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Asaduddin Owaisi: संघ का यह पुराना ढर्रा, ऐसे ही झाड़ लेता है पल्ला...,मोहन भागवत के बयान पर ओवैसी ने खड़े किए सवाल

Sat, 04 Jun 2022 12:47 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 04 Jun 2022 12:47 PM IST
सार

संघ प्रमुख भागवत ने बीते दिनों कहा था कि कुछ धर्मस्थलों पर हिंदुओं का दावा हो सकता है, लेकिन हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों ढूंढना चाहिए? 

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Owaisi told RSS chiefs statement on Shivling as old tactic, sought clarification from PM
असदुद्दीन ओवैसी, नेता AIMIM - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की महत्वपूर्ण टिप्पणी को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने संघ का पुराना ढर्रा बताया है। ओवैसी ने इस पर तमाम सवाल खड़े करते हुए 17 बिंदुओं का बयान जारी किया है। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग की है। 

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संघ प्रमुख भागवत ने बीते दिनों कहा था कि कुछ धर्मस्थलों पर हिंदुओं का दावा हो सकता है, लेकिन हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों ढूंढना चाहिए? उन्होंने यह भी कहा था कि विवादों का हल दोनों पक्षों को मिलजुलकर निकालना चाहिए अन्यथा कोर्ट का फैसला मानना चाहिए। 
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ओवैसी ने संघ प्रमुख के बयान पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और मोहन भागवत की बजाए पीएम मोदी को स्पष्ट बयान देना चाहिए। एआईएमआईएम नेता ने कहा कि यदि पीएम मोदी भागवत के बयान का समर्थन करते हैं तो उन्हें सभी हिंदुत्ववादी शीर्ष नेताओं को रोकना होगा।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि संघ प्रमुख के बयान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संघ की यह पुरानी रणनीति है कि जब चीजें अलोकप्रिय हो जाती हैं तो वह उनसे पल्ला झाड़ लेता है। शुक्रवार को ओवैसी ने 17 बिंदुओं को लेकर ट्विटर पर अपनी लंबी पोस्ट लिखी। इसमें एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि बाबरी आंदोलन के दौरान भी संघ नेताओं का एक वर्ग कहता था कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेगा। ओवैसी ने कहा कि मोहन भागवत और जेपी नड्डा के पास कोई संवैधानिक पद नहीं है, इसलिए पीएम मोदी को स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि वह 1991 के धर्मस्थल कानून के साथ हैं।


काशी, मथुरा, कुतुब का मुद्दा उठाने वाले जोकर
ओवैसी ने दावा किया कि विहिप के गठन से पहले अयोध्या का मुद्दा संघ के एजेंडे में नहीं था। यह 1989 में भाजपा के पालनपुर अधिवेशन में एजेंडा बना। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस राजनीतिक रूप से दोमुंही भाषा बोलता है। उन्होंने कहा कि काशी, मथुरा, कुतुब मुद्दा उठाने वाले सभी जोकर हैं। इनका संघ से सीधा संबंध है।

क्या बोली कांग्रेस?
भागवत के बयान पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, उनका बयान बहुत ही रचनात्मक है। हमें इतिहास को एक तरफ रखना चाहिए। इसे एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाई के हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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