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आसिम मुनीर का नया पैंतरा: दिखावे के लिए बलूच लड़ाकों और तालिबान के खात्मे की खाई कसम, जैश-लश्कर पर सिले होंठ
Wed, 23 Sep 2026 06:54 PM IST
देवेश त्रिपाठी
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Wed, 23 Sep 2026 06:54 PM IST
सार
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने पेशावर में आतंकवाद को खत्म करने की बात कही है। उनका बयान बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बलूच लड़ाकों और टीटीपी की गतिविधियों के बीच आया है। भारतीय अधिकारियों और आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि मुनीर का रुख लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के प्रति अलग है।
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आसिम मुनीर के आतंकवाद विरोधी दावे पर सवाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पेशावर में कोर मुख्यालय के दौरे के दौरान आतंकवाद को खत्म करने की कसम खाई है। वहीं, भारतीय खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को कथित तौर पर आधिकारिक संरक्षण दिया जा रहा है।
मुनीर की आतंकवाद के खिलाफ टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी खतरे बढ़ रहे हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) लगातार अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। इनके अभियानों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ है।
लश्कर-जैश की चोरी-छिपे मदद में जुटी पाकिस्तानी सेना
अधिकारियों ने कहा कि मुनीर का संदर्भ टीटीपी और बीएलए तक सीमित था और इसमें पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय कई अन्य आतंकी संगठनों का जिक्र नहीं किया गया। एक अधिकारी ने कहा कि एक तरफ मुनीर आतंकवाद को हराने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपने शीर्ष अधिकारियों को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ढांचे को फिर से खड़ा करने की निगरानी करने का निर्देश दिया है। दोनों संगठनों को वैश्विक स्तर पर आतंकी संगठन घोषित किया गया है।
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अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर ने सेना के शीर्ष अधिकारियों, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकी संगठनों के साथ कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में लश्कर, जैश और हिजबुल मुजाहिदीन के ढांचे को फिर से खड़ा करने पर व्यापक चर्चा हुई। दावा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने इन संगठनों के ढांचे को निशाना बनाया था।
मुनीर ने जैश-लश्कर के नाम पर क्यों साधी चुप्पी?
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि जब मुनीर आतंकवाद की बात करते हैं तो वह लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद का नाम तक नहीं लेते। अधिकारी ने कहा, "इसके बजाय उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां एक वैध संघर्ष का हिस्सा हैं। यह अपने आप में स्पष्ट रूप से दिखाता है कि लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों को सैन्य और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर व्यवस्था का खुला समर्थन हासिल है।"
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मुनीर ने इन आतंकी संगठनों को वैध ठहराने के लिए हर संभव प्रयास किया है। अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने इन आतंकी संगठनों के जरिए खुद को नायक के रूप में पेश किए जाने पर जोर दिया है। एक हालिया बैठक में उन्होंने कथित तौर पर इन संगठनों से उनके समर्थन में एकजुट होने को भी कहा।
लश्कर के कमांडर कर रहे मुनीर की तारीफ
अधिकारी ने कहा, "लाहौर में मुनीर और लश्कर के वरिष्ठ कमांडरों की तस्वीरों वाले पोस्टर और साइन बोर्ड सामने आए हैं। तल्हा सईद और सारी याकूब शेख समेत लश्कर के वरिष्ठ सदस्यों ने भी खुले तौर पर असीम मुनीर की प्रशंसा की है।"
पाकिस्तान पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर मुनीर के दावे जमीन पर सामने आ रहे घटनाक्रम से मेल खाते नजर नहीं आते। उनका कहना है कि बलूचिस्तान में जारी संघर्ष से निपटने के लिए वह ज्यादा प्रभावी तरीका अपना सकते थे।
बलूच लड़ाकों को बलूचिस्तान में मिलता है व्यापक समर्थन
बलूचिस्तान के लोगों ने बीएलए को व्यापक समर्थन दिया है। उसके समर्थकों का कहना है कि संगठन की ओर से उठाई जा रही मांगें जायज हैं। इनमें बुनियादी सुविधाओं और क्षेत्र में ज्यादा विकास की मांग शामिल है। इसके अलावा बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा वहां के लोगों के कल्याण पर खर्च किए जाने की मांग भी शामिल है।
पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी इन मूल मुद्दों को संबोधित करने के इच्छुक नहीं रहे हैं। वहीं, मुनीर ने और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बलूचिस्तान, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और खैबर पख्तूनख्वा में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मुनीर के ऐसे निर्देशों ने इन तीनों क्षेत्रों में स्थिति को और गंभीर किया है।
क्या तालिबान और बलूच लड़ाकों से लड़ेंगे लश्कर और आईएसकेपी के आतंकी?
आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञों ने आतंकवाद पर मुनीर के बयानों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उनके दृष्टिकोण में विरोधाभास होने की बात कही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मुनीर ने टीटीपी और बीएलए के खिलाफ अभियानों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत यानी आईएसकेपी और लश्कर को शामिल करने का प्रस्ताव दिया था।
आईएसकेपी अपने गठन के समय पाकिस्तान का घोषित दुश्मन था। इसके अलावा आईएसकेपी अफगान तालिबान के मुकाबले कमजोर रहा है और मुनीर के इसे अभियानों में शामिल करने से पहले इसे काफी हद तक पर्दे के पीछे रखा गया था।
आईएसकेपी को मुनीर से मिला पूरा समर्थन
विशेषज्ञों ने कहा, "आज आईएसकेपी खुद को ज्यादा मजबूत महसूस कर रहा है क्योंकि उसे पाकिस्तानी सेना प्रमुख का पूरा समर्थन हासिल है। इस्लामिक स्टेट एक प्रतिबंधित संगठन है और अगर यह मजबूत होता है तो क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।"
असीम मुनीर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद पर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की कोशिशें तेज करने और आतंकी हमले करने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में इन संगठनों के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया है। दावा है कि वहां करीब 1,000 आतंकियों को ठहराने वाले लॉन्चपैड कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की सुविधा देने के लिए तैयार हैं।
मुनीर का दोहरा चेहरा फिर बेनकाब
मुनीर की ये कार्रवाइयां आतंकवाद खत्म करने को लेकर उनके बार-बार दिए गए बयानों से मेल नहीं खाती दिखाई देती हैं। उनका तत्काल ध्यान बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा पर है, जहां उन्हें टीटीपी और बीएलए की ओर से बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एक अधिकारी ने कहा कि यह बयान हताशा से प्रेरित दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में मुनीर का मुख्य ध्यान जम्मू-कश्मीर पर बना हुआ है और उनसे लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद को बड़े हमलों को अंजाम देने के प्रयासों में समर्थन जारी रखने की उम्मीद है।
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मुनीर की आतंकवाद के खिलाफ टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी खतरे बढ़ रहे हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) लगातार अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। इनके अभियानों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ है।
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लश्कर-जैश की चोरी-छिपे मदद में जुटी पाकिस्तानी सेना
अधिकारियों ने कहा कि मुनीर का संदर्भ टीटीपी और बीएलए तक सीमित था और इसमें पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय कई अन्य आतंकी संगठनों का जिक्र नहीं किया गया। एक अधिकारी ने कहा कि एक तरफ मुनीर आतंकवाद को हराने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपने शीर्ष अधिकारियों को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ढांचे को फिर से खड़ा करने की निगरानी करने का निर्देश दिया है। दोनों संगठनों को वैश्विक स्तर पर आतंकी संगठन घोषित किया गया है।
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अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर ने सेना के शीर्ष अधिकारियों, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकी संगठनों के साथ कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में लश्कर, जैश और हिजबुल मुजाहिदीन के ढांचे को फिर से खड़ा करने पर व्यापक चर्चा हुई। दावा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने इन संगठनों के ढांचे को निशाना बनाया था।
मुनीर ने जैश-लश्कर के नाम पर क्यों साधी चुप्पी?
