'तालिबान खान' का धोखा: ‘लादेन’ व 'मुजाहिद भाई' को खत्म कराने वालों ने अब ‘अल-कायदा’ को साथ ले ‘पंजशीर’ ढहा दिया
रक्षा विशेषज्ञ संजय कुलकर्णी ने मीडिया को बताया, पाकिस्तान सोचता है कि उसके इशारे पर तालिबानी सरकार चलेगी, ऐसा कुछ नहीं है। अभी वह हालात का फायदा उठा रहा है। जब 9/11 हुआ तो पाकिस्तान, अमेरिका का सहयोगी बन जाता है। बीस साल पहले जब बहुत कम देश तालिबान को मान्यता देने के लिए राजी थे, तो उस वक्त पाकिस्तान ही सबसे आगे खड़ा था...
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तालिबान का कब्जा होने के बाद अफगानिस्तान में अभी सरकार का गठन तक नहीं हुआ है, लेकिन पाकिस्तान अपनी नई भूमिका में आने के लिए बेचैन है। इतना ही नहीं, अभी तो ‘तालिबान खान’ के धोखे का खेल देखना बाकी है। तेल की धार देखनी होगी। अंतिम जश्न कौन मनाएगा, ये बड़ी बात है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) का कहना है, इसमें कोई दो राय नहीं है कि पाकिस्तान, आतंकवाद के हक में है। इमरान खान को 'तालिबान खान' का नाम बहुत सोच-समझकर दिया गया है। जिस पाकिस्तान ने 2011 में अमेरिका को खुफिया सूचना लीक कर अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को खत्म करा दिया, उसी ने कथित तौर पर 2019 में लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन (मुजाहिद भाई) को मरवा दिया। अब देखिये, वही पाकिस्तान, आज तालिबान और अल-कायदा के साथ मिल गया। तालिबान खान की सेना ने अफगानिस्तान में आतंकी समूहों के साथ मिलकर ‘पंजशीर’ का क़िला ढहा दिया।
तालिबान खान, अंदर कुछ, बाहर कुछ…
बता दें कि 2019 में पाकिस्तानी पीएम इमरान खान जब अमेरिका गए थे, तो उन्होंने एक साक्षात्कार दिया था। उन्होंने कहा, लादेन कहां छिपा है, वह सूचना तो पाकिस्तान ने ही अमेरिका को दी थी। इसके बाद जून 2020 में पाकिस्तान की संसद में इमरान खान ने ओसामा बिन लादेन को शहीद कह दिया था। इस बात पर पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने ‘तालिबान खान’ की कड़ी निंदा की थी। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई। उसके बाद लादेन के मामले में इमरान खान बोले, अमेरिका उस वक्त जबरदस्ती हमारे घर में घुसा था। उसने हमारे एक आदमी को मार गिराया। ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता कहते हैं, इमरान खान की बात में सच्चाई कम, दिखावा ज्यादा होता है। अमेरिका में जाकर कहते हैं, हमने ओसामा बिन लादेन की सूचना दी थी। इमरान खान पाकिस्तान में आकर कहते हैं, लादेन तो यहां पर है ही नहीं। हकीकत यही है कि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान पूरी तरह से आतंकवाद में लिप्त हैं।
अफगानिस्तान में पड़ोसी ने एकत्र किए थे आतंकी
अफगानिस्तान में पाकिस्तान ने अपनी सकारात्मक जिम्मेदारी नहीं निभाई। उसने वहां की सरकार को आतंकी संगठनों के साथ मिलकर खत्म करा दिया। पड़ोसी के खिलाफ यूएनओ की कार्रवाई बनती थी, लेकिन चीन के दबाव में वह कदम नहीं उठाया जा सका। बतौर गुप्ता, पाकिस्तान ने ही आईएसआईएस, हक्कानी और अलकायदा जैसे कई आतंकी संगठनों को एकत्रित किया था। अब पंजशीर में भी पाकिस्तान ने वही कर दिखाया। वहां खड़े टैंक व हम्वी चलाने के लिए ड्राइवर भेजे गए। हेलीकॉप्टर के लिए पाकिस्तानी पायलटों को अफगानिस्तान में भेजा गया। पंजशीर में पाकिस्तानी आर्मी के कई बड़े अफसर मौजूद रहे हैं। आईएसआई चीफ वहां पर हैं। उन्हें वहां जाने का हुकूम किसने दिया। क्या वे, तालिबान खान से बिना पूछे वहां चले गए।
‘पंजशीर’ को पाकिस्तान के हवाले कर दिया गया
पूर्व राजनयिक विष्णु प्रकाश कहते हैं, पंजशीर में बराबर की लड़ाई नहीं थी। दुनिया ने पंजशीर का साथ छोड़ कर उसे पाकिस्तान के हवाले कर दिया। ‘पंजशीर घाटी’ के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। पाकिस्तान यह सोचकर खुश है कि अब उसकी पश्चिमी सीमा सुरक्षित हो गई है, ये भविष्य में गलत साबित हो सकता है। तालिबान का असली चेहरा अभी सामने नहीं आया है। धोखे वाले खेल अभी बाकी हैं। जैसे ही तालिबान मजबूत होगा, वह पाकिस्तान के इशारे पर नहीं चलेगा। आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हमीद की मुल्ला बरादर से मुलाकात हुई है। वह किसी देश का पहले विदेशी उच्च पदस्थ अधिकारी है, जो अफगानिस्तान पहुंचा है। इससे पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में दस हजार आतंकी भेजे थे। पंजशीर पर कब्जा होने के बाद अधिकांश आतंकी वापस आ गए हैं। उनमें लश्कर और जैश के ज्यादातर आतंकी हैं। उन्हें आईएसआई तैयार करती रही है। उन्होंने पाकिस्तान में पहुंचकर बाइक रैली निकाली है। पीओके में तालिबान का झंडा लहराया गया।
पाकिस्तान के इशारे पर चलेगी तालिबानी सरकार!
रक्षा विशेषज्ञ संजय कुलकर्णी ने मीडिया को बताया, पाकिस्तान सोचता है कि उसके इशारे पर तालिबानी सरकार चलेगी, ऐसा कुछ नहीं है। अभी वह हालात का फायदा उठा रहा है। जब 9/11 हुआ तो पाकिस्तान, अमेरिका का सहयोगी बन जाता है। बीस साल पहले जब बहुत कम देश तालिबान को मान्यता देने के लिए राजी थे, तो उस वक्त पाकिस्तान ही सबसे आगे खड़ा था। आज तालिबान के कब्जे के बाद इमरान खान कहते हैं कि तालिबान ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ डाली हैं। मेजर जन. सुधाकर (रिटायर्ड) के अनुसार, पंजशीर में पाकिस्तानी संसाधन मौजूद हैं। इनके इनपुट बाहर आ चुके हैं। हालांकि तस्वीर या वीडियो आदि जैसे ठोस सबूत अभी नहीं मिले हैं। अगर तालिबान को पाकिस्तान की मदद नहीं मिलती तो पंजशीर पर कब्जा करना बहुत मुश्किल था। ये भी तो संभावना है कि कल तालिबान, पाकिस्तान में घुस जाए। पाकिस्तान की धोखे वाली नीति कब बैक फायर कर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।