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तमिलनाडु विधानसभा में मीसा पर महाभारत: स्पीकर के चेंबर के सामने बैठे डीएमके विधायक, मार्शल ने जबरन उठाया
Tue, 08 Sep 2026 11:57 AM IST
प्रशांत तिवारी
एएनआई, चेन्नई
एएनआई, चेन्नई
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 08 Sep 2026 11:57 AM IST
सार
तमिलनाडु में सीएम विजय के मीसा को लेकर दिए गए बयान के बाद विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के चेंबर के सामने धरना दिया। इतना ही नहीं विपक्ष ने स्पीकर से मांग की कि विजय के बयान को सदन की कार्यवाही से अलग किया जाए।
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विधानसभा में भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्ष
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तमिलनाडु विधानसभा में मीसा, सरकारिया आयोग और पिछली DMK सरकारों से जुड़े कथित मामलों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया। DMK ने मुख्यमंत्री विजय के बयानों को विधानसभा की कार्यवाही से हटाने की मांग की, जिसे स्पीकर ने खारिज कर दिया। इसके बाद डीएमके विधायकों ने मंगलवार को स्पीकर के चेंबर के सामने धरना दिया। इसके बाद स्पीकर ने मार्शल को डीमके विधायकों को सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया।
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विजिलेंस मामलों का जिक्र करने पर डीएमके ने जताई आपत्ति
डीएमके विधायक ई.वी. वेलु ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि जांच के दायरे में चल रहे विजिलेंस मामलों का सदन में जिक्र करना विधानसभा की परंपरा का उल्लंघन है। हंगामे के बीच स्पीकर ने वेलु को अपनी बात रखने की अनुमति दी। वेलु ने कहा कि मामलों को पढ़ना परंपरा का उल्लंघन है। कल मुख्यमंत्री ने मीसा और सरकारिया आयोग के बारे में बात की थी। मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान विजिलेंस मामलों को पढ़ना परंपरा का उल्लंघन है। जो मामले जांच के दायरे में हैं, उन पर टिप्पणी नहीं की जा सकती।'
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मीसा पर विजय की टिप्पणी हटाने की मांग खारिज
स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने मीसा पर विजय की टिप्पणियों को विधानसभा की कार्यवाही से हटाने की डीएमके की मांग खारिज कर दी। स्पीकर ने कहा,'डीएमके कल मुख्यमंत्री विजय का भाषण एक मिनट भी सुनने को तैयार नहीं थी। मुख्यमंत्री विजय ने मीसा एक्ट के बारे में वही बातें कहीं, जिनका सदन में पहले ही जिक्र हो चुका था। इसलिए मीसा एक्ट पर मुख्यमंत्री के भाषण को हटाने की कोई जरूरत नहीं है।'
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'जायज मांग उठाने पर सदन से बाहर निकाला'
मीडिया से बात करते हुए डीएमके के व्हिप ई.वी.वेलु ने कहा कि हमने तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर जवाब मांगा था, लेकिन मुख्यमंत्री ने मुद्दे से ध्यान भटकाया और मीसा एक्ट के बारे में बात की। सरकारिया आयोग ने किसी को दोषी नहीं ठहराया था, इसलिए हमने स्पीकर से उन हिस्सों को हटाने के लिए कहा, लेकिन स्पीकर ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। एक जायज मांग उठाने के लिए स्पीकर ने हमें जबरन सदन से बाहर निकाल दिया। यह एक अलोकतांत्रिक सरकार और अलोकतांत्रिक काम की हद है। डीएमके सरकार ने असली सरकार चलाई थी, लेकिन टीवीके 'रील' सरकार चला रही है।' बता दें कि यह टकराव विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच तीखी बहस के एक दिन बाद हुआ।
उदयनिधि को जवाब देने का मौका नहीं मिलने पर वॉकआउट
सोमवार को विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को पिछली डीएमके सरकार के खिलाफ विजय द्वारा लगाए गए आरोपों का तुरंत जवाब देने की अनुमति नहीं मिलने के बाद डीएमके ने सदन से वॉकआउट कर दिया था। अपने भाषण के दौरान विजय ने प्रवर्तन निदेशालय की जानकारी, सरकारिया आयोग और पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का जिक्र किया। उन्होंने पुलिस में खाली पड़े पदों, पुलिस के आधुनिकीकरण, डिजिटलाइजेशन, अपराध की रोकथाम और पुलिसिंग में राजनीतिक दखलअंदाजी कम करने जैसे मुद्दों पर भी बात की। वहीं डीएमके ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है और इनके समर्थन में पेश किए गए सबूतों पर सवाल उठाए हैं।
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'डीएमके मुझसे डरती है'
विपक्ष पर निशाना साधते हुए मंत्री आधव अर्जुन ने मंगलवार को डीएमके पर आरोप लगाया कि जब भी उन्होंने सदन में बोलने की कोशिश की, पार्टी ने बार-बार कार्यवाही में बाधा डाली। डीएमके मुझसे डरती है। जब भी मैं सदन में बोलने के लिए खड़ा होता हूं, वे भी खड़े हो जाते हैं और मुझे बोलने से रोकने के इरादे से विरोध करते हैं। डीएमके के साथ समस्या यह है कि वे चाहती है कि सत्ताधारी पार्टी उनकी बात सुने, लेकिन वे खुद सुनना नहीं चाहती।'