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रिजिजू का आरोप: महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए आगे नहीं आ रहा विपक्ष, केवल पत्र लिख रहा

Fri, 27 Mar 2026 10:47 PM IST
Rahul Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Rahul Kumar Updated Fri, 27 Mar 2026 10:47 PM IST
सार

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को विपक्षी नेताओं पर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ चिट्ठियां लिखने के बजाय, उन्हें कानून में प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा के लिए आगे आना चाहिए।

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Opposition only writing letters, not coming forward to discuss women's reservation bill: Rijiju
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू - फोटो : एक्स/एएनआई/संसद टीवी/वीडियो ग्रैब

विस्तार

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं पर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ पत्र लिखने के बजाय उन्हें कानून में प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा करने के लिए आगे आना चाहिए।

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रिजिजू ने कहा कि इस मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने विपक्ष को आश्वासन दिया कि सरकार राजनीतिक दलों से परामर्श किए बिना इस विधेयक पर कुछ भी नहीं कर रही है। उनकी यह प्रतिक्रिया कांग्रेस के जयराम रमेश के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान पर आपत्ति जताए जाने के तत्काल बाद आई, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की बात कही थी। 
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रिजिजू का जवाब
जयराम रमेश ने कहा था कि अब तक कोई सर्वदलीय बैठक नहीं हुई है। इसका जवाब देते हुए रिजिजू ने कहा कि राजनीतिक दलों के साथ एक बैठक हुई है। सरकार की मंशा महिला आरक्षण विधेयक पर सभी दलों के साथ परामर्श करने की है। उन्होंने कहा कि चाहे सभी पार्टियां एक साथ हों, या फिर पार्टियां एक-एक करके हों। यह एक कार्यप्रणाली है, जिसे सरकार ने चुना है। अब, मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी सरकार को यह निर्देश नहीं देगी कि परामर्श की प्रक्रिया कैसे संचालित की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एकमात्र ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो न तो आगे आ रही है और न ही सर्वदलीय बैठक की मांग कर रही है।
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वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार को पत्र लिखकर पूछा है कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर इतनी जल्दबाज़ी क्यों दिखाई जा रही है। राज्यसभा में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बैठकें हुई हैं और कई नेताओं ने उसमें हिस्सा लिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जेंडर बजट में कटौती नहीं बल्कि बढ़ोतरी हुई है।


सीतारमण ने बताया कि 2026-27 के बजट अनुमान में जेंडर बजट बढ़ाकर 5.02 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल के 4.49 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने विपक्ष पर दिखावटी चिंता जताने का आरोप लगाया और कहा कि आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि महिलाओं के लिए आवंटन बढ़ा है। महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी इस खींचतान के बीच साफ है कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनना अभी आसान नहीं दिख रहा है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

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