रक्षा-सैन्य विशेषज्ञों की राय: तनाव और बढ़ाएगा मगर युद्ध छेड़ने की स्थिति में नहीं है चीन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 17 Jun 2020 05:05 AM IST
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वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 1962 के बाद पहली बार भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई है। कोरोना के कारण घरेलू मोर्चे पर बुरी तरह घिरे चीनी नेतृत्व से एलएसी पर तनाव को चरम पर पहुंचाने का अंदेशा पहले भी था।
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घरेलू मोर्चे पर जिस तरह चीन घिरा है, उससे निकट भविष्य में तनाव कम होने की उम्मीद भी नहीं है। इसके बावजूद सच्चाई यह है कि वर्तमान में दुनिया में अलग-थलग होने की कगार पर खड़ा चीन अभी भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की स्थिति में नहीं है। चीन की योजना भारत को चारों तरफ से घेर कर दबाव में लाने की है। इसके कई कारण हैं।
चीनी नेतृत्व की कार्यशैली पर निगाह डालें तो घरेलू मोर्चे पर मुश्किलों से घिरने पर वह हमेशा अपने देश में राष्ट्रवाद का ज्वार पैदा करता रहा है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर हिला चीन हांगकांग के साथ ही भारत से भी रिश्ते में लगातार तनाव बढ़ा रहा है। दरअसल, उसकी रणनीति खुद को पीडि़त के रूप में पेश करने की है।
वह कभी भारत को अपने प्रतियोगी के रूप में उभरते नहीं देखना चाहता। फिलहाल, दुनिया के ताकतवर देश चीन को अलग-थलग करने में जुटे हैं। इसमें डब्ल्यूएचओ से जांच का मामला हो या फिर दक्षिण चीन सागर का सवाल, भारत इसमें चीन को घेरने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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फिर भारत की योजना एलएसी तक चीन की तर्ज पर ही युद्ध गति से निर्माण कार्य करने की है। जाहिर है कि ऐसा करने से एलएसी पर भारत चीन को बराबरी के स्तर का टक्कर दे सकेगा। यह सवाल है कि दोनों देशों के बीच खूनी जंग आगे क्या रूप लेगी? इसके लिए यह जानना जरूरी होगा कि चीन की ओर से भारतीय जवानों पर हमले के आदेश किसने दिए?

यह लोकल कमांडर का फैसला था या फिर चीनी नेतृत्व ने अपनी सेना को ऐसा करने के लिए फ्री हैंड दिया था। अगर यह फैसला चीनी नेतृत्व का है, तो आने वाले समय में एलएसी पर तनाव चरम पर होगा। जहां तक भारत का सवाल है तो अब उसे सतर्क रहने की जरूरत है।

आप देखिये, बीते कुछ दिनों से एलओसी पर पाकिस्तान अचानक भारत के खिलाफ आक्रामक हुआ है। सोमवार को ही उसने हमारे दो राजनयिकों का अपहरण कर झूठे आरोप लगाए। इसी दौरान नेपाल आधारहीन तथ्यों के सहारे हमारे भूभाग पर दावा जता रहा है। मतलब सीधा है, चीन हमें चारों ओर से घेर कर दबाव में लाना चाहता है। इसलिए कि भारत उसे परेशान करने वाले मुद्दों पर दुनिया से दूरी बनाए।

हां, जहां तक दोनों देशों के बीच युद्ध की नौबत है, तो मुझे ऐसा होने की संभावना नहीं दिखती। उसकी स्थिति ऐसी नहीं है। वैश्विक मोर्चे पर वह पहले ही घिरा है। फिर दुनिया में चीन की तुलना में भारत के पक्ष में समर्थन ज्यादा है। ऐसे में चीन की भावी भूमिका भारत को लगातार परेशान करने की रहेगी। (कमर आगा, रक्षा विशेषज्ञ)
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