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पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी भाई-बहनों ने मांगा शिक्षा का अधिकार, हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका

Tue, 01 Oct 2019 08:24 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला
अमित शर्मा, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 01 Oct 2019 08:24 PM IST
सार

  • उम्र ज्यादा होने के आधार पर स्कूल ने दाखिला देने से किया इंकार
  • 16-18 वर्ष की दो बहनों और उनके भाई ने नौवीं कक्षा में मांगा था दाखिला
  • मुख्यमंत्री से की थी दाखिला कराने की अपील
  • शिक्षा के अधिकार के तहत हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका

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Pakistani hindu refugee children approached delhi high court to restore right to education
Pakistani hindu refugee - फोटो : AmarUjala

विस्तार

दक्षिणी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में दाखिला लेने के लिए तीन पाकिस्तानी भाई-बहनों ने हाईकोर्ट से मदद मांगी है। तीनों बच्चों ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अपील की है कि वह उनका शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित कराए, क्योंकि स्कूल ने कथित रुप से उन्हें ज्यादा उम्र का बताकर दाखिला देने से इनकार कर दिया है। याचिका शिक्षा और समानता के अधिकार मामले के तहत दाखिल की गई है। बच्चों के इस मामले पर कोर्ट की छुट्टियों के बाद नौ अक्टूबर को सुनवाई हो सकती है।

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इसी साल आए थे भारत

दरअसल, इस मामले में तीन पाकिस्तानी भाई-बहन संजिनी बाई (16 वर्ष), रवि कुमार (17 वर्ष) और मूना कुमारी (18 वर्ष) इसी साल मई 2019 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान से भारत आ गए थे। यहां आने के बाद तीनों ही बच्चों ने जुलाई माह में दिल्ली के शिक्षा विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। दोनों बहनों के पास पाकिस्तान के एक स्कूल से आठवीं तक शिक्षा प्राप्त करने, जबकि रवि के पास दसवीं की कक्षा का इम्तिहान देने के सर्टिफिकेट मौजूद हैं। 

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'पहले दी इजाजत, फिर कक्षा में बैठने से रोका'

इसके बाद उन्होंने छतरपुर के एक स्कूल में दाखिले के लिए प्रयास किया था। बच्चों की स्थिति देखते हुए स्कूल ने उन्हें कक्षाओं में बैठने की इजाजत दे दी थी। आरोप है कि बीते 14 सितंबर को स्कूल ने उन्हें कक्षाओं में बैठने से यह कहकर रोक दिया कि उनकी उम्र नवीं कक्षा में पढ़ने के लिहाज से बहुत ज्यादा है। तभी से बच्चे अपनी शिक्षा के लिए भटक रहे हैं।

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उम्र को आधार नहीं बना सकता स्कूल

पाकिस्तानी बच्चों के वकील अशोक अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि शिक्षा बच्चों का मूल अधिकार है। उन्हें इससे किसी भी आधार पर वंचित नहीं रखा जा सकता। बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित रखना आर्टिकल-21 का उल्लंघन है, जो उन्हें शिक्षा का अधिकार देता है। इसके अलावा उम्र के आधार पर बच्चों में फर्क करना उनके समानता के अधिकार आर्टिकल-14 का भी उल्लंघन है। उन्होंने इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट से इस मामले में दखल देने की अपील की है।

मुख्यमंत्री से की थी अपील

दरअसल, तीनों बच्चों ने कोर्ट जाने से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम एक पत्र लिखकर उनसे अपील की थी कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और उनका दाखिला सुनिश्चित कराएं। लेकिन बच्चों के मुताबिक अब तक मुख्यमंत्री की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है, जिसके बाद उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी है।

 
इसके पूर्व, सितंबर 2016 में इसी प्रकार एक अन्य पाकिस्तानी बच्ची मधु का मामला भी सामने आया था। उस मामले में मधु के पास पाकिस्तान में पढ़ाई करने के प्रमाण पत्र नहीं थे। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की दखल के बाद अरविंद केजरीवाल ने मधु के मामले का संज्ञान लिया था और उसका दाखिला सुनिश्चित कराया था। 

 

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