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पाक संसद में हिंदू मैरिज एक्ट पास, जानें बिल की अहम बातें

Mon, 20 Mar 2017 09:35 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 20 Mar 2017 09:35 AM IST
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Pakistan Senate passes Hindu marriage bill
पाकिस्तान की संसद (फाइल)
पाकिस्तान की संसद ने बहुप्रतिक्षित अल्पसंख्यक हिंदू विवाह अधिनियम विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इस विधेयक के आने के बाद वहां हिंदुओं की शादियों को पंजीकृत किया जा सकेगा। इस विधेयक में के नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने कैद की सज़ा का प्रावधान है।
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बताते चलें कि पाकिस्तान में अब तक हिंदुओं की शादी पंजीकृत नहीं की जाती थी। इससे वहां रह रहे हिंदु समुदाय के लोग खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करते थे।  यह बिल निचले सदन में 26 सितंबर 2016 में ही पारित कर लिया गया था। अब इसे सिर्फ राष्ट्रपति के साइन की जरूरत है, जोकि सिर्फ एक फॉर्मेलिटी है।
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डॉन न्यूज के मुताबिक, यह बिल पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं को स्वीकार्य है। इसके अंतर्गत शादी, शादी के रजिस्ट्रेशन, तलाक और दोबारा शादी की कानूनी मान्यता है। इसके साथ ही इस नियम में कहा गया है कि शादी के लिए हिंदू जोड़े की न्यूयनतम उम्र 18 साल होनी चाहिए।
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सजा के भी हैं प्रावधान

Pakistan Senate passes Hindu marriage bill
पाकिस्तान की संसद (फाइल)
विधेयक में कहा गया है कि पति-पत्नी एक साल से अधिक समय से अलग-अलग रह रहे हैं और भविष्य में भी साथ नहीं रहना चाहते हैं तो वे चाहें तो अपनी शादी को रद्द करा सकते हैं। वहीं, हिंदू विधवा को भी पति की मौत के छह महीने के बाद फिर से शादी करने का अधिकार है। वहीं, हिंदू व्यक्ति पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी करता है तो यह दंडनीय अपराध माना जाएगा।

यह बिल पाकिस्तान में हिन्दुओं के लिए पहला पर्सनल ला होगा। यह पाकिस्तान के पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लागू होगा। बताते चलें कि सिंध प्रांत में हिंदू विवाह कानून पहले ही बन चुका है।

इस बिल से पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं के जबरन धर्मांतरण पर रोक लगेगी। इस कानून का उल्लंघन करने वाले को छह महीने की सजा मिलेगी। खास बात है कि इस कानून में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई है। 
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