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विपक्ष का आरोप : एनएचआरसी का दुरुपयोग कर रही मोदी सरकार, राजनीतिक विरोधियों को बना रही निशाना
Tue, 20 Dec 2022 10:29 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 20 Dec 2022 10:29 PM IST
सार
विपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र, गैर भाजपा शासित राज्यों में सरकारों को अस्थिर करने के इरादे से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीमों को भेज रहा है। विपक्षी दलों आरोप लगाया कि सरकार जहरीली शराब त्रासदी से राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
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पीएम मोदी (फाइल)
- फोटो : Social Media
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विस्तार
विपक्षी दलों ने मंगलवार को केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनचआरसी) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने चुनावी लाभ के लिए ऐसे संस्थानों को बर्बाद न करने की सलाह दी।
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इन्होंने एक संयुक्त बयान में आरोप लगाया कि केंद्र, गैर भाजपा शासित राज्यों में सरकारों को अस्थिर करने के इरादे से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीमें भेज रहा है। विपक्षी दलों कांग्रेस, राजद, जद-यू, तृणमूल कांग्रेस, आप, भाकपा, माकपा, समाजवादी पार्टी, द्रमुक, राकांपा और शिवसेना ने एक बयान में आरोप लगाया कि सरकार जहरीली शराब त्रासदी से राजनीतिक लाभ लेने का 'निर्लज्ज प्रयास' कर रही है। बता दें कि बिहार में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हुई है।
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बयान में कहा गया, हम समान विचारधारा वाले विपक्षी दल इस तरह की विनाशकारी त्रासदी से राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस निर्लज्ज प्रयास की निंदा करते हैं। दलों ने कहा, हम एनएचआरसी के इस तरह के खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक तरीके से इस्तेमाल की निंदा करते हैं, यह उन लोगों की स्मृति का अपमान है जो इसमें मारे गए हैं। उनसे साथ परिवार भी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट है कि केवल गैर शासित राज्यों में एनएचआरसी को भेजा जा रहा है। ऐसा लगता है कि सरकार का विपक्ष शासित सरकारों को अस्थिर करने का इरादा है। उन्होंने कहा, दुख की बात है कि बीते आठ वर्षो से राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए ईडी, सीबीआई, आई आदि का इस्तेमाल करने के बाद एनएचआरसी और एनसीपीसीआर मोदी सरकार के हाथों के नए उपकरण बन गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा, हमें उम्मीद है कि मोदी सरकार अपनी खुद की चुनावी संभावनाओं को सुरक्षित करने के बजाय लोगों की सेवा करने के लिए मूल्यवान सार्वजनिक संसाधनों का आत्मनिरीक्षण और उपयोग करेगी। विपक्षी दलोंने जहरीली मौतों पर दुख व्यक्त किया और कहा कि बिहार शराब तस्करों और अरक बनाने वालों से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। नकली शराब के खिलाफ लोगों को आगाह करने के लिए जन-पहुंच अभियान भी चलाए हैं।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इन दुखद मौतों के तुरंत बाद एनएचआरसी की एक टीम को मामले की जांच के लिए बिहार के सारण और सीवान जिलों में भेजा गया था। बयान में कहा गया, मोदी सरकार के दोहरे मापदंड का प्रमाण इस तथ्य से मिलता है कि 2016 से 2021 तक राज्य में दो सौ से ज्यादा जहरीली शराब से संबंधित मौतें हुई हैं, तब राज्य में जदयू-भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार थी। लेकिन एनएचआरसी को कभी ऐसी किसी भी घटना की जांच करने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई।