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राजीव के साथ हमले में मारे गए परिवार को गांधी परिवार ने पहचानने से किया इंकार

Sun, 22 May 2016 02:31 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला,नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला,नई दिल्ली Updated Sun, 22 May 2016 02:31 PM IST
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others who died with Rajiv Gandhi
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी - फोटो : getty images

तमिलनाडु के श्रीपेरुमबुदुर में 25 वर्ष पहले पूर्व प्रधानंत्री राजीव गांधी की ब्लास्ट में हत्या कर दी गई थी। 21 मई, 1991 को हुई राजीव गांधी की इस हत्या में आसपास मौजूद और भी  लोगों की जानें गईं थीं। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस हादसे में राजीव गांधी के अलावा 15 लोगों की और मौत हुई थी और इसके कारण मारे गए लोगों के परिवार वालों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।

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मृतकों के परिजनों ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात की लेकिन कोई मदद नहीं मिली। राजीव गांधी के साथ ही ब्लास्ट में मारे गए पुलिस कांस्टेबल धर्मन के 38 वर्षीय बेटे राजशेखरन टेक्सी ड्राइवर हैं। राजशेखरन ने बताया कि जब मैने पिता की मौत की खबर सुनी उस समय मैं आठवीं क्लास में था, और मेरी बहन 10 साल की थी और छोटा भाई 5 साल का था। मेरे पिता कांचीपुरम के स्पेशल ब्रांच में कांस्टेबल थे। जिस समय पिता जी की मौत की खबर आई उस समय हम रिश्तेदारों के यहां गर्मी की छुट्टियों में चेन्नई गए हुए थे। एक पुलिसकर्मी ने आकर बताया कि आपके 'अप्पा' की बलास्ट में मौत हो गई। 
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मेरी माता की सरकारी जॉब थी इसलिए हम पढ़ाई पूरी करने में कामयाब हो पाए लेकन हमारे पिता जी जिंदा होते तो हम अच्छी स्थिति में होते। उनकी मौत के बाद हमारे जिंदगी पूरी तरह बदल गई कुछ साल पहले हमने सोनिया गांधी से दिल्ली स्थित घर पर मुलाकात की थी लेकिन वास्तव में उनसे क्या आशा कर सकते हैं।
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ब्लास्ट में जान गंवाने वाली महिला कांग्रेस नेता संथानी बेगम का 30 साल का बेटा अब्बास मोबाइल फोन का सामान बेचता है। अब्बास ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब मेरी मां की मौत की सूचना मिली तो उस समय में मैं 2 कक्षा में था। वह कांग्रेस की साउथ चेन्नई की महिला कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। जब मेरी उम्र 3 साल की थी तो मेरे पिता की मौत हो गई थी हम सात भाई बहन थे मेरा भाई अक्सर मां से कहता की आप रैलियों में मत जाया करो हम घर पर अकेले होते है लेकिन मां कभी नहीं मानतीं थीं। मां की मौत के बाद हमने बहुत संघर्ष किया जबकि प्रभावी पीड़ित परिवारों और पुलिसकर्मियों के परिवार वालों को जॉब और एलपीजे डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर दिए गए वहीं हमें नजरअंदाज कर दिया गया।

राजीव गांधी के साथ ही ब्लास्ट में जान गंवाने वाले पूर्व विधायक मुनुस्वामी के बेटे लीगु मोहन तमिल मनीला कांग्रेस के पदाधिकारी हैं। उन्होंने ने बताया कि मेरे पिता एमजीआर के समय विधायक थे उस वक्त उनकी उम्र 64 साल थी। पिता की मौत की खबर हमारे एक पारिवारिक मित्र ने दी थी, और उस समय के कांग्रेस नेता जीके मीपानार ने मेरे पिता के शरीर की पहचान की थी। हम लोग गांधी फैमिली से भी मिले थे लेकिन उन्होंने हमें पहचानने से इंकार कर दिया।


इन तीन पीड़ित परिवारों की तरह अन्य परिवारों की भी अपनी-अपनी शिकायतें, दर्द और नाउम्मीदी की यादें हैं। बड़े लोगों की मौत से जुड़ी खबरें और उनकी यादें लम्बे समय तक सरकार और शासन के स्तर पर जिंदा रहती हैं लेकिन अंजान लोगों की मौत से न तो पहले सरकारों और शासन को कोई फर्क फड़ता था और न ही आज फर्क पड़ता है।

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