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लोकसभा में पॉक्सो संशोधन विधेयक पास, मृत्युदंड के प्रावधान पर विपक्ष ने उठाए सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Thu, 01 Aug 2019 08:00 PM IST
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बच्चों के खिलाफ अपराध (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2019 गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया। सरकार ने संशोधन विधेयक पर चर्चा और पारित करने के लिए इसे लोकसभा में पेश किया। विपक्ष के अनेक सदस्यों ने विधेयक के अनेक प्रावधानों का स्वागत किया लेकिन इसमें मृत्युदंड के प्रावधान पर पुनर्विचार करने की मांग की।
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निचले सदन में ‘लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019’ को रखते हुए केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि विधेयक में अश्लील प्रयोजनों के लिए बच्चों का उपयोग (चाइल्ड पोर्नोग्राफी) को परिभाषित किया गया और इस पर काबू के लिए भी प्रावधान किया गया है।


ईरानी ने बताया कि चिंता का विषय मात्र यह नहीं है कि बच्चों के शोषण की वीडियो देखी जा रही हैं, बल्कि चिंता इस बात की भी है कि इन्हें कौन फैला रहा है। उन्होंने कहा कि विधेयक में प्राकृतिक आपदाओं के समय बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के मामले में भी प्रावधान किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। इस विधेयक में 2012 के मूल कानून में संशोधन किया गया है।

विधेयक में प्रावधान किया गया है कि नाबालिग के खिलाफ गंभीर यौन अपराध के साबित होने पर दोषी को कम से कम 20 वर्ष की कठिन कारावास की सजा सुनायी जाएगी। इसमें ऐसे अपराध के लिए आजीवन कारावास, मृत्युदंड और जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के तिरुनवुक्करासर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए लाए गये संशोधन स्वागत योग्य हैं। आज के समय में यह कानून जरूरी है जबकि हर साल बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विधेयक में मृत्युदंड को शामिल करने की जहां तक बात है, इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और संसदीय समिति को भेजा जाना चाहिए। तिरुनवुक्करासर ने कहा कि बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के कई मामले सामने नहीं आ पाते और लोग पुलिस में नहीं जाते। इनके अलावा अदालतों में भी मामले लंबे समय तक लंबित रहते हैं। इन पर ध्यान देना जरूरी है।
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