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अग्निवीरों पर पाकिस्तानी 'आईएसआई' की बुरी नजर: सीमावर्ती क्षेत्रों में 'स्लीपर सेल' एक्टिव, एजेंसियां सतर्क

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 13 Oct 2026 09:29 PM IST
सार

अग्निपथ योजना के पहले बैच के अग्निवीरों की चार साल की सेवा पूरी होने के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की कथित गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अग्निवीरों को सोशल मीडिया, नौकरी के प्रस्ताव, पैसों और हनी ट्रैप के जरिए निशाना बनाने की आशंका है।

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Pakistan s ISI eyes on ex-Agniveers Sleeper cells active in border areas agencies on alert honey trap
सोशल मीडिया और हनी ट्रैप के इस्तेमाल की आशंका - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय सेना में 'अग्निपथ' योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने के बाद वापस अपने घर लौट रहे 75 फीसदी 'अग्निवीरों' पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' की बुरी नजर है। आईएसआई का प्रयास है कि 'अग्निवीरों' को अपनी कुटिल चालों के जरिए गुमराह कर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल किया जाए।
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केंद्रीय एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि पड़ोसी मुल्क की खुफिया एजेंसी 'सोशल मीडिया' की मदद से अग्निवीरों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में आईएसआई ने सेना से बाहर आने वाले अग्निवीरों तक पहुंचने के लिए अपने स्लीपर सेल एक्टिव किए हैं। आईएसआई ने पूर्व अग्निवीरों को गुमराह करने के लिए उन्हें जॉब का लालच और पेमेंट आधारित टॉस्क देने की योजना बनाई है। इस मामले में हनी ट्रैप की मदद भी ली जाएगी। 
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अक्तूबर-नवंबर में सेना से बाहर आएंगे अग्निवीर
2022 में लागू हुई अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को चार साल के लिए थल सेना, नौसेना और वायुसेना में बतौर अग्निवीर भर्ती किया गया था। योजना के तहत कुल भर्ती अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को ही तय मानकों एवं सेवा के दौरान उनका प्रदर्शन, इस आधार पर नियमित सेवा में रखा जाएगा। बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीर सेवा से बाहर हो जाएंगे।
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अग्निपथ योजना के पहले बैच के ऐसे अग्निवीर, जो नियमित सेवा में नहीं रहेंगे, वे अक्तूबर और नवंबर में सेना से बाहर आ रहे हैं। पाकिस्तान की नापाक नजर इन्हीं 75 प्रतिशत अग्निवीरों पर है, जो अब सेना का हिस्सा नहीं रहेंगे। 

पाकिस्तान रच रहा क्या साजिश?
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी आईएसआई अपने स्लीपर सेल के जरिए विशेषकर उन राज्यों के अग्निवीरों को टारगेट कर रही है, जिनकी सीमा अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से लगती है। इनमें गुजरात, पंजाब, राजस्थान, यूपी, बिहार, असम, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और पश्चिम बंगाल आदि राज्य शामिल हैं। स्लीपर सेल के जरिए पूर्व अग्निवीरों को कई तरह का लालच दिया जा सकता है।

चूंकि अग्निवीर, भारतीय सेना के बेसिक सिस्टम से वाकिफ हैं और वे कई तरह के 'इंटरनल कम्युनिकेशन' ग्रुपों से जुड़े हुए हैं, ऐसे में उनसे खुफिया जानकारी लीक कराना, आईएसआई का सबसे बड़ा मकसद है।दूसरा, आईएसआई इस फिराक में है कि अग्निवीर, उनके किसी समूह को हथियार और दूसरे उपकरणों के संचालन की ट्रेनिंग दें। इसके लिए उन्हें खासतौर पर जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर में भेजा जा सकता है। 

आईएसआई के नापाक इरादे जगजाहिर
जब 'अग्निपथ' योजना लागू की गई थी, तब भी 'पाकिस्तान' इसे पटरी से उतारना चाहता था। पाकिस्तानी 'आईएसआई' ने नेपाल के युवाओं को भारत के प्रति भड़काने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। यहां तक कि पाकिस्तान ने नेपाल के उन युवाओं को अपनी सेना में भर्ती करने के लिए कई तरह का लोभ लाचल दिया था, जिनकी पहली पसंद भारतीय सेना रही है। इसके लिए काठमांडू स्थित पाकिस्तानी दूतावास में आईएसआई ऑपरेटिव मोहम्मद रक्साना नूर्ति ने एक गुप्त बैठक भी की थी। इसमें नेपाली सेना और भारतीय सेना से रिटायर होने के बाद नेपाल में बसे पूर्व अफसरों के शामिल होने का दावा किया गया था। हालांकि भारतीय एजेंसियों ने पाकिस्तान के इस नापाक इरादे को पूरा नहीं होने दिया। 

अग्निवीरों को लेकर गंभीरता से काम कर रहा केंद्र
केंद्र सरकार ने अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं असम राइफल्स में सिपाही 'सामान्य ड्यूटी' और राइफलमैन की भर्ती में आरक्षण का प्रावधान किया है। उन्हें उम्र में छूट और भर्ती नियमों में कुछ रियायतें दी गई हैं। इसके अलावा दूसरे विभागों में भी अग्निवीरों को उनकी योग्यता के हिसाब से सरकारी नौकरी मिलेगी।

पंजाब सरकार ने भी पूर्व अग्निवीरों की नौकरी के लिए पॉलिसी बनाई है। पश्चिम बंगाल सरकार ने अग्निवीरों के लिए 'आपदा मोचन बल' अर्जुन वाहिनी का गठन करने की बात कही है। इसके अलावा अग्निशमन, आपात सेवा, वन विभाग और पुलिस भर्ती में भी अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। 

इन राज्य सरकारों ने भी किया है विशेष प्रावधान 
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अग्निवीरों के लिए पुलिस, वन, कारागार और परिवहन सहित दूसरे सरकारी विभागों में 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की घोषणा की है। उत्तराखंड में ग्रुप सी की सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। सरकार ने इनकी मदद के लिए विशेष सेल बनाने की बात कही है। हरियाणा और गुजरात में भी पुलिस एवं दूसरी भर्तियों में भी अग्निवीरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की है। पूर्व अग्निवीरों को हरियाणा सरकार की ग्रुप-सी की नौकरी के लिए लिखित परीक्षा नहीं देनी होगी।


निर्धारित आरक्षण और अन्य भर्ती प्रावधानों के तहत विज्ञापित पदों के विरुद्ध सीधी नियुक्ति के लिए अग्निवीरों के नाम पर विचार किया जाएगा। पर्यावरण, वन और वन्यजीव विभाग में वाइल्डलाइफ गार्ड, इंडियन रिजर्व बटालियन में सिपाही, एसडीआरएफ में कांस्टेबल तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर के पदों पर पूर्व-अग्निवीरों को शारीरिक जांच परीक्षा और शारीरिक माप परीक्षा से छूट मिलेगी।
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