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प्रवासी कश्मीरियों के चंदे के भरोसे PoK: पीओके के नेताओं ने वाशिंगटन में की बैठक, खुलकर मांगी मदद

yogesh Narayan Dikshit योगेश नारायण दीक्षित
Updated Sun, 18 Sep 2022 07:28 PM IST
सार

विदेशों में बैठकर कश्मीर को समस्या बताने वाले बुजुर्ग अलगाववादियों को प्रवासी कश्मीरी युवा ज्यादा भाव नहीं दे रहे हैं। ज्यादातर युवा अब अमेरिका के नागरिक हैं और वहां की जीवनशैली अपना चुके हैं। इसके अलावा युवा कश्मीर के नाम पर बने संगठनों के पाकिस्तानी गुणगान को नहीं सुनना चाह रहे हैं।

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Pakistan Occupied Kashmir leaders meet in Washington and sought help
पीओके में विरोध-प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI

विस्तार

एक ओर नरेंद्र मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारी में है, तो दूसरी ओर आर्थिक रूप से कंगाल हो चुकी पाकिस्तान की सरकार अमेरिका और यूरोप में अपने लिए लॉबिस्ट तक नहीं जुटा पा रही है। ऐसे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नेता और कारोबारी अमेरिका के अलग-अलग शहरों में बैठकें कर पीओके के लोगों के लिए प्रवासियों से खुलकर चंदा और दूसरी मदद मांग रहे हैं। बैठकों में कश्मीर की बात कम, पाकिस्तान की ज्यादा हो रही है। नतीजा है कि इन बैठकों में भारत से अमेरिका गए कश्मीरी युवा कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

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पिछले महीने के अंतिम सप्ताह में वाशिंगटन डीसी में पाकिस्तान बिजनेस फोरम, पीओके की ओर से कश्मीर के नाम पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें एनआरआई कश्मीरियों को आमंत्रित किया गया, लेकिन भारत सरकार का लगातार विरोध करने वाले गुलाम नबी फई जैसे एक-दो अलगाववादियों के अलावा ज्यादा कश्मीरी युवा पहुंचे ही नहीं। दूसरी ओर, इसमें पीओके के लगभग सारे बड़े नाम जुटे, भले ही उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता अलग-अलग हो। सभी नेता पीओके के नागरिकों के त्याग और बलिदान का हवाला देकर उनकी मदद के लिए तर्क देते रहे।
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कश्मीरी युवाओं के सामने पीओके के कारोबारियों का गुणगान
पिछले दिनों कश्मीर पर हुई एक परिचर्चा में पीओके के बड़े कारोबारी और नेता सरदार जुल्फिकार खान, सरदार जारिफ खान, सरदार जुबैर खान और चर्चित इरफान तसैदुक खान मौजूद रहे। वक्ताओं ने प्रवासी कश्मीरियों के सामने पीओके के इन नामों को रोल मॉडल की तरह रखने की कोशिश की। इसके बाद कश्मीरी युवाओं ने सवाल उठा दिया कि जम्मू-कश्मीर के अंदर आपके साथ है कौन। सभी राजनीतिक दल तो विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। इसके बाद बैठक में गुलाब नबी फई ने हुर्रियत के नेता रहे सैयद अली गिलानी के न रहने और यासीन मलिक को सजा मिलने का जिक्र करते हुए एक तरह से मजबूरी गिनानी शुरू कर दी। हर बार लिए जाने वाले पांच नाम के बाद वह कोई नया चेहरा और नया मुद्दा नहीं बता सके।
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पाकिस्तान की तारीफ नहीं सुनना चाहते प्रवासी कश्मीरी
विदेशों में बैठकर कश्मीर को समस्या बताने वाले बुजुर्ग अलगाववादियों को प्रवासी कश्मीरी युवा ज्यादा भाव नहीं दे रहे हैं। ज्यादातर युवा अब अमेरिका के नागरिक हैं और वहां की जीवनशैली अपना चुके हैं। इसके अलावा युवा कश्मीर के नाम पर बने संगठनों के पाकिस्तानी गुणगान को नहीं सुनना चाह रहे हैं। इसका उदाहरण, अमेरिका में ही हुए एक ईद मिलन समारोह के दौरान देखने को मिला था। दरअसल, वहां ईद मिलन के नाम पर कश्मीरी परिवारों को बुलाया गया था। कई परिवार छोटे बच्चों को लेकर भी पहुंचे। शुरुआती मिलन के बाद जैसे ही पीओके से संबंधित नेताओं ने भारत के विरोध में भाषण देना शुरू किया, कई परिवार तुरंत बच्चों को लेकर आयोजन स्थल से बाहर निकल गए। कुछ युवाओं ने जम्मू-कश्मीर अवेयरनेस फोरम जैसे संगठनों को खरी-खोटी सुनाई।

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