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भारत के चौतरफा दबाव से पाक ने टेके घुटने, चीन से कहा- मसूद को अब मत बचाओ
Thu, 28 Mar 2019 09:01 AM IST
Prabudhh Jain
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prabudhh Jain
Updated Thu, 28 Mar 2019 09:01 AM IST
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इमरान खान- शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
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पाकिस्तान ने अपने सदाबहार साथी चीन से कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकियों की सूची में मसूद अजहर को शामिल करने के लिए लगाए गए तकनीकी पेंच (वीटो) को हटा ले। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनायिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इससे सीमा पर चल रही तनातनी को कम करने में राहत मिलेगी और भारत-पाक की बातचीत के रास्ते भी खुलेंगे।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने भी मसूद अजहर मामले में तकनीकी रूप से रोक लगाने के लिए चीन से कारण बताने को कहा है। जिसके बाद वह इस मामले में अन्य विकल्पों पर विचार करेगा।
फरवरी में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की बस पर हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी मसूद अजहर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।
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न्यूयार्क में रह रहे अमेरिकी और भारतीय राजनायिकों के अनुसार, चीन ने अमेरिकी अधिकारियों को पाकिस्तान की प्राथमिकता से अवगत कराया था, लेकिन उसकी दलीलों से ट्रंप प्रशासन प्रभावित नहीं हुआ। अमेरिका ने चीन से कहा कि मसूद अजहर के यूएन वैश्विक आतंकी सूची में शामिल होना भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय बातचीत से किसी भी रूप में जुड़ा हुआ नहीं है।
यूएन में मसूद अजहर को बैन करने को लेकर चीन द्वारा चौथी बार प्रयोग किए गए वीटो के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तीन प्रमुख सदस्य देशों ने दो सप्ताह में विशिष्ट कारणों की मांग की है। इस सप्ताह यह समय सीमा समाप्त हो रही है।
मसूद अजहर को लेकर इस्लामाबाद की सोच में बदलाव देखा जा रहा है। पाकिस्तानी सैन्य प्रशासन ने 27 फरवरी को भारत को बताया था कि इस्लामाबाद खुद चीन से अजहर के वैश्विक आतंकी सूची में शामिल होने पर लगी रोक को हटाने के लिए आग्रह करेगा। हालांकि सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि मसूद अजहर या जैश पाकिस्तान में न तो मौजूद हैं न ही सक्रिय।
मसूद अजहर का पंजाब के भवालपुर में रेलवे लिंक रोड पर मरकज़ उस्मान-ओ-अली मदरसा में मुख्यालय है। वह वर्तमान में कई बीमारियों से पीड़ित है। उसका आतंकी समूह जैश ए मोहम्मद पाकिस्तान के मरकज़ सुभानल्लाह, कराची रोड, भवालपुर से काम करता है। इसी कैंपस में अजहर के पिता अल्लाह बक्श साबिर अल्वी की कब्र है।
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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने भी मसूद अजहर मामले में तकनीकी रूप से रोक लगाने के लिए चीन से कारण बताने को कहा है। जिसके बाद वह इस मामले में अन्य विकल्पों पर विचार करेगा।
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फरवरी में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की बस पर हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी मसूद अजहर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।
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न्यूयार्क में रह रहे अमेरिकी और भारतीय राजनायिकों के अनुसार, चीन ने अमेरिकी अधिकारियों को पाकिस्तान की प्राथमिकता से अवगत कराया था, लेकिन उसकी दलीलों से ट्रंप प्रशासन प्रभावित नहीं हुआ। अमेरिका ने चीन से कहा कि मसूद अजहर के यूएन वैश्विक आतंकी सूची में शामिल होना भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय बातचीत से किसी भी रूप में जुड़ा हुआ नहीं है।
यूएन में मसूद अजहर को बैन करने को लेकर चीन द्वारा चौथी बार प्रयोग किए गए वीटो के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तीन प्रमुख सदस्य देशों ने दो सप्ताह में विशिष्ट कारणों की मांग की है। इस सप्ताह यह समय सीमा समाप्त हो रही है।
मसूद अजहर को लेकर इस्लामाबाद की सोच में बदलाव देखा जा रहा है। पाकिस्तानी सैन्य प्रशासन ने 27 फरवरी को भारत को बताया था कि इस्लामाबाद खुद चीन से अजहर के वैश्विक आतंकी सूची में शामिल होने पर लगी रोक को हटाने के लिए आग्रह करेगा। हालांकि सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि मसूद अजहर या जैश पाकिस्तान में न तो मौजूद हैं न ही सक्रिय।
मसूद अजहर का पंजाब के भवालपुर में रेलवे लिंक रोड पर मरकज़ उस्मान-ओ-अली मदरसा में मुख्यालय है। वह वर्तमान में कई बीमारियों से पीड़ित है। उसका आतंकी समूह जैश ए मोहम्मद पाकिस्तान के मरकज़ सुभानल्लाह, कराची रोड, भवालपुर से काम करता है। इसी कैंपस में अजहर के पिता अल्लाह बक्श साबिर अल्वी की कब्र है।