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Padma Awards: 'यह पुरस्कार मेरे देश का गौरव है', पद्मश्री सम्मान मिलने पर बोले शंकर बाबा पापलकर

Sat, 27 Jan 2024 03:15 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती Published by: गुलाम अहमद Updated Sat, 27 Jan 2024 03:15 AM IST
सार

सामाजिक कार्यकर्ता शंकर बाबा पापलकर देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार दिए जाने की घोषणा से काफी खुश हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा जाहिर की है।

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Padma Awards Amravati Padma Shri awardee Shankar Baba Papalkar want to meet PM Modi Know about him in Hindi
Shankar Baba Papalkar - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शंकर बाबा पापलकर को इस साल भारत सरकार की तरफ से पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पापलकर देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार दिए जाने की घोषणा से काफी खुश हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने बताया, 'जब मुझे प्रधानमंत्री आवास से फोन आया कि मुझे पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा तो मैंने अनुरोध किया कि मैं पीएम मोदी से मिलना चाहता हूं।'

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उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार मेरे देश का गौरव है... मैं इसे अवश्य स्वीकार करूंगा। 81 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता शंकर बाबा ने कहा, मैं यह पुरस्कार दिव्यांग बच्चों को समर्पित करता हूं। जब मुझे यह पुरस्कार मिलेगा तो मैं कुछ बच्चों को अपने साथ ले जाने की भी कोशिश करूंगा। शंकर बाबा लंबे समय से 18 साल से अधिक उम्र के दिव्यांग, मानसिक रूप से विक्षिप्त और अनाथ बच्चों के पुनर्वास के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह पीएम मोदी से मिलने की कोशिश करेंगे और उनसे इस कानून को बनाने का अनुरोध करेंगे।
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शंकर बाबा पापलकर की गिनती विदर्भ के बड़े समाजसेवियों में होती है। अमरावती में उन्हें अनाथों के पिता के रूप में जाना जाता है। पापलकर 100 से ज्यादा अनाथ बच्चों की पिता की तरह देखरेख कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमरावती के वज्झार में स्थित उनके आश्रम में 123 दिव्यांग और बेसहारा बच्चे रहते हैं। इसी समाजसेवा को सराहते हुए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई। शंकर बाबा पिछले 25 वर्षों से निस्वार्थ भाव से बेसहारा और दिव्यांग बच्चों की सेवा कर रहे हैं। वह अब तक 30 लड़के-लड़कियों की शादी कर उनका घर बसा चुके हैं, जो अनाथ थे।
 
मलखंब के लिए काम कर रहे लोगों की उपलब्धि...
महाराष्ट्र के नासिक जिले के रहने वाले उदय विश्वनाथ देशपांडे को खेल के क्षेत्र में पद्मश्री पुरस्कार दिया गया है, जो पारंपरिक खेल मलखंब को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। मीडिया से बात करते हुए देशपांडे ने कहा कि पद्मश्री पुरस्कार उन सभी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है, जो मलखंब के क्षेत्र में वर्षों से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की वजह से मलखंब को खेलो इंडिया गेम्म में जगह मिली। आज राष्ट्रीय विजेताओं को 1.2 लाख रुपये की वार्षिक छात्रवृत्ति मिल रही है। मलखंब के प्रशिक्षण के लिए बढ़िया उपकरणों के साथ 100 से अधिक केंद्र स्थापित किए गए हैं और प्रशिक्षकों की नियुक्ति की गई है।

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