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Sedition Law: राजद्रोह कानून खत्म होने से भी विपक्ष को डर, सता रही इस बात की चिंता

Wed, 11 Oct 2023 08:26 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 11 Oct 2023 08:26 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को एक ट्वीट कर अपनी यही चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि गृह मंत्रालय ने इंडियन पीनल कोड यानी भारतीय दंड संहिता के स्थान पर नए कानून लाने के लिए जो प्रस्ताव किए हैं, वे कहीं ज्यादा खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं।

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opposition is afraid of the abolition of the sedition law and is worried about this Know all
Sedition law - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजद्रोह कानून (Sedition Law) की विपक्ष हमेशा आलोचना करता रहा है। केंद्र में चाहे जिस दल की सरकार रही हो, विपक्ष ने हमेशा इस बात का आरोप लगाया है कि केंद्र सरकारें इसके जरिए अपने राजनीतिक-वैचारिक विरोधियों को डराने का प्रयास करता रहा है। यही कारण है कि विपक्षी दलों के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय और सामाजिक संस्थाएं भी इसे समाप्त किए जाने की मांग करती रही हैं। 

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लेकिन अब जब कि केंद्र सरकार राजद्रोह कानून को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, और उसके स्थान पर नए कानून लाने की कोशिश कर रही है, विपक्ष को इस बात की चिंता सताने लगी है कि राजद्रोह कानून समाप्त करने के नाम पर उससे भी ज्यादा कठोर कानून लाया जा सकता है और इसके जरिए विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा सकती है। 
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को एक ट्वीट कर अपनी यही चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि गृह मंत्रालय ने इंडियन पीनल कोड यानी भारतीय दंड संहिता के स्थान पर नए कानून लाने के लिए जो प्रस्ताव किए हैं, वे कहीं ज्यादा खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं। राजद्रोह कानून समाप्त करने के नाम पर उससे कहीं ज्यादा दमनकारी कानून बनाया जा सकता है। इससे नागरिकों के अधिकारों में बहुत अधिक कटौती हो सकती है और इसके द्वारा अपने विरोधियों को दबाने की अधिक कोशिश की जा सकती है।
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उन्होंने विपक्ष के नेताओं से अपील की है कि वे इसका बारीकी से अध्ययन करें और इस पर अपना विरोध व्यक्त कराएं। उन्होंने कहा है कि वर्तमान राजद्रोह कानून को केवल शब्दों के जरिए नहीं, बल्कि इसकी सोच को भी समाप्त किया जाना चाहिए। एक कानून समाप्त करने के नाम पर उससे ज्यादा कठोर कानून लाकर उसी दमनकारी नीति को बरकरार नहीं रखा जा सकता।  

राजद्रोह कानून
वर्तमान में राजद्रोह कानून (IPC 124A) के अंतर्गत संकेतों, किसी भी संचार माध्यम का उपयोग कर भीड़ को उकसाने या वैमनस्यता बढ़ाने, या सरकार के विरुद्ध विद्रोह करने के आरोप में आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। ऐसे आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखा जा सकता है। चूंकि, ऐसे कई आरोपी रहे हैं जिन्हें इन धाराओं में लंबे समय तक जेल में बंद रखा गया, लेकिन बाद में साक्ष्य के अभाव में उन्हें अदालत ने निर्दोष करार दिया, यह मांग की जाती रही है कि लोकतांत्रिक देश में इसके लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।     

सरकार का इरादा सही नहीं: राजद
राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. नवल किशोर ने अमर उजाला से कहा कि संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर ने कानून से ज्यादा इसे लागू करने वाली सरकारों की मंशा और नीयत को ज्यादा महत्त्वपूर्ण माना था। आज इस तरह के कई मामले लोगों के सामने हैं जिससे  सरकार के इरादों का पता चलता है। विपक्ष के सैकड़ों नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय, इनकम टैक्स और सीबीआई की छापेमारी हो रही है। 


अब तक किसी नेता के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं मिला है, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई जारी है। इससे सरकार के इरादों का पता चलता है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि राजद्रोह कानून में बदलाव को लेकर सरकार के इरादों पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार राजद्रोह कानून को बदलने के नाम पर लोगों के दमन के लिए ज्यादा कठोर कानून लाने का प्रयास करता है तो समूचे विपक्ष की ओर से इसका जोरदार प्रतिकार किया जाएगा।

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