{"_id":"5c17ee2ebdec2256b61c17ee","slug":"opposition-issues-notice-to-law-minister-and-government-against-privilege-notice-on-rafale-deal","type":"story","status":"publish","title_hn":"राफेल पर विपक्ष ने कानून मंत्री और सरकार के खिलाफ दिया विशेषाधिकार हनन नोटिस ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
राफेल पर विपक्ष ने कानून मंत्री और सरकार के खिलाफ दिया विशेषाधिकार हनन नोटिस
Tue, 18 Dec 2018 12:12 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 18 Dec 2018 12:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार को पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। एक ओर लगातार कावेरी जल के विवाद में एआईडीएमके और डीएमके वेल में आकर नारेबाजी करने उतरीं। वहीं कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेता राफेल मामले में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश कथित कैग पर रिपोर्ट को लेकर हंगामा करते रहे और सत्तापक्ष ने सिख दंगों को कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा किया। कांग्रेस ने विशेषाधिकार नोटिस दिया है। हंगामे के चलते पूरे दिन के लिए कामकाम ठप करना पड़ा।
विज्ञापन
विपक्षी दलों ने राज्यसभा में राफेल मामले में सरकार के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सदन के बाहर बताया कि सोमवार को हम लोगों ने सरकार के खिलाफ नोटिस दिया है विशेषकर कानून मंत्री के खिलाफ, क्शयों कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जो शपथपत्र दिया था लॉ ऑफिसर्स के माध्यम से दिया था। जब लॉ ऑफिसर को कानून मंत्रालय ने ये जिम्मा दिया तो जाहिर है कि प्रधानमंत्री जी की जानकारी से शपथपत्र कोर्ट गया जो गलत था। उनका कहना है कि ये सरकार सुप्रीम कोर्ट को झूठ बोल सकती है। गलत शपथपत्र भेज सकती है और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पूरी संसद और देश को गुमराह कर सकती है। इसलिए इस सरकार पर हमारा कोई विश्वास नहीं है।
विज्ञापन
आजाद का कहना है कि सरकार ने कोर्ट को शपथपत्र देकर विमान की कीमत बताई है। इसे कैग और पीएसी में चर्चा की बात कहकर सार्वजनिक होना बताया गया। देश के इतिहास में पहली बार केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गलत शपथपत्र देकर गुमराह किया और उसी आधार पर कोर्ट का फैसला आ गया। उनका कहना है कि अफसोस है कि सदन में विशेषाधिकार पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। हमारी मांग है कि राज्यसभा सभापति और लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस स्वीकार करना चाहिए। वहीं जेपीसी की हमारी मांग रही है वो और भी जरुरी हो गई है। अब छह जेपीसी हुई हैं जिसमें चार कांग्रेस की सरकारों में हुई हैं और बोफोर्स भी शामिल है।
विज्ञापन
कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार की तरफ से अटार्नी जनरल और लॉ ऑफिसर्स खड़े हुए उन्होंने विमान की कीमत पर कहा कि सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं लिहाजा कोर्ट ने सील्ड कवर में मांगा। सील्ड कवर का मतलब है वहां मौजूद वकीलों को तो कुछ दिखाया नहीं गया। जबकि जो बात सार्वजनिक नहीं होनी थी कोर्ट के निर्णय में शामिल है। अगर फैसले में ये बात आनी थी तो संबंधित वकीलों को भी बताई जानी थी। ऐसे में कोर्ट को शर्मिंदगी न देखनी पड़ती। डा. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जानबूझ कर सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था को गुमराह ओर बरगलाने का प्रयत्न किया गया है। जो सुप्रीम कोर्ट की अवमाननाए भी है।
सीपीआई सांसद डी. राजा का कहना है कि सच का सामने लाने के लिए जेपीसी से जांच जरूरी है। राजा भी कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव के प्तसमथर्स्त्रन कर रहे हैं। आरजेडी सांसद मनोज झा का कहना है कि वे भी इस मामले में नोटिस दे रहे हैं और कांग्रेस के विशेषाधिकार हनन के साथ हैं। उनका कहना है कि उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय की विश्वनीयता की चिंता है। क्योंकि कल को कोई दूसरा प्रधानमंत्री आता है तो भी पीएमओ पर शक के बादल रहेंगे। क्योंकि बंद लिफाफे में मामले को ढकने की कोशिश हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भाजपा बेईमानी का जश्र मना रही है। एनसीपी की वंदना चौहान ने भी कांग्रेस का समर्थन करते हुए कहा वे कांग्रेस के विशेषाधिकार हनन नोटिस के साथ हैं।