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Op Sindoor 2.0: PAK ने सऊदी-तुर्किये से बढ़ाए दोस्ती के हाथ, फिर भी भारत क्यों बेफिक्र? विशेषज्ञों का आकलन

Sat, 08 Aug 2026 06:41 AM IST
Ashutosh Bhatia आशुतोष भाटिया
Updated Sat, 08 Aug 2026 06:41 AM IST
सार

मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए संयुक्त रक्षा समझौते के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आतंकी हमले की स्थिति में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई कितनी जटिल होगी। क्या यह समझौता भारत के लिए बड़ी चुनौती बनेगा? क्या ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की राह मुश्किल होगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Operation Sindoor 2.0: Why India May Not Face Major Challenges Despite Pakistan New Defence Ties
ऑपरेशन सिंदूर - फोटो : ANI

विस्तार

मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए संयुक्त रक्षा समझौते के बाद सवाल उठ रहे हैं कि किसी आतंकी हमले की सूरत में पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की राह क्या भारत के लिए ज्यादा जटिल हो जाएगी। क्योंकि इस समझौते में यह प्रावधान किया गया है कि किसी भी देश के विरुद्ध हमला तीनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा।

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भारत ने कई बार दोहराया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, आतंकी हमला होने पर वह दोबारा कार्रवाई करेगा। दरअसल ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने के बाद एक तरफ जहां आतंकी तंजीमों में दहशत का माहौल है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी हुक्मरान और सेना प्रमुख दुनिया भर में घबराए हुए घूम रहे हैं। समझौते से साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अपनी सुरक्षा साझेदारियों का दायरा बढ़ाने की कोशिश की है। वह सऊदी अरब और तुर्किये जैसे इस्लामी देशों का इस्तेमाल अपनी रणनीतिक ढाल के रूप में करना चाहता है।
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क्या मानते हैं रक्षा विशेषज्ञ
समझौते पर सैन्य अभियानों के पूर्व महानिदेशक (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया में कहा कि इन समझौतों से यदि पाकिस्तान का हौसला बढ़ जाता है तो यह हमारे लिए अच्छी बात नहीं है। इससे भारत के लिए समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि किसी आतंकी हमले की सूरत में भारत के लिए ऑपरेशन सिंदूर 2.0 करना मुश्किल नहीं होगा। तुर्किये या सऊदी अरब अधिक से अधिक पाकिस्तान को नैतिक समर्थन दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की रणनीतिक गहराई बेनकाब कर दी  थी, इसीलिए पाकिस्तान ऐसे रक्षा  समझौतों की तलाश में है।
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दूसरे की मदद से नहीं मिलती जीत : भूराजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ कमर आगा ने कहा, मुझे नहीं लगता तुर्किये और सऊदी अरब, भारत के खिलाफ आकर लड़ेंगे। तुर्किये इतनी दूर आकर नहीं लड़ सकता। तुर्किये और पाकिस्तान की माली हालत अच्छी नहीं है। दोनों का बस इतना स्वार्थ है कि सऊदी अरब से फंडिंग मिल जाए, जो आय का जरिया बने। सऊदी अरब की भारत पर काफी निर्भरता है, भारत उनके तेल का बड़ा खरीददार है।

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