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पालघर भीड़ हिंसा पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, कहा- दो आरोपियों का भाजपा से संबंध

Fri, 24 Apr 2020 01:17 PM IST
आसिम खान पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: आसिम खान Updated Fri, 24 Apr 2020 01:17 PM IST
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Palghar case: Two accused have links with BJP says Maharashtra Congress
सांकेतिक तस्वीर

महाराष्ट्र में कांग्रेस ने गुरुवार को आरोप लगाया कि पालघर में भीड़ द्वारा तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की घटना के दो आरोपी भाजपा के सदस्य हैं और भगवा पार्टी को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि, भाजपा ने इस आरोप को खारिज कर दिया और कहा कि उसके द्वारा उल्लेख किए जा रहे दोनों लोग भगवा पार्टी के सदस्य नहीं हैं।

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प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने मुंबई में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर निकुले और भाऊ साठे को आरोपी संख्या क्रमश: 61 और 65 के रूप में नामजद किया गया है। वे दोनों पालघर जिले में भाजपा की दहानु मंडल इकाई के पदाधिकारी हैं।
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सावंत ने कहा कि भाजपा को अपने पदाधिकारियों के खिलाफ अवश्य ही कार्रवाई करनी चाहिए, जो दो साधुओं और उनके चालक की हत्या के आरोपी हैं। साथ ही, केंद्र में सत्तारूढ़ इसकी (भगवा पार्टी की) सरकार को भीड़ हिंसा पर रोक लगाने के लिए एक कानून बनाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि निकुले को भाजपा दहानु मंडल के आधिकारिक फेसबुक पेज पर गादचिंकल गांव के बूथ स्तरीय पदाधिकारी के तौर पर देखा जा सकता है। इसी गांव में बच्चा चोर होने के संदेह में भीड़ ने दो साधुओं सहित तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इस मामले में 100 से अधिक लोगों को आरोपी के तौर पर नामजद किया गया है।

सावंत ने आरोप लगाया कि साठे भी इसी गांव के बूथ स्तरीय पदाधिकारी (भाजपा के) हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती देवेंद्र फडणवीस सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए भाजपा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ली गई कई तस्वीरों में से एक में निकुले भी दिख रहा है।

सावंत ने कहा कि ग्राम पंचायत सरपंच चित्रा चौधरी को भी तस्वीरों में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा पिछले 10 साल से इस ग्राम पंचायत में सत्तारूढ़ है। सांवत ने कहा कि चौधरी के अलावा, स्थानीय भाजपा मंडल प्रमुख संगीता कोटेला और दहानु पंचायत समिति प्रमुख रमा ठाकरे भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

केंद्र भीड़ हिंसा के खिलाफ कानून लाए: कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन की महाराष्ट्र विकास आघाडी सरकार भीड़ हिंसा की इस घटना में संलिप्त लोगों को अदालत के कठघरे में ले जाएगी। उन्होंने कहा, ‘लेकिन यह आश्चर्यजनक है कि भाजपा ने साधुओं की हत्या के आरोपी अपने लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।’ सावंत ने मांग की कि केंद्र भीड़ हिंसा के खिलाफ एक कानून लाए जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि शीर्ष न्यायालय के निर्देश के बावजूद केंद्र सरकार पिछले दो साल में भीड़ हिंसा के खिलाफ कानून नहीं लाई। इसके अलावा इस सिलसिले में 11 दिशा-निर्देश भी जारी किए गए लेकिन केंद्र सरकार ने इनपर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद जुलाई 2019 में भी शीर्ष न्यायालय ने भीड़ हिंसा के मामलों पर संज्ञान लिया और केंद्र को एक नोटिस भेजकर पूछा कि पूर्व के निर्देशों पर क्या कदम उठाए गए हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी नीत केंद्र सरकार ने कुछ नहीं कहा।

उन्होंने कहा, ‘पालघर घटना के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फोन किया लेकिन भीड़ हिंसा की घटनाओं के खिलाफ कानून लाने के लिए कुछ नहीं किया।’ भीड़ हिंसा की घटनाएं अन्य राज्यों में भी हुईं लेकिन भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता ने कोई चिंता प्रकट नहीं की। इसके बजाय कुछ मामलों में आरोपियों का अभिनंदन किया गया।

संपर्क किये जाने पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कांग्रेस के आरोप को खारिज करते हुए कहा, कांग्रेस द्वारा उल्लेख किए गए दोनों लोग भाजपा कार्यकर्ता नहीं हैं। तस्वीरें (कांग्रेस द्वारा जारी) सार्वजनिक कार्यक्रम की हैं जिनमें कई ग्रामीण शामिल हुए थे।

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