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पाकिस्तान: संसद की अवमानना के लिए 6 महीने तक की जेल, 10 लाख का जुर्माना; नेशनल असेंबली ने पारित किया विधेयक

Tue, 16 May 2023 11:00 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 16 May 2023 11:00 PM IST
सार

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया जिसमें संसद का अपमान के दोषी लोगों के लिए छह महीने तक की कैद या 10 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों की सिफारिश की गई है।

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Paks NA passes bill recommending up to 6 months jail, Rs 1 m fine for contempt of parliament
पाकिस्तान नेशनल असेंबली (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : एएनआई

विस्तार

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया जिसमें संसद का अपमान के दोषी लोगों के लिए छह महीने तक की कैद या 10 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों की सिफारिश की गई है। 'मजलिस-ए-शूरा (संसद) की अवमानना विधेयक' प्रक्रिया और विशेषाधिकार नियमों पर स्थायी समिति के अध्यक्ष राणा मुहम्मद कैम नून ने पेश किया।

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इसमें प्रावधान है कि नेशनल असेंबली के स्पीकर या सीनेट के अध्यक्ष ऐसे मामलों को एक विशेष अवमानना समिति को यह निर्धारित करने के लिए भेज सकते हैं कि क्या किसी व्यक्ति पर अवमानना का आरोप लगाया जाना चाहिए। अधिनियम के लागू होने के 30 दिनों के भीतर अध्यक्ष संसद के दो सदनों से समान प्रतिनिधित्व के साथ चौबीस सदस्यों से मिलकर एक अवमानना समिति की स्थापना करेगा।
 

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चौदह सदस्यों को सदन के नेता द्वारा नामित किया जाएगा, जबकि 10 सदस्यों को विपक्ष के नेता द्वारा नामित किया जाएगा। नेशनल असेंबली सचिवालय के सचिव अवमानना समिति के सचिव के रूप में कार्य करेंगे, और निर्णय बहुमत से किए जाएंगे। समिति की सिफारिशों पर, एक सदन के पास अधिनियम के तहत निर्धारित दंड लगाने की शक्ति होगी।
 

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अवमानना के दोषी व्यक्तियों को छह महीने तक के साधारण कारावास, दस लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। निर्णयों का निष्पादन और प्रवर्तन एक न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाएगा, और सदन के फैसले के तीस दिनों के भीतर अपील दायर की जा सकती है।  विधेयक का उद्देश्य मजलिस-ए-शूरा (संसद) के प्रतिष्ठित सदन की संप्रभुता और अखंडता के उल्लंघन के लिए किसी भी रूप में निंदा करना और सजा देना है।
 

शिक्षा मंत्री राणा तनवीर हुसैन ने विधेयक की सराहना करते हुए कहा कि यह संसद की निगरानी भूमिका को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, इस विधेयक को देश के संसदीय इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है और यह सभी संस्थानों की जननी के रूप में संसद की सर्वोच्चता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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