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आरक्षण संबंधी रोस्टर प्रणाली के मुद्दे पर विपक्ष ने की तत्काल विधेयक लाने की मांग

Thu, 07 Feb 2019 02:54 PM IST
अजय सिंह भाषा, नई दल्ली
भाषा, नई दल्ली Published by: अजय सिंह Updated Thu, 07 Feb 2019 02:54 PM IST
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Opposition demanding immediate bill from government on roster system issue
loksabha

उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी रोस्टर प्रणाली के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार से तत्काल विधेयक लाने की मांग की और सरकार ने नौकरियों में विभिन्न वर्गों के आरक्षण को किसी भी कीमत पर आंच नहीं आने देने का आश्वासन दिया। इससे असंतुष्ट विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक बृहस्पतिवार को एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिये स्थगित कर दी गई।

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एक बार के स्थगन के बाद 11 बजकर 20 मिनट पर सदन की बैठक शुरु होने पर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू द्वारा दी गई व्यवस्था के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी रोस्टर प्रणाली के मुद्दे पर शून्यकाल में संक्षिप्त चर्चा की गई। जिन सदस्यों ने इस मुद्दे पर नोटिस दिए थे, उन्होंने इस विषय पर अपनी बातें रखी।
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इस मुद्दे को उठाते हुये सपा के रामगोपाल यादव ने 200 सूत्रीय रोस्टर प्रणाली के बजाय 13 सूत्रीय रोस्टर प्रणाली से अनुसूचित जाति और जनजाति के लिये उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण नगण्य होने की बात कही। उन्होंने आरक्षण संबंधी नयी रोस्टर प्रणाली से उपजे इस संकट से निपटने के लिये सरकार से तत्काल विधेयक लाने की मांग की।
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चर्चा के जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लिए प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार पुनरीक्षण याचिका दायर करेगी और उसे उच्चतम न्यायालय से न्याय मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के स्थान पर विभाग को इकाई मानने की व्यवस्था में सरकार की कोई भूमिका नहीं है बल्कि ऐसा अदालत के आदेश पर हुआ है। उन्होंने कहा कि नयी व्यवस्था की समीक्षा के लिए सरकार ने विशेष अनुमति याचिका न्यायालय में दाखिल की थी और इस पर अच्छी पैरवी भी हुई है।

जावड़ेकर ने कहा ‘‘सर्वोच्च अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए हमने सभी विश्वविद्यालयों की रोस्टर प्रणाली का अध्ययन भी किया। हम पुनरीक्षण याचिका दाखिल करेंगे ओर उम्मीद है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को न्याय मिलेगा।’’ 

मंत्री के जवाब पर विपक्षी सदस्यों ने गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस संबंध में तत्काल विधेयक लाया जाना चाहिए। सपा और बसपा के सदस्य आसन के समक्ष आ कर सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। 

सभापति नायडू ने सदस्यों से शांत रहने और कार्यवाही चलने देने की अपील की। लेकिन हंगामा थमते न देख उन्होंने 11 बज कर करीब 35 मिनट पर बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

चर्चा के दौरान यादव ने दलील दी कि इस व्यवस्था में अनुसूचित जनजाति को पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया है। इसके तहत 9 पद सामान्य श्रेणी के लिए, तीन पद अनुसूचित जाति के लिए और एक पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होगा। ‘‘ऐसे में सवाल यह उठता है कि अनुसूचित जनजाति के लोग आखिर कहां जाएंगे।’’ 

उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी रोस्टर प्रणाली के मुद्दे पर यादव ने तत्काल विधेयक लाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए सरकार की ओर से केवल 48 घंटे के अंदर विधेयक लाया गया। ‘‘उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी रोस्टर प्रणाली के मुद्दे पर भी तत्काल विधेयक लाया जाए क्योंकि यह भी अत्यंत गंभीर मुद्दा है।’’

राजद के मनोज कुमार झा ने सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की मांग करते हुए कहा ‘‘इस व्यवस्था में अनुसूचित जनजाति के लोगों के साथ घोर अन्याय हो रहा है। इतना ही नहीं, इस व्यवस्था में अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग का भी प्रतिनिधित्व कम हो रहा है। इस ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।’’ 

उन्होंने कहा ‘‘केवल पुनरीक्षण याचिका से ही काम नहीं चलेगा। सरकार को इस मुद्दे पर तत्काल विधेयक लाना चाहिए।’’

बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने भी इस मुद्दे पर तत्काल विधेयक लाए जाने की मांग करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी नयी रोस्टर प्रणाली में विश्वविद्यालय के बजाय विभाग को इकाई माने जाने की वजह से अब अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है।

मिश्र ने कहा ‘‘खुद उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अब इस बारे में कोई मुकदमा न लाया जाए। ऐसे में अनुसूचित जाति के लोग कहां जाएंगे। इसलिए न केवल इस संबंध में एक विधेयक तत्काल लाया जाना चाहिए बल्कि सरकार को पूर्ण समाधान तक कोई नियुक्ति न किए जाने का आश्वासन भी देना चाहिए।’’ 


भाकपा के विनय विश्वम ने कहा कि हाशिये पर रह रहे लोगों को इस अधिकार से सरकार भी इंकार नहीं कर सकती। अनुसूचित जनजाति के लोगों को उनका अधिकार दिया जाना चाहिए। यह केवल आज के लिए ही नहीं बल्कि भविष्य के लिए भी जरूरी है।

बजट सत्र के दौरान उच्च सदन की कार्यवाही जिन मुद्दों पर लगातार बाधित है उनमें 13 सूत्रीय रोस्टर प्रणाली का मुद्दा भी शामिल है। 

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