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Palamu Violence: पलामू में क्यों हुई हिंसा? किस वजह से भिड़े दो समूह, अभी क्या हालात हैं? जानें सबकुछ

Thu, 16 Feb 2023 08:02 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 16 Feb 2023 08:02 PM IST
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सार
पलामू जिले के पांकी इलाके में महाशिवरात्रि से पहले तोरणद्वार बनाने को लेकर दो समुदायों में विवाद हो गया। विवाद बाद में सांप्रदायिक हिंसा के रूप में तब्दील हो गया। इलाके में अभी धारा 144 लागू है।
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Palamu Violence: what happened in palamu and reason of violence, situation now
पलामू हिंसा - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

झारखंड में पलामू जिले के पांकी इलाके में महाशिवरात्रि से पहले प्रवेशद्वार (तोरणद्वार)  बनाने को लेकर दोनों समुदायों में विवाद हो गया। विवाद बाद में सांप्रदायिक हिंसा के रूप में तब्दील हो गया जिसमें दोनों समुदायों के बीच पत्थरबाजी हुई हुई। घटना के एक दिन बाद गुरुवार को भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इलाके में अभी धारा 144 लागू है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है। 


आखिर ये विवाद शुरु कैसे हुआ? हिंसा क्यों भड़की? प्रशासन ने क्या कदम उठाया? अभी क्या स्थिति है? उपद्रवियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? इसे लेकर क्या राजनीति हो रही है? आइये जानते हैं…

पलामू हिंसा
पलामू हिंसा - फोटो : ANI
विवाद शुरु कैसे हुआ?
 पांकी के राहेवीर पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाई जाती है। इसकी तैयारी के तहत मंगलवार शाम कुछ लोग बांस-बल्ली और कपड़ा लेकर स्थानीय चौक पर पहुंच गए। चौक के सामने ही एक अन्य धर्मस्थल भी है। चौक पर तोरणद्वार बनाने पहुंचे लोगों को वहां मौजूद दूसरे समुदाय के लोगों ने कहा कि यहां हमारा धर्मस्थल है इसलिए तोरणद्वार यहां नहीं बनाएं। इसके बाद बिना तोरणद्वार बनाए ही वो लोग वापस लौट गए। बुधवार सुबह फिर से उसी जगह तोरणद्वार बनाने को लेकर विवाद शुरू हो गया। 

 बात इतनी बढ़ी की सुबह साढ़े आठ बजे तक दोनों पक्षों से पत्थरबाजी शुरू हो गई । इसी दौरान कुछ उपद्रवियों ने आसपास की कुछ दुकानों को आग लगा दी गई। पलामू के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) राज कुमार लाकड़ा के मुताबिक, उपद्रवियों ने पत्थरबाजी, आगजनी की घटना की और दो-तीन घर आशिंक रूप से जलाया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंची। इस दौरान झड़प में दो पुलिस वाहनों को क्षतिग्रस्त किया गया। इस घटना में पुलिस के 4-5 जवान घायल हो गए हैं और एसडीओपी भी घायल हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, पूरी घटना में कोई भी हताहत नहीं हुआ है।

प्रशासन ने क्या कदम उठाया?
हिंसा की स्थिति देखते हुए पलामू पुलिस ने पूरे कस्बे में धारा 144 लागू कर दी। पुलिस ने सरकार से इंटरनेट बंद करने का अनुरोध किया जिसके बाद राज्य के गृह विभाग ने आदेश भी दिया। टेलीकॉम कंपनियों को 16 फरवरी की शाम चार बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखने को कहा गया है। 

उपद्रवियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
पलामू के आईजी राजकुमार लकड़ा ने बताया, हम स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस दिशा में हमारी  दोनों पक्षों से बातचीत हुई है जो सकारात्मक रही है। मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई हैं और कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 30-40 लोगों को नामजद किया गया है। उन्होंने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। वहीं पलामू के डीसी अंजनेयुलू डोड्डे ने बताया कि कुछ दिन तक धारा 144 लागू रहेगी और दो दिन तक इंटरनेट सेवा भी बंद रहेगी। 

ओवैसी
ओवैसी - फोटो : PTI
मामले में क्या राजनीति हो रही है?
पलामू हिंसा को लेकर अब सियासी बयानबाजी भी शुरू हो चुकी है। एआईएआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हिंसा के लिए सीधे तौर पर आरएसएस दोषी है। पलामू हिंसा को साजिश के तहत अंजाम दिया गया है। साथ ही कहा कि हेमंत सरकार भी इस हिंसा के लिए समान रूप से दोषी है समय रहते सरकार और प्रशासन ने एक्शन नहीं लिया जिसकी वजह से वहां हालात बिगड़े। 

उधर भाजपा ने भी सोरेन सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया, 'पांकी में शिवरात्रि का तोरण द्वार लगाने से रोकने और हिंदुओं व पुलिसवालों को निशाना बनाकर हमला किया गया है। कई पुलिसवाले घायल हैं।
पूरा क्षेत्र अशांत है। अब क्या हिंदुओं को त्योहार मनाने और अपनी परंपराओं को निभाने के लिए भी अदालत की शरण में जाना पड़ेगा? मुख्यमंत्री जी जहर की खेती करने वालों को पोषण देना बंद करिए।'

वहीं, पांकी विधानसभा से भाजपा विधायक डॉक्टर शशिभूषण मेहता ने कहा कि यह अप्रिय घटना है। जिससे किसी भी समुदाय की भलाई नहीं है। यहां के लोग शांतिप्रिय हैं कुछ लोगों के द्वारा माहौल को खराब करने का प्रयास किया गया है।
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