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Pakistan: फिर नापाक साजिश रच रहा पाकिस्तान; हमास, लश्कर-ए-ताइबा व जैश को एक साथ लाने में जुटा
Thu, 08 Jan 2026 06:24 AM IST
नितिन गौतम
आशुतोष भाटिया
आशुतोष भाटिया
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 08 Jan 2026 06:24 AM IST
सार
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई एक खतरनाक साजिश रच रही है। इसके तहत आईएसआई हमास और लश्कर ए ताइबा जैसे संगठनों को एक साथ लाने में जुटी है। इसका मकसद कश्मीर मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण करना है।
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पाकिस्तान और दहशतगर्दों का चोली-दामन का साथ... (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
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विस्तार
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई फलस्तीनी संगठन हमास को लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद के साथ लाने में जुट गई है। खुफिया सूत्रों के अनुसार हाल ही में हमास के कई प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लश्कर और जैश के कार्यक्रमों में शिरकत की है। आईएसआई की पूरी कवायद कश्मीर मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण करना है।
हमास के नेताओं का पाकिस्तान दौरा
उल्लेखनीय है कि हाल ही में गुजरांवाला में हमास का वरिष्ठ कमांडर नाजी जहीर लश्कर-ए-ताइबा आतंकी राशिद अली संधू के साथ एक मंच पर नजर आया। यह कार्यक्रम लश्कर के राजनीतिक मुखौटे पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) ने आयोजित किया था। पिछले साल 5 फरवरी को पाकिस्तान की ओर से आयोजित कश्मीर सॉलिडैरिटी डे पर आईएसआई ने पीओके के रावलकोट में एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम को भी हमास के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉक्टर खालिद अल कदूमी ने संबोधित किया। इस मंच पर जैश और लश्कर से जुड़े आतंकी मौजूद थे। हमास और कश्मीरी उग्रवादी झंडों के साथ बाइक और घुड़सवारी करते हुए रैलियों में भी दिखाई दिए थे। र
फलस्तीन की तरह कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की साजिश
रक्षा सूत्रों ने बताया कि अप्रैल 2025 में हमास के एक प्रतिनिधिमंडल ने जैश के गढ़ बहावलपुर की यात्रा भी की थी। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई कश्मीर और फलस्तीन को साझा संघर्ष के तौर पर पेश करना चाहती है। पिछले दिनों पाकिस्तान में फलस्तीनी के समर्थन में जनभावनाएं बढ़ी हैं। आईएसआई ने इस मौके का फायदा उठाकर कश्मीर मुद्दे को फलस्तीनी संघर्ष की तर्ज पर पेश करने की साजिश रची है। कश्मीर और फलस्तीन को साझा मंच बताकर पेश करने से कश्मीर मसले का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने में भी मदद मिलेगी।
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पहलगाम में हमास की तर्ज पर हमला
लश्कर-ए-ताइबा ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमला करवाया। सुरक्षा विशेषज्ञों कहा कि इस हमले की प्रकृति, लक्ष्य और समय के चयन में हमास जैसे हमलों की छवि नजर आती है। हालांकि इस में हमास की प्रत्यक्ष भूमिका का प्रमाण सामने नहीं आया, लेकिन वैचारिक समानताएं जरूर दिखीं। अमेरिका की गाजा शांति योजना के तहत भेजी जाने वाली सेना में शामिल होने के लिए पाकिस्तान ने यह शर्त रखी है कि उसके सैनिक हमास पर हमला नहीं करेंगे। हमास और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के बीच बढ़ती नजदीकियां दक्षिण व पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।
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हमास के नेताओं का पाकिस्तान दौरा
उल्लेखनीय है कि हाल ही में गुजरांवाला में हमास का वरिष्ठ कमांडर नाजी जहीर लश्कर-ए-ताइबा आतंकी राशिद अली संधू के साथ एक मंच पर नजर आया। यह कार्यक्रम लश्कर के राजनीतिक मुखौटे पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) ने आयोजित किया था। पिछले साल 5 फरवरी को पाकिस्तान की ओर से आयोजित कश्मीर सॉलिडैरिटी डे पर आईएसआई ने पीओके के रावलकोट में एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम को भी हमास के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉक्टर खालिद अल कदूमी ने संबोधित किया। इस मंच पर जैश और लश्कर से जुड़े आतंकी मौजूद थे। हमास और कश्मीरी उग्रवादी झंडों के साथ बाइक और घुड़सवारी करते हुए रैलियों में भी दिखाई दिए थे। र
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फलस्तीन की तरह कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की साजिश
रक्षा सूत्रों ने बताया कि अप्रैल 2025 में हमास के एक प्रतिनिधिमंडल ने जैश के गढ़ बहावलपुर की यात्रा भी की थी। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई कश्मीर और फलस्तीन को साझा संघर्ष के तौर पर पेश करना चाहती है। पिछले दिनों पाकिस्तान में फलस्तीनी के समर्थन में जनभावनाएं बढ़ी हैं। आईएसआई ने इस मौके का फायदा उठाकर कश्मीर मुद्दे को फलस्तीनी संघर्ष की तर्ज पर पेश करने की साजिश रची है। कश्मीर और फलस्तीन को साझा मंच बताकर पेश करने से कश्मीर मसले का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने में भी मदद मिलेगी।
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पहलगाम में हमास की तर्ज पर हमला
लश्कर-ए-ताइबा ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमला करवाया। सुरक्षा विशेषज्ञों कहा कि इस हमले की प्रकृति, लक्ष्य और समय के चयन में हमास जैसे हमलों की छवि नजर आती है। हालांकि इस में हमास की प्रत्यक्ष भूमिका का प्रमाण सामने नहीं आया, लेकिन वैचारिक समानताएं जरूर दिखीं। अमेरिका की गाजा शांति योजना के तहत भेजी जाने वाली सेना में शामिल होने के लिए पाकिस्तान ने यह शर्त रखी है कि उसके सैनिक हमास पर हमला नहीं करेंगे। हमास और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के बीच बढ़ती नजदीकियां दक्षिण व पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।
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