पठानकोट आतंकी हमलाः मसूद अजहर से पूछताछ की इजाजत दे सकता है पाक
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पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि पठानकोट आतंकी हमले की जांच के सिलसिले में नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसके भाई राउफ से पूछताछ का मौका दिया जाएगा।
बुधवार को पाक संयुक्त जांच दल (जेआईटी) और एनआईए के बीच सबूतों के आदान प्रदान और जांच की बारीकियों पर हुई बातचीत में यह बात सामने आई है। एनआईए ने दोनों आतंकी भाइयों की आवाज के नमूने मांगे हैं।
एनआईए प्रमुख शरद कुमार ने बताया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर आगे की नीति तैयार कर रहे हैं। जेआईटी के साथ दो दिन और बातचीत होगी। जेआईटी ने इस बात के सबूत दिए हैं कि पाकिस्तान ने जैश के कुछ लोगों को गिरफ्तार कर रखा है।
जेआईटी और एनआईए के बीच हुई लंबी बैठक में भारतीय पक्ष की तरफ से 300 सवालों की सूची सौंपी गई है। एनआईए ने मसूद अजहर और राउफ के साथ हमले में मारे गए आतंकी नसीर की मां खय्याम बाबर की आवाज का भी नमूना मांगा है।
बताया जा रहा है कि नसीर ने हमले के दौरान अपनी मां से बात की थी। दूसरी ओर जेआईटी बृहस्पतिवार से गवाहों के बयान दर्ज करेगी। इस क्रम में पंजाब पुलिस के एसपी सलविंदर सिंह से भी सवाल-जवाब किया जाएगा। शरद कुमार ने बताया कि इस बारे में व्यवस्था कर दी गई है और जेआईटी अगले दो दिनों तक बयान ले सकती है। पाक टीम को दो अप्रैल को लौटना है।
उम्मीद है पाक भी करेगा हर इंतजाम : एनआईए आईजी
पाक जांच टीम से बातचीत कर रही एनआईए टीम के प्रमुख आईजी एसके सिंह ने बताया कि जेआईटी के साथ पूरी कवायद एक दूसरे की जरूरत को पूरा करने की शर्त पर ही की जा रही है। उनके मुताबिक जेआईटी की मांग पर एनआईए ने हर इंतजाम किया है।
व्यवहारिक स्तर पर यही उम्मीद है कि अब पाकिस्तान भी इस जांच के संबंध में भारत की जरूरत के अनुसार व्यवस्था करेगा। सिंह ने बताया कि पाकिस्तान ने अपनी जांच के संबंध में अहम और उत्साहवर्धक जानकारी साझा की है। हालांकि उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
संयुक्त जांच का खेल बिगाड़ने में लगा है पाकिस्तान का एक तबका
नई दिल्ली। पाकिस्तानी के एक तबके को दोनों देशों के बीच पठानकोट आतंकी हमले की जांच में चल रहा सहयोग रास नहीं आ रहा है। पाकिस्तान में रॉ एजेंट के नाम पर भारतीय व्यवसायी की गिरफ्तारी और भारत में पाक जेआईटी की मौजूदगी में उसकी कथित पूछताछ के टेप जारी करना इसी का परिणाम है।
उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि पाक सेना और कट्टरपंथियों का बड़ा तबका इस सहयोग के पक्ष में नहीं है। चूंकि यह कवायद दोनों देशों के प्रधानमंत्री के स्तर पर हुए फैसले के आधार पर हो रही है, इसलिए कोई हथकंडा नहीं आजमाया जा रहा।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय व्यवसायी के रॉ एजेंट होने के कोई सुराग नहीं मिल रहे हैं। फिर भी पाकिस्तान में एक तबका गलत कहानी बताकर अविश्वास की नई दीवार खड़ी करना चाह रहा है।
उधर गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा है कि पाकिस्तान के इस हथकंडे का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पडे़गा। रिजिजू ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के विरोध पर कहा कि यह देश की सुरक्षा का मामला है। इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।