चिदंबरम बोले- जनरल रावत सेना संभालें, हमें न बताएं कि क्या करना है
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर जहां देशभर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं विपक्ष भी भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। नागरिकता कानून को लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने तिरुवनंतपुरम में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत और भाजपा पर निशाना साधा।
चिदंबरम ने कहा, अमित शाह को राज्यसभा और लोकसभा में हुए बहस को फिर से सुनना चाहिए, उन्होंने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया और अब वह इस पर बहस के लिए राहुल गांधी को चुनौती दे रहे हैं। इस कानून के बारे में सरकार द्वारा जो कुछ भी बताया जा रहा है, सब कुछ गलत है।
चिदंबरम ने कहा, 'डीजीपी और आर्मी जनरल को सरकार का समर्थन करने के लिए कहा जा रहा है, यह शर्म की बात है। हम जनरल रावत से अपील करते हैं, आप सेना के प्रमुख हैं, आप अपने पद की गरिमा का ध्यान रखें। यह सेना का काम नहीं है कि हम राजनेताओं को बताएं कि हमें क्या करना चाहिए, क्योंकि यह हमारा काम नहीं है कि हम आपको बताएं कि युद्ध कैसे लड़ा जाए।'
#WATCH P Chidambaram: DGP&Army General are being asked to support govt, it's a shame. Let me appeal to Genaral Rawat,you head the Army&mind your business. It's not business of Army to tell politicians what we should do, just as it's not our business to tell you how to fight a war pic.twitter.com/MgjkeSPBPn
— ANI (@ANI) December 28, 2019
बता दें कि सेना प्रमुख बिपिन रावत ने गुरुवार को कहा था कि नेता जनता के बीच से उभरते हैं, अगर कोई नेता आगजनी और हिंसा भड़काने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेज के छात्रों व जनता को उकसाता है तो वह नेतृत्व नहीं कर सकता। नेता वही है जो जनता को सही दिशा में लेकर जाए।
जनरल बिपिन रावत ने कैंपस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन का नेतृत्व करने पर नाराजगी जाहिर की थी। रावत ने विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। उनके इस बयान पर अब राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम के हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सेनाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया था। दिग्विजय ने जहां सांप्रदायिक आधार पर हिंसा को लेकर सवाल पूछा तो वहीं ओवैसी ने उन्हें अपने कार्यक्षेत्र तक सीमित रहने की सलाह दी।
दिग्विजय ने सेनाध्यक्ष से पूछा था सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सेनाध्यक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए उनसे सवाल पूछा था। उन्होंने कहा था, 'नेता वे नहीं है जो लोगों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। सेनाध्यक्ष ने नागरिकता प्रदर्शन को लेकर यह कहा। मैं जनरल साहेब की बात से इत्तेफाक रखता हूं लेकिन नेता वे भी नहीं होते जो अपने अनुयायियों को सांप्रदायिक आधार पर नरसंहार के लिए भड़काएं। क्या आप मेरी बात से सहमत हैं जनरल साहब?'ओवैसी ने जनरल रावत को दी थी नसीहत
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोनाध्यक्ष को नसीहत दी थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, 'अपने कार्यालय के प्रभाव क्षेत्र को भी समझ लेना नेतृत्व है। यह (नेतृत्व) नागरिक की सर्वोच्चता को समझने के बारे में और जिस संस्था के प्रमुख आप हैं उसकी गरिमा को ठीक तरह से जानना भी है।' समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा था, 'उनका यह बयान मोदी सरकार को निर्बल करता है। हमारे प्रधानमंत्री ने अपनी वेबसाइट पर लिखा कि एक छात्र के तौर पर आपातकाल के दौरान उन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। तो सेनाध्यक्ष के बयान के अनुसार यह भी गलत है।'यूपीए ने विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत बनाए थे डिटेंशन कैंप: चिदंबरम
पी चिदंबरम से पत्रकारों ने जब पूछा कि यूपीए के समय के डिटेंशन कैंप आज के डिटेंशन कैंप से कैसे अलग हैं, इस पर चिदंबरम ने कहा, हमारे समय में डिटेंशन कैंप विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत बनाए गए थे न कि नागरिकता संशोधन कानून या एनआरसी के संदर्भ में बनाए गए थे। विदेशी नागरिक अधिनियम के हिसाब से अगर कोई व्यक्ति अवैध विदेशी के तौर पर चिह्नित होता है तो उसे डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है। एक जनहित याचिका पर गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम को डिटेंशन सेंटर बनाने का निर्देश दिया था। इसके लिए केंद्र सरकार ने फंड दिया था।#WATCH: Congress P Chidambaram when asked,"how does the Congress see the detention camps as different from those that you (Congress) directed to set up?", says,"Detention camps were set under the Foreigners Act not in the context of Citizenship Amendment Act or NRC." pic.twitter.com/L9pinyn9d6
— ANI (@ANI) December 28, 2019