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सीएए-एनआरसी के खिलाफ विपक्ष की बड़ी बैठक सोमवार को, सड़कों पर उतरने की योजना
Wed, 08 Jan 2020 04:48 AM IST
आसिम खान
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Wed, 08 Jan 2020 04:48 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : neeraj
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के मद्देनजर संयुक्त विपक्ष की एक महत्वपूर्ण बैठक अगले सोमवार को होगी। आठ महीने पहले मोदी सरकार के गठन के बाद विपक्षी दलों की यह पहली विचार मंथन बैठक होगी। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी, राष्ट्रवादी कांग्रेस अध्यक्ष शरद पवार, डीएमके और शिवसेना सहित 16 दलों के कई बड़े नेताओं के भाग लेने की संभावना है। ममता बनर्जी रविवार को ही दिल्ली पहुंच जाएंगी जबकि बैठक पार्लियामेंट एनेक्सी में सोमवार दोपहर बजे शुरू होगी।
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कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, इस बैठक में विपक्षी नेता संसद के आगामी बजट सत्र के लिए रणनीति बनाएंगे साथ ही देशव्यापी छात्र आंदोलन के प्रति भी अपना रुख स्पष्ट करेंगे। अभी तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और ममता बनर्जी जैसे इक्का-दुक्का नेताओं ने ही छात्र आंदोलन के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है। विपक्ष को तय करना है कि क्या वह नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में खुलकर शामिल हो या उसे बाहर से ही अपना समर्थन दे।
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विपक्ष चाहता तो है कि सरकार के प्रति छात्रों के गुस्से का फायदा उठाए। लेकिन उसे डर भी है कि आंदोलन के राजनीतिकरण से छात्रों का गुस्सा कहीं उन्हीं पर न फूट पड़े। खासतौर पर इसलिए क्योंकि इस आंदोलन का कोई एक नेता नहीं है और हर राज्य, हर विश्वविद्यालय में वहां के छात्र ही आंदोलन चला रहे हैं।
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इस आंदोलन में भाग ले रहे छात्र अलग-अलग तरह से अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कोई प्रदर्शनी लगा रहा है, कोई बैनर पोस्टर के जरिए तो कोई संविधान की शपथ लेकर विरोध जता रहा है। ऐसे में विपक्ष इस आंदोलन को कैसे समर्थन देगा इसको लेकर भी बैठक में विचार मंथन होगा।
संसद में हार गए तो सड़कों पर उतरे
विपक्षी नेता इस आंदोलन में शामिल होकर बताना चाहते हैं चूंकि संसद के दोनों सदनों में भाजपा और उसके समर्थक दलों का स्पष्ट बहुमत है इसलिए नागरिकता संशोधन कानून को पारित होने से वे नहीं रोक पाए। लेकिन यह कानून देश हित में और सांप्रदायिक सौहार्द के हित में नहीं है, इसलिए वह सड़कों पर उतर कर इसके खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में तो भाग ले ही सकता है।
संसद में विरोध करे विपक्ष
हालांकि पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा जैसे कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि राजनीतिक दलों को छात्र आंदोलन में सीधे भाग लेने की जगह संसद के अंदर अपना विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।