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ब्रिटेन को पछाड़ भारत इस साल बन सकता है पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था
Tue, 04 Jun 2019 06:49 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 04 Jun 2019 06:49 AM IST
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भारतीय अर्थव्यवस्था
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भारत इस साल ब्रिटेन को पीछे छोड़ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। आईएचएस मार्केट की ओर से सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के जीडीपी का आकार इस साल 2.10 लाख अरब रुपये हो जाएगा जो ब्रिटेन से ज्यादा होगा। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत 2025 तक जापान को पीछे छोड़कर एशिया प्रशांत क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
यह रिपोर्ट लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जीत पर जारी की गई है। इसमें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई गई है। साथ ही 2019-23 के दौरान जीडीपी की औसत वृद्धि दर 7 फीसदी के आसपास रहने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि एशियाई क्षेत्रीय व्यापार और निवेश में तो भारत का प्रमुख योगदान होगा ही, इसका वैश्विक जीडीपी में भी योगदान बढ़ेगा। इससे दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की रैंकिंग लगातार सुधरती जाएगी।
हर साल 75 लाख बढ़ेगी वर्कफोर्स :
रिपोर्ट के अनुसार भारत के जीडीपी में अभी उत्पादन क्षेत्र का योगदान 18 फीसदी है। इसे बढ़ाकर 25 फीसदी करने का लक्ष्य है। इससे अगले दो दशक के दौरान हर साल वर्कफोर्स में करीब 75 लाख का इजाफा होगा।
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यह रिपोर्ट लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जीत पर जारी की गई है। इसमें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई गई है। साथ ही 2019-23 के दौरान जीडीपी की औसत वृद्धि दर 7 फीसदी के आसपास रहने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि एशियाई क्षेत्रीय व्यापार और निवेश में तो भारत का प्रमुख योगदान होगा ही, इसका वैश्विक जीडीपी में भी योगदान बढ़ेगा। इससे दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की रैंकिंग लगातार सुधरती जाएगी।
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हर साल 75 लाख बढ़ेगी वर्कफोर्स :
रिपोर्ट के अनुसार भारत के जीडीपी में अभी उत्पादन क्षेत्र का योगदान 18 फीसदी है। इसे बढ़ाकर 25 फीसदी करने का लक्ष्य है। इससे अगले दो दशक के दौरान हर साल वर्कफोर्स में करीब 75 लाख का इजाफा होगा।
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