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पाकिस्तानी जेट विमान को मार गिराने वाले वायुसेना के अधिकारी ने कहा- यह दुर्भाग्यपूर्ण था
Mon, 12 Aug 2019 04:43 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 12 Aug 2019 04:43 PM IST
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बीस साल पहले - 10 अगस्त, 1999 को - भारतीय वायुसेना ने गुजरात में नालिया के ऊपर एक घुसपैठिया पाकिस्तानी समुद्री निगरानी जेट विमान को मार गिराया था। यह 1999 के कारगिल युद्ध के बाद की बात है, जब दोनों देशों की सेनाएं सतर्क थी, और उपमहाद्वीप के प्रतिद्वंद्वियों के बीच संबंधों की गर्माहट खत्म हो गई थी।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रुप कैप्टन संजीव नारायणेन (सेवानिवृत्त) ने, फ्रांस में बनी ब्रेगेट बीआर1150 अटलांटिक विमान के गिरने को याद करते हुए कहा, "हमें उम्मीद नहीं थी कि वह तुरंत नीचे गिर जाएगा।"
इस नौसैनिक विमान को मार गिराने से पांच अधिकारियों और 11 नाविकों की जान चली गई थी। साल 1971 में बांग्लादेश को मुक्त करने के युद्ध के बाद सिर्फ एक दिन में पाकिस्तानी नौसेना को होने वाला यह सबसे बड़ा नुकसान था। जिसके बाद परमाणु अस्त्र से संपन्न उप महाद्वीप के प्रतिद्वंद्वियों के बीच तनाव बढ़ गया। नारायणन ने कहा, "हमें यह उम्मीद नहीं थी कि विमान में इतने सारे लोग मौजूद होंगे। यह दुर्भाग्यपूर्ण था।" उन्होंने कहा, "जब मीडिया ने उनके अंतिम संस्कार की खबर दी, तब मुझे उनके बारे में पता चला था।"
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उस दिन के लड़ाकू विमान नियंत्रक, 254 एसयू कंट्रोल और रिपोर्टिंग केंद्र के कमांडर, ग्रुप कैप्टन विजय सुमन शर्मा, उस दिन को याद कर बताते हैं, "अगले दिन एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस नालिया के भारतीय वायुसेना एयरबेस का दौरा करने वाले थे, इसको लेकर तैयारियां चल रही थी, कि तभी दो मिग-21 विमानों को अचानक उतारा गया। "मुझे पता था कि कुछ गड़बड़ हुई है।"
उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी विमान के बारे में सुबह 10.52 बजे पता चला। लड़ाकू विमानों को नियंत्रित करने वाले नियंत्रक के पास सिर्फ तीन महीने का अनुभव था। मैंने नियंत्रण को संभाल लिया। लड़ाकू विमानों ने तुरंत उड़ान भरी और 11.01 बजे तक पाकिस्तान के विमान की ओर जा रहे थे।" पहले विमान में विंग कमांडर पीके बुंदेला और दूसरे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट संजीव नारायणन सवार थे। उनके कॉल संकेत "बांडी" और "नानू" थे।
ग्रुप कैप्टन शर्मा ने कहा, "पाकिस्तान विमान हमारे क्षेत्र के अंदर आक्रामक हथियार ला रहा था। मैंने भारतीय विमानों को उनसे जूझने की अनुमति दी।" विंग कमांडर पीके बुंदेला ने 11.17 बजे हमले का आदेश मांगा। उन्हें हमले का आदेश मिला। 11.18 में उन्होंने रेडियो में कहा, "मिसाइल दाग दिया गया, पाकिस्तानी जेट के बाएं इंजन में आग लग गई, जिससे वह टूट गया।"
नारायणन ने कहा, "मुझे नहीं पता कि अटलांटिक विमान का भारत में आने का इरादा है या नहीं। पाकिस्तान के रडार नियंत्रकों को विमान को चेतावनी देनी चाहिए थी।"
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हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रुप कैप्टन संजीव नारायणेन (सेवानिवृत्त) ने, फ्रांस में बनी ब्रेगेट बीआर1150 अटलांटिक विमान के गिरने को याद करते हुए कहा, "हमें उम्मीद नहीं थी कि वह तुरंत नीचे गिर जाएगा।"
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इस नौसैनिक विमान को मार गिराने से पांच अधिकारियों और 11 नाविकों की जान चली गई थी। साल 1971 में बांग्लादेश को मुक्त करने के युद्ध के बाद सिर्फ एक दिन में पाकिस्तानी नौसेना को होने वाला यह सबसे बड़ा नुकसान था। जिसके बाद परमाणु अस्त्र से संपन्न उप महाद्वीप के प्रतिद्वंद्वियों के बीच तनाव बढ़ गया। नारायणन ने कहा, "हमें यह उम्मीद नहीं थी कि विमान में इतने सारे लोग मौजूद होंगे। यह दुर्भाग्यपूर्ण था।" उन्होंने कहा, "जब मीडिया ने उनके अंतिम संस्कार की खबर दी, तब मुझे उनके बारे में पता चला था।"
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उस दिन के लड़ाकू विमान नियंत्रक, 254 एसयू कंट्रोल और रिपोर्टिंग केंद्र के कमांडर, ग्रुप कैप्टन विजय सुमन शर्मा, उस दिन को याद कर बताते हैं, "अगले दिन एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस नालिया के भारतीय वायुसेना एयरबेस का दौरा करने वाले थे, इसको लेकर तैयारियां चल रही थी, कि तभी दो मिग-21 विमानों को अचानक उतारा गया। "मुझे पता था कि कुछ गड़बड़ हुई है।"
उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी विमान के बारे में सुबह 10.52 बजे पता चला। लड़ाकू विमानों को नियंत्रित करने वाले नियंत्रक के पास सिर्फ तीन महीने का अनुभव था। मैंने नियंत्रण को संभाल लिया। लड़ाकू विमानों ने तुरंत उड़ान भरी और 11.01 बजे तक पाकिस्तान के विमान की ओर जा रहे थे।" पहले विमान में विंग कमांडर पीके बुंदेला और दूसरे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट संजीव नारायणन सवार थे। उनके कॉल संकेत "बांडी" और "नानू" थे।
ग्रुप कैप्टन शर्मा ने कहा, "पाकिस्तान विमान हमारे क्षेत्र के अंदर आक्रामक हथियार ला रहा था। मैंने भारतीय विमानों को उनसे जूझने की अनुमति दी।" विंग कमांडर पीके बुंदेला ने 11.17 बजे हमले का आदेश मांगा। उन्हें हमले का आदेश मिला। 11.18 में उन्होंने रेडियो में कहा, "मिसाइल दाग दिया गया, पाकिस्तानी जेट के बाएं इंजन में आग लग गई, जिससे वह टूट गया।"
नारायणन ने कहा, "मुझे नहीं पता कि अटलांटिक विमान का भारत में आने का इरादा है या नहीं। पाकिस्तान के रडार नियंत्रकों को विमान को चेतावनी देनी चाहिए थी।"