'प्राणवायु' का संकट: नई नहीं है ऑक्सीजन की किल्लत, सरकार को पहले ही चेताया था, लेकिन नहीं सुधरी व्यवस्था
- पिछले साल बैठक में ही एक्सपर्ट कमेटी ने कहा था ऑक्सीजन की मांग बढ़ेगी, व्यवस्थाएं सुधार लें।
- वर्षों से अस्पतालों में बना रहता है ऑक्सीजन का संकट, कई स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में उठ चुका है मुद्दा
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सरकार को पता था कि आने वाले वक्त में ऑक्सीजन का संकट गहराने वाला है। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने न तो कोई व्यवस्था की और न ही पर्याप्त इंतजाम किए गए। ऐसी लापरवाही का नतीजा सबके सामने है। ऑक्सीजन की कमी के चलते रोजाना मरीजों की घर, सड़क और अस्पताल परिसरों के बाहर मौतें हो रही हैं। ऐसा नहीं है कि ऑक्सीजन की कमी की समस्या पहली बार सामने आ रही है। बीते कई सालों से अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट हमेशा से रहा है। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस की सरकारों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने कई बैठकें की, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। फिलहाल देश में ऑक्सीजन की कमी को लेकर पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह पड़ोसी देश नेपाल से ऑक्सीजन की मदद ले सकते हैं। इसके लिए पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स भी मदद करने को तैयार है।
देश में इस वक्त जो ऑक्सीजन का संकट बना हुआ है, इसकी आशंका पिछले साल ही एक्सपर्ट कमिटी की बैठक में जाहिर हो गई थी। इस बैठक में देश के तमाम जिम्मेदार अधिकारियों के अलावा सामाजिक और वाणिज्यिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने बताया था कि जिस तरीके से कोरोना वायरस अपना स्वरूप बदल रहा है वह आने वाले वक्त में बदले स्वरूप के चलते ऑक्सीजन के संकट के तौर पर देखा जा सकता है।
विशेषज्ञ कमेटी के अनुसार देश में अस्पतालों को दी जाने वाली सप्लाई आने वाले वक्त के हिसाब से पर्याप्त नहीं थी, इसकी जानकारी भी जिम्मेदार अधिकारियों को बैठक में दे दी गई थी। अधिकारियों को मिली इस जानकारी के बाद दोनों ने व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के निर्देश तो जारी किए लेकिन उन पर व्यावहारिक रूप से अमल नहीं हो पाया। नतीजा आज के दौर में मरीजों को मौत से जूझना पड़ रहा है।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के सीनियर एडवाइजर मुकेश बहादुर कहते हैं फिलहाल यह वक्त एक साथ मिलकर लोगों की जान बचाने का है। जो खामियां हैं उन्हें दुरुस्त करने का है। वे कहते हैं ऐसा नहीं है कि यह समस्याएं पहली बार सामने आई हैं। मुकेश बहादुर का कहना है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को बंद पड़ी ऑक्सीजन यूनिट्स को शुरू कर आना चाहिए। इसके अलावा अपने पड़ोसी मुल्क नेपाल से भी मदद लेनी चाहिए।
मुकेश के मुताबिक नेपाल में अभी भी ऑक्सीजन का भंडार पर्याप्त मात्रा में है। अगर हम नेपाल से ऑक्सीजन आयात करते हैं तो देश के कई हिस्सों में ऑक्सीजन की किल्लत दूर हो सकती है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इसके लिए केंद्र सरकार को एक मसौदा भी तैयार करके भेजा है कि अगर जरूरत पड़ी तो पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स भी अपने नेटवर्क के माध्यम से ऑक्सीजन की आपूर्ति करवा सकता है। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार की रजामंदी जरूरी है।
दिल्ली आईएमए के सदस्य और एम्स में पल्मोनरी विभाग के रिटायर्ड प्रोफ़ेसर जीएम सिंह कहते हैं कि देश के अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट नया नहीं है। बीते कई सालों से सरकारी अस्पतालों में तो ऑक्सीजन का संकट बना ही रहता था। मरीजों को वक्त पर ऑक्सीजन ना मिलने से उनकी जान तक जाती रही है। उन्होंने कहा सरकार चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की, किसी ने भी इस समस्या की ओर कभी कोई ध्यान नहीं दिया। डॉक्टर सिंह कहते हैं कि समस्या को पूर्व सरकारों के स्वास्थ्य मंत्रियों के सामने भी रखा गया, बावजूद इसके अस्पतालों में होने वाली ऑक्सीजन की सप्लाई के बारे में कोई खास ध्यान नहीं दिया गया।