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पालघर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव सरकार से मांगी जांच रिपोर्ट

Fri, 01 May 2020 03:04 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 01 May 2020 03:04 PM IST
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palghar lynching case SC sought probe report from maharashtra govt, five more people arrested in case
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के पालघर में 16 अप्रैल को दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट-पीट कर हत्या किए जाने के मामले में शुक्रवार को राज्य की उद्धव ठाकरे की सरकार को जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

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न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार को यह निर्देश दिया। महाराष्ट्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करनी है।
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इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि भीड़ द्वारा दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट-पीट कर हत्या की घटना पुलिस की विफलता का नतीजा है क्योंकि लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करके यह भीड़ एकत्र हुई थी।
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शीर्ष अदालत ने इस हत्याकांड की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह इसकी एक प्रति महाराष्ट्र सरकार के वकील को सौंपे। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार चार सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल करेगी।

यह याचिका शशांक शेखर झा ने अधिवक्ता राशि बंसल के माध्यम से दायर की है। याचिका में इस हत्याकांड की जांच शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल या फिर शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में किसी न्यायिक आयोग से कराने का अनुरोध किया गया है। इसी तरह, याचिका में सारा मामला सीबीआई को सौंपने और इस घटना को रोकने में विफल रहने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

इस हत्याकांड में मारे गए तीनों व्यक्ति मुंबई के कांदिवली इलाके के निवासी थे और लॉकडाउन के दौरान एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कार से गुजरात के सूरत जा रहे थे।


पालघर में उनकी कार पर हमला किया गया और इस हमले में चिकने महाराज कल्पवृक्षगिरि (70), सुशील गिरि महाराज (35) और कार के ड्राइवर नीलेश तेलगडे (30) को हिंसक भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला। याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने मीडिया की खबरों का हवाला दिया और दावा किया कि इस घटना में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है क्योंकि उसने साधुओं को बचाने के लिये बल का प्रयोग नहीं किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह पूरी घटना पूर्व नियोजित थी और इसमें पुलिस की संलिप्तता भी हो सकती है।

पुलिस ने इस सनसनीखेज घटना के सिलसिले में 115 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। इनमें नौ आरोपी नाबालिग हैं और उन्हें किशोर सुधार गृह भेज दिया गया है।

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