी शामिल होंगे। दूसरे चरण से पहले अधिसूचित किए जाएंगे।

डिजिटल उपकरण से होगी गणना

यह विशाल प्रक्रिया देशभर में करीब 30 लाख गणनाकर्ताओं व पर्यवेक्षकों और लगभग 1.3 लाख जनगणना अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, जिन्हें डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि मोबाइल एप्स, सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम और स्व-गणना पोर्टल विकसित किए जा चुके हैं। डेटा संग्रह, प्रसारण और सर्वर-स्तर पर उचित सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि मोबाइल एप्स में ऑफलाइन डेटा संग्रह की सुविधा होगी। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में कागजी फॉर्म का उपयोग होगा और तब डेटा चार्ज स्तर पर ही डिजिटाइज किया जाएगा। गणनाकर्ता घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे ताकि किसी भी आधार पर बहिष्करण न हो। स्व-गणना की सुविधा अतिरिक्त विकल्प के रूप में उपलब्ध रहेगी। स्व-गणना का विकल्प हाउस-लिस्टिंग शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों के लिए दिया जाएगा। हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तय 30 दिनों की अवधि में 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच कराया जाएगा।

ट्रेनों के देर से चलने पर संसदीय समिति ने जताई चिंता

देश में ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ गई है। 2021-22 में जहां 90 फीसदी ट्रेनें समय पर चल रहीं थीं वहीं 2023-24 में यह गिरकर 73.62 फीसदी रह गई। संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने बुधवार को लोकसभा में 'भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में समयबद्धता और यात्रा समय' शीर्षक से अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें सभी प्रकार की ट्रेनों के समयबद्धता प्रदर्शन की जांच के बाद सुधार के लिए कई उपायों की सिफारिश की गई है। समिति ने रेलवे की ओर से ट्रेनों के समय को दर्ज करने के भ्रामक तरीके पर सवाल उठाया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015-16 में ट्रेनों की समयबद्धता 77.51 प्रतिशत थी जो 2018-19 में 69.23 प्रतिशत पर आ गई थी। 2021-22 में इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ और यह 90.48 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि 2023-24 में यह फिर से घटकर 73.62 प्रतिशत हो गया, हालांकि 2024-25 (अगस्त तक) में इसमें कुछ सुधार होकर 78.67 प्रतिशत रहा। समयबद्धता को रिकॉर्ड करने के तरीकों पर सवाल उठाते हुए रिपोर्ट में कहा गया, समिति ने ऑडिट अवलोकन से पाया है कि रेलवे ट्रेनों की समयबद्धता को समापन स्टेशनों पर मापता है। जबकि, अन्य देशों में इसे आरंभिक स्टेशन, बीच में आने वाले स्टेशन और समापन स्टेशनों पर मापा जाता है। इसमें आगे कहा गया, इसके अलावा, समयबद्धता मापने के लिए, रेलवे निर्धारित समय के संदर्भ में 15 मिनट की देरी की छूट देता है।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने यह भी पाया कि समयबद्धता मापने के वैश्विक सर्वोत्तम तरीकों में बहुत सख्त मानदंड निर्धारित हैं। जापान में मापदंड सेकंड में है, और निर्धारित समय से पहले आने वाली ट्रेन को भी समयबद्धता का उल्लंघन माना जाता है। समिति का मानना है कि समयबद्धता की निगरानी का रेलवे का संकीर्ण दृष्टिकोण रास्ते में होने वाली देरी को ध्यान में नहीं रखता है, जिससे ट्रेनों के वास्तविक प्रदर्शन की अधूरी और अक्सर भ्रामक तस्वीर सामने आती है। भारतीय रेलवे के समयबद्धता मानक में 15 मिनट की देरी की मौजूदा छूट प्रदर्शन मूल्यांकन की सटीकता को और कम कर देती है। समिति ने सिफारिश की कि रेलवे मौजूदा समापन स्टेशन के साथ-साथ आरंभिक/मध्यवर्ती स्टेशनों पर एकीकृत निगरानी के माध्यम से समयबद्धता आकलन की समीक्षा और संशोधन करे।

एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत गति में नगण्य वृद्धि
भारतीय रेलवे की 2016-17 में शुरू की गई मिशन रफ्तार पहल के बारे में बात करते हुए, जिसका उद्देश्य 2021-22 के अंत तक मालगाड़ियों की औसत गति को 25 किमी प्रति घंटे से बढ़ाकर 50 किमी प्रति घंटे और मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत गति को 50 किमी प्रति घंटे से बढ़ाकर 75 किमी प्रति घंटे करना था, समिति ने पाया कि मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों और मालगाड़ियों की औसत गति में क्रमशः केवल 50.6 किमी प्रति घंटे और 23.6 किमी प्रति घंटे का सुधार हुआ है।

गृह मंत्रालय में खाली पदों की संख्या 2021 में 1,389 से घटकर 2025 में 757 हुईं

पिछले पांच वर्षों में गृह मंत्रालय में रिक्त पदों की संख्या में कमी आई है। मंत्रालय में 2021 में रिक्त पदों की संख्या 1,389 थी, जो 2025 में घटकर 757 हो गई। एक सवाल के लिखित जवाब में गृह राज्यमंत्री बंडी संजय कुमार ने राज्यसभा को बताया कि 2021 में गृह मंत्रालय में 3,479 स्वीकृत पद थे, जिनमें से 1,389 खाली थे। ये कुल संख्या का लगभग 39.9 प्रतिशत थे। 2022 में 3,472 स्वीकृत पदों में खाली पदों की संख्या घटकर 1,064 हो गई। 2023 में 3,769 स्वीकृत पदों के मुकाबले रिक्तियों की संख्या और घटकर 904 हो गई। 2024 में 3,992 स्वीकृत पदों में से 987 पद खाली थे, जबकि 2025 में 4,040 स्वीकृत पदों के मुकाबले रिक्तियों की संख्या घटकर 757 हो गई यानी, खाली पदों की दर 18.7 प्रतिशत हो गई जो समीक्षाधीन अवधि में सबसे कम है।

11.86 करोड़ फास्टटैग जारी, 5.9 करोड़ सक्रिय

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा को बताया कि दिसंबर 2025 तक देशभर में 11.86 करोड़ फास्टटैग जारी किए गए, जिनमें 5.9 करोड़ सक्रिय हैं। फिलहाल, देशभर में नेशनल हाईवे पर 98 फीसदी टोल फीस इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली के जरिए वसूले जा रहे हैं।

मोदी की चुप्पी विपक्ष के शोर से ज्यादा असरदार: देवेगौड़ा

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने बुधवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी की चुप्पी में देश के लिए काम करने की ज्यादा ताकत है, जो विपक्ष के सभी बयानों से कहीं अधिक प्रभावी साबित होती है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए देवेगौड़ा ने कहा, पिछले 11 वर्षों में देश की आर्थिक नींव मजबूत हुई है। वैश्विक संकटों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सरकार की नीतियों से महंगाई नियंत्रण में रही, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को सीधा फायदा हुआ। नागरिकों की आय, बचत और खरीद क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों के लिए मोदी सरकार को बधाई देते हुए कहा, विपक्ष को अब समझ जाना चाहिए कि मोदी के शब्दों के साथ-साथ उनकी चुप्पी को भी ध्यान से सुनना चाहिए, क्योंकि वही देशहित में बड़े फैसले संभव बनाती है।

निशिकांत ने दिखाईं चार किताबें कहा-इनमें गांधी परिवार के कृत्य

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के किताब वाले आरोपों पर पलटवार करने के लिए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि राहुल यहां एक अप्रकाशित किताब का सहारा ले रहे हैं। उनके पास ऐसी चार किताबें हैं, जिनमें गांधी परिवार के सदस्यों के कृत्यों का जिक्र है। इसके बाद उन्होंने किताबों की प्रतियां लहरानी शुरू कर दी।

इसमें एक किताब में नेहरू का वह पत्र भी था जिसमें उन्होंने अध्यक्ष से माउंट बैटन मेमोरियल फंड के लिए एक आयोजन का जिक्र किया। दुबे का इन किताबों की चर्चा करते ही कांग्रेस के सदस्य बेहद उग्र हो गए। मंगलवार की तरह सदस्यों ने कागज के टुकड़े आसन पर फेंकने शुरू कर दिए। सदन के बाहर राहुल ने नरवणे की पुस्तक दिखाई और कहा कि अगर पीएम सदन में आए तो वह उन्हें यह किताब भेंट करेंगे।
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