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि जब मुनीर आतंकवाद की बात करते हैं तो वह लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद का नाम तक नहीं लेते। अधिकारी ने कहा, "इसके बजाय उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां एक वैध संघर्ष का हिस्सा हैं। यह अपने आप में स्पष्ट रूप से दिखाता है कि लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों को सैन्य और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर व्यवस्था का खुला समर्थन हासिल है।"
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मुनीर ने इन आतंकी संगठनों को वैध ठहराने के लिए हर संभव प्रयास किया है। अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने इन आतंकी संगठनों के जरिए खुद को नायक के रूप में पेश किए जाने पर जोर दिया है। एक हालिया बैठक में उन्होंने कथित तौर पर इन संगठनों से उनके समर्थन में एकजुट होने को भी कहा।
लश्कर के कमांडर कर रहे मुनीर की तारीफ
अधिकारी ने कहा, "लाहौर में मुनीर और लश्कर के वरिष्ठ कमांडरों की तस्वीरों वाले पोस्टर और साइन बोर्ड सामने आए हैं। तल्हा सईद और सारी याकूब शेख समेत लश्कर के वरिष्ठ सदस्यों ने भी खुले तौर पर असीम मुनीर की प्रशंसा की है।"
पाकिस्तान पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर मुनीर के दावे जमीन पर सामने आ रहे घटनाक्रम से मेल खाते नजर नहीं आते। उनका कहना है कि बलूचिस्तान में जारी संघर्ष से निपटने के लिए वह ज्यादा प्रभावी तरीका अपना सकते थे।
बलूच लड़ाकों को बलूचिस्तान में मिलता है व्यापक समर्थन
बलूचिस्तान के लोगों ने बीएलए को व्यापक समर्थन दिया है। उसके समर्थकों का कहना है कि संगठन की ओर से उठाई जा रही मांगें जायज हैं। इनमें बुनियादी सुविधाओं और क्षेत्र में ज्यादा विकास की मांग शामिल है। इसके अलावा बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा वहां के लोगों के कल्याण पर खर्च किए जाने की मांग भी शामिल है।
पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी इन मूल मुद्दों को संबोधित करने के इच्छुक नहीं रहे हैं। वहीं, मुनीर ने और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बलूचिस्तान, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और खैबर पख्तूनख्वा में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मुनीर के ऐसे निर्देशों ने इन तीनों क्षेत्रों में स्थिति को और गंभीर किया है।
क्या तालिबान और बलूच लड़ाकों से लड़ेंगे लश्कर और आईएसकेपी के आतंकी?
आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञों ने आतंकवाद पर मुनीर के बयानों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उनके दृष्टिकोण में विरोधाभास होने की बात कही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मुनीर ने टीटीपी और बीएलए के खिलाफ अभियानों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत यानी आईएसकेपी और लश्कर को शामिल करने का प्रस्ताव दिया था।
आईएसकेपी अपने गठन के समय पाकिस्तान का घोषित दुश्मन था। इसके अलावा आईएसकेपी अफगान तालिबान के मुकाबले कमजोर रहा है और मुनीर के इसे अभियानों में शामिल करने से पहले इसे काफी हद तक पर्दे के पीछे रखा गया था।
आईएसकेपी को मुनीर से मिला पूरा समर्थन
विशेषज्ञों ने कहा, "आज आईएसकेपी खुद को ज्यादा मजबूत महसूस कर रहा है क्योंकि उसे पाकिस्तानी सेना प्रमुख का पूरा समर्थन हासिल है। इस्लामिक स्टेट एक प्रतिबंधित संगठन है और अगर यह मजबूत होता है तो क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।"
असीम मुनीर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद पर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की कोशिशें तेज करने और आतंकी हमले करने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में इन संगठनों के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया है। दावा है कि वहां करीब 1,000 आतंकियों को ठहराने वाले लॉन्चपैड कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की सुविधा देने के लिए तैयार हैं।
मुनीर का दोहरा चेहरा फिर बेनकाब
मुनीर की ये कार्रवाइयां आतंकवाद खत्म करने को लेकर उनके बार-बार दिए गए बयानों से मेल नहीं खाती दिखाई देती हैं। उनका तत्काल ध्यान बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा पर है, जहां उन्हें टीटीपी और बीएलए की ओर से बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एक अधिकारी ने कहा कि यह बयान हताशा से प्रेरित दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में मुनीर का मुख्य ध्यान जम्मू-कश्मीर पर बना हुआ है और उनसे लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद को बड़े हमलों को अंजाम देने के प्रयासों में समर्थन जारी रखने की उम्मीद है।