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मरीजों से खिलवाड़: धड़ल्ले से बन रहा घटिया ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट, देश के चार राज्यों में छापा

Fri, 15 Mar 2019 10:27 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 15 Mar 2019 10:27 AM IST
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orthopedic implants factories running without license, CDSCO raid in four states
ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट (फाइल फोटो)
जॉनसन एंड जॉनसन के घटिया स्तर के हिप से सैकड़ों मरीजों को हुई परेशानी से केंद्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों पर सवाल खड़े हो गए। इस घटना के बाद केंद्रीय ड्रग कंट्रोल विभाग (सीडीएससीओ) ने देशभर में ऑर्थोपेडिक इंप्लांटट निर्माताओं पर छापा मारा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र समेत 45 जगहों पर हुई छापेमारी में कई फैक्ट्रियों को सीज कर दिया गया है। साथ ही इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 
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बता दें कि जॉनसन एंड जॉनसन के फॉल्टी हिप के कारण सैकड़ों मरीजों को दोबारा सर्जरी करानी पड़ी थी। अब सरकार उन मरीजों को मुआवजा दिला रही है। 

सीडीएससीओ ने अपनी खुफिया जानकारी के आधार पर दिल्ली में 25, उत्तर प्रदेश में छह, गुजरात में छह और महाराष्ट्र में आठ फैक्ट्रियों पर छापेमारी की। सीडीएससीओ ने पाया कि 29 फर्म और पांच कारोबारी बिना लाइसेंस के अर्थोपेडिक इम्प्लांट का व्यापार कर रहे थे। सीडीएससीओ ने इस अभियान के लिए 37 टीमें बनाई जिसमें 125 अधिकारी शामिल थे। 
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ऐसे बन रहा था घटिया इम्प्लांट

टीम ने छापेमारी में पाया कि बिना लाइसेंस के इन इम्प्लांट को ऐसी जगहों पर तैयार किया जा रहा था जहां गंदगी थी। निर्माताओं के पास गुणवत्ता के संचालन की कोई प्रणाली नहीं थी। इतना ही नहीं इनके पास इम्प्लांट में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ की गुणवत्ता को जांचने के लिए कोई प्रयोगशाला भी नहीं थे।
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काराबोरी इम्प्लांट को असेंबल कर बेचते थे और खुद को इसका निर्माता बताते थे। इन फर्म का सालाना कारोबार करीब 500 करोड़ रुपये आंका गया है। 

गंदे इम्प्लांट्स मरीज के लिए खतरा

ऐसे इम्प्लांट के इस्तेमाल में गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं होती। इस तरह के इम्प्लांट लगवाने के बाद दोबारा सर्जरी कराने की जरूरत पड़ सकती है। यही नहीं अगर मरीज खराब और गंदगी युक्त सामग्री से बने इम्प्लांट का उपयोग करते हैं तो उन्हें संक्रमण का भी खतरा रहता है। 
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