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कोरोना से मरने वाले 75% मरीजों में मिली अन्य बीमारियां, डायबिटीज के रोगियों को सबसे ज्यादा खतरा
Fri, 26 Jun 2020 07:12 AM IST
श्रीधर मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Fri, 26 Jun 2020 07:12 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
मधुमेह (डायबिटीज) रोगियों में कोरोना का खतरा 50 फीसदी ज्यादा है। भारत में 11 में से एक व्यक्ति मधुमेह ग्रस्त है। विश्व के 16.6 फीसदी मधुमेह मरीज भारत में हैं। इंडियन एकेडमी ऑफ डायबिटीज के अध्यक्ष शशांक जोशी का कहना है कि मधुमेह रोगियों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। सिर्फ कोरोना ही नहीं, बल्कि अन्य बीमारियों का खतरा भी ज्यादा है।
दवाओं के साथ परहेज हो
दिल्ली के चौधरी ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेद अस्पताल के डॉ. केएन शर्मा का कहना है कि सीएसआईआर की बीजीआर-34 दवा असरदार है। डॉक्टर की तरफ से दीं दवाओं के सेवन और परहेज से भी नियंत्रण में ला सकते हैं। दिल्ली एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर राकेश यादव का कहना है कि मधुमेह रोगी कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आते हैं तो इनमें महामारी का प्रभाव जानलेवा हो सकता है।
संक्रमण से मृत 75% में अन्य बीमारियां भी मिलीं...
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में कोरोना से मौतों में 75 फीसदी मधुमेह, दिल या बीपी से ग्रस्त थे। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का एक ही सीजन देखने को मिला है। इसलिए ज्यादा जानकारी नहीं है।
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आधों को अपने रोग का पता नहीं
लैंसेंट के अनुसार भारत में आधे से ज्यादा मधुमेह मरीजों को बीमारी का पता नहीं होता। 7.7 करोड़ में से 5.7 करोड़ निगरानी नहीं करते। 20% उपचार नहीं लेते। अध्ययनों के मुताबिक, कोरोना के गंभीर मामलों में मधुमेह और मेटाबोलिक सिंड्रोम की स्थिति ज्यादा मिल रही है।
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दवाओं के साथ परहेज हो
दिल्ली के चौधरी ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेद अस्पताल के डॉ. केएन शर्मा का कहना है कि सीएसआईआर की बीजीआर-34 दवा असरदार है। डॉक्टर की तरफ से दीं दवाओं के सेवन और परहेज से भी नियंत्रण में ला सकते हैं। दिल्ली एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर राकेश यादव का कहना है कि मधुमेह रोगी कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आते हैं तो इनमें महामारी का प्रभाव जानलेवा हो सकता है।
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संक्रमण से मृत 75% में अन्य बीमारियां भी मिलीं...
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में कोरोना से मौतों में 75 फीसदी मधुमेह, दिल या बीपी से ग्रस्त थे। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का एक ही सीजन देखने को मिला है। इसलिए ज्यादा जानकारी नहीं है।
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आधों को अपने रोग का पता नहीं
लैंसेंट के अनुसार भारत में आधे से ज्यादा मधुमेह मरीजों को बीमारी का पता नहीं होता। 7.7 करोड़ में से 5.7 करोड़ निगरानी नहीं करते। 20% उपचार नहीं लेते। अध्ययनों के मुताबिक, कोरोना के गंभीर मामलों में मधुमेह और मेटाबोलिक सिंड्रोम की स्थिति ज्यादा मिल रही है।