{"_id":"6056762e8ebc3e592c736522","slug":"parambir-singh-letter-cracked-between-shiv-sena-ncp-friendship","type":"story","status":"publish","title_hn":"परमबीर सिंह के पत्र: शिवसेना-एनसीपी की दोस्ती में दरार, पूरे मामले से कांग्रेस गायब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
परमबीर सिंह के पत्र: शिवसेना-एनसीपी की दोस्ती में दरार, पूरे मामले से कांग्रेस गायब
Sun, 21 Mar 2021 03:54 AM IST
देव कश्यप
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 21 Mar 2021 03:54 AM IST
विज्ञापन
परमबीर सिंह, पूर्व पुलिस कमिश्नर, मुंबई
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के लेटर बम से शिवसेना-एनसीपी की दोस्ती में दरार पड़ती दिखाई दे रही है। इससे न केवल एनसीपी बल्कि शिवसेना की छवि को बड़ा झटका लगा है। हालांकि, इस पूरी तस्वीर से कांग्रेस गायब है। जाहिर है कि शिवसेना अपनी छवि बचाने के लिए इस चक्रव्यूह से निकलना चाहेगी।
विज्ञापन
उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटिलिया के पास जिलेटिन की छड़ें लदी स्कॉर्पियो बरामद होने के बाद क्राइम इटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) के पूर्व प्रमुख एपीआई सचिन वाजे की गिरफ्तारी से राज्य की सियासत में नया मोड़ आया है। जब एंटीलिया मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुरू की तो वाजे की करतूत सामने आने लगी।
विज्ञापन
इस मामले में पूरी तरह से शिवसेना को निशाना बनाया जाने लगा। वाजे को कोरोना काल के दौरान पिछले जून महीने में बहाल किया गया था। तब से यह माना जा रहा था कि वह शिवसेना का खासमखास है। वहीं, यह भी खबरें चली कि वाजे की बहाली के मुद्दे पर एनसीपी ने विरोध जताया था। लेकिन अब सिंह के पत्र से इससे पूरे प्रकरण में एनसीपी का असली चेहरा सामने आ गया है। इससे अनिल देशमुख के मंत्रिपद पर ग्रहण लग चुका है लेकिन महाविकास आघाड़ी सरकार के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान लग गया है। वहीं, शिवसेना और एनसीपी के बीच दोषारोपण की शुरुआत भी हो गई है। इससे दोनो दलों के बीच दूरी बढ़ेगी जिसका पूरा फायदा भाजपा उठाएगी।
विज्ञापन
100 करोड़ वसूली मामले में ईडी भी दे सकती है दखल
अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगने के बाद अब इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की इंट्री हो सकती है। सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजे गए पत्र की प्रति राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भी भेजी है। वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से करने की मांग की है। फडणवीस की इस मांग से समझा जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले की जांच में शामिल हो सकती है। इस बीच भाजपा के किरीट सोमैया ने कहा है कि अब समझ में आया कि सचिन वाजे अपनी कार में नोट गिनने वाली मशीन लेकर क्यों घूमता था।
भाजपा की चेतावनी, रविवार तक देशमुख को नहीं हटाया तो आंदोलन
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि इतने संगीन आरोप लगने के बाद भी यदि रविवार तक अनिल देशमुख को गृहमंत्री पद से नहीं हटाया गया तो भाजपा राज्य में जोरदार आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि अब तो यह स्पष्ट है, ठाकरे सरकार भ्रष्ट है। पाटिल ने कहा कि उद्धव सरकार ने अपने कारनामों से यह सिद्ध कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति का पूरी तरह अपराधीकरण हो गया है।
देशमुख के बचाव में कांग्रेस, कहा-भाजपा ने की साजिश
महाराष्ट्र की सत्ता में भागीदार कांग्रेस ने गृहमंत्री देशमुख का बचाव किया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि यदि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मामले में पटना में एफआईआर दर्ज हो सकती है तो सांसद मोहन डेलकर के मुंबई में आत्महत्या करने पर यहां मामला क्यों नहीं दर्ज हो सकता। सावंत ने कहा कि यह भाजपा की कुटिल साजिश की है। सिंह के पत्र से साबित होता है कि डेलकर मामले में दबाव में आई भाजपा ने यह साजिश रची है।