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किसान के मुद्दों से केंद्र सरकार को जवाब देगा विपक्ष, भविष्य की रणनीति का किया खुलासा
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Updated Sat, 01 Dec 2018 06:49 AM IST
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farmer suicide
संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार और भाजपा के राम मंदिर मुद्दे का जवाब विपक्ष किसानों के मसले से देगा। किसानों की शुक्रवार को हुई रैली में विपक्षी दलों के जमघट ने इसकी तस्वीर पेश कर दी। रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल, शरद यादव, फारूक अब्दुल्ला, सीताराम येचुरी समेत कई विपक्षी दिग्गजों ने उपस्थिति दर्ज कराने के साथ सीधे पीएम मोदी पर निशाना साध कर अपनी भविष्य की रणनीति का इजहार कर दिया है।
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किसान रैली में भी विपक्षी दिग्गजों ने तेवर दिखा कर दिए साफ संकेत
विपक्ष राम मंदिर मुद्दे की काट के लिए किसानों के मामले पर पर संसद में सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस, राकांपा, नेशनल कांफ्रेंस, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी के बीच बात हुई है। उम्मीद है कि सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी दलों की बैठक में किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने का सर्वस्वीकार्य खाका तैयार हो जाए। वैसे भी सरकार और भाजपा के राम मंदिर कार्ड से कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल असहज हैं। खासतौर पर इस कार्ड से नरम हिंदुत्व का चोला पहने कांग्रेस ज्यादा ही असहज है।
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किसानों को दूसरे अहम वर्गों के समर्थन ने बढ़ाई सरकार की चिंता
वैसे भी किसानों के मुद्दे पर विपक्ष के पास सरकार को घेरने का बड़ा मौका है। वह इसलिए कि किसान वही मांग कर रहे है जिसकी घोषणा भाजपा ने बीते चुनाव लोकसभा चुनाव के लिए जारी अपने चुनाव घोषणा पत्र में की थी। तब भाजपा ने स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करने और फसल की लागत की तुलना में डेढ़ गुणा कीमत देने का वादा किया था। जहां तक कर्ज माफ करने का सवाल है तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राज्य विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान लगातार इस आशय का आश्वासन दे रहे हैं।
सरकार की परेशानी
किसानों के मुद्दे पर नाराजगी की बानगी सरकार को गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान ही दिख गई थी। हालांकि रणनीतिगत उपाय ढूंढने में हुई लापरवाही के कारण किसान का मुद्दा मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में छाया रहा तो राजस्थान सहित शेष दो राज्यों में भी यह अहम मुद्दा है। अब लोकसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा अपने चरम पर जाता दिख रहा है। सरकार की मुश्किल यह है कि इस बार के किसान आंदोलन को डॉक्टरों, वकीलों, पूर्व सैनिकों, पेशेवरों, मध्यवर्ग के युवाओं का खासा समर्थन हासिल हो रहा है।