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देश के मात्र एक फीसदी प्राइवेट अस्पताल ही ‘मान्यता’ प्राप्त, कैसे मिलेगी क्वॉलिटी हेल्थ सर्विसेज
हरेंद्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 20 Sep 2018 07:26 PM IST
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हाल ही में प्रकाशित लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल तकरीबन 16 लाख भारतीय घटिया स्वास्थ्य सेवाओं के चलते मौत के मुंह में समा जाते हैं। वहीं हमारे देश में सबसे ज्यादा भरोसा प्राइवेट अस्पतालों पर किया जाता है। केंद्र सरकार की 23 सितंबर से शुरू होने वाली आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना में तकरीबन 8 हजार प्राइवेट अस्पताल शामिल होने जा रहे हैं। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि देश में मात्र 1 फीसदी प्राइवेट अस्पताल ही गुणवत्ता के लिए मान्यता प्राप्त हैं।
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देश में एक लाख अस्पताल
सरकार की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी कि लोगों को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएं। जबकि सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 19,817 सरकारी अस्पताल हैं, वहीं प्राइवेट अस्पतालों की संख्या तकरीबन 80,671 है। इनमें से मात्र 536 अस्पताल ही भारतीय गुणवत्ता परिषद के बनाए हेल्थकेयर प्रदाताओं के लिए बने राष्ट्रीय मान्यता बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं। ये हाल तब है जब देश की 70 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाएं निजी हाथों में हैं। वहीं आयुष्मान भारत में कम से कम 10 बेड के सभी प्राइवेट अस्पताल भी इम्पैनलमेंट किए जाएंगे। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 50 करोड़ भारतीयों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी। इसके अलावा बीमा विनियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) में भी कैशलेस स्कीम के लिए केवल मान्यता प्राप्त अस्पतालों के ही इम्पैनलमेंट का प्रावधान है।
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दिल्ली के 50 अस्पताल मान्यता प्राप्त
बोर्ड की सूची के मुताबिक मान्यता प्राप्त 536 में ज्यादातर बड़े समूह वाले अस्पताल हैं। जबकि गुजरात का एकमात्र सरकारी अस्पताल ही इससे मान्यता प्राप्त है। हैरानी की बात राजधानी के तकरीबन 50 अस्पताल बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन सफदरजंग, आरएमएल, एलएनजेपी अस्पताल समेत बड़े सरकारी अस्पतालों में से कोई भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है।
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बेस्ट क्वॉलिटी के लिए 683 मानक
भारतीय गुणवत्ता परिषद यानी क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने इसके लिए नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स बनाया हुआ है। यह बोर्ड देश के सभी अस्पतालों को अपने 683 मानकों का पालन करने वाले सभी अस्पतालों को मान्यता देता है। वहीं एंट्री लेवल के लिए 150 मानक हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है।
सख्त हैं मानक
नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर्ष नाडकरनी का कहना है कि देश में अभी तक तकरीबन 500 अस्पतालों को ही बोर्ड से मान्यता मिली हुई है। उन्होंने बताया कि वे केवल उन्ही अस्पतालों को मान्यता देते हैं, जो बेस्ट क्लास सर्विस और गुणवत्ता का ख्याल रखते हैं। वे बताते हैं कि उनके बोर्ड के पैरामीटर्स बेहद सख्त हैं और हर किसी के लिए उन मानकों का पालन करना आसान नहीं होता। नाडकरनी के मुताबिक जरूरी नहीं है कि ये सभी अस्पताल आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल हों। उनके मुताबिक यह उन प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर करता है कि वे इस योजना में शामिल हों या नहीं।
3 साल के लिए मिलती है मान्यता
सीईओ ने बताया कि मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह से स्वैच्छिक है। बोर्ड अस्पतालों को किसी तरह की सलाह नहीं देता है केवल वेबसाइट के जरिए ही गाईडेंस दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जो अस्पताल को गुणवत्ता को लेकर चिंतित होते हैं, वे ही उनसे संपर्क करते हैं। उन्होंने बताया कि देश के कुल मान्यता प्राप्त और सर्टिफाइड अस्पतालों की संख्या 1750 है। वह बताते हैं कि देश में अस्पतालों को यह मान्यता 3 साल के लिए मिलती है, जिसके बाद उसे रिन्यु करवाना पड़ता है। रिन्यु प्रक्रिया में फिर से उन्हीं मानकों का पालन करना पड़ता है, अगर कोई कमी मिलती है, तो मान्यता रद्द भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि यह मान्यता ग्रुप स्तर पर न देकर अलग-अलग आवेदन करना पड़ता है।
आयुष्मान भारत में मिलेगा इंसेंटिव
आयुष्मान भारत के सीईओ इंदु भूषण ने बताया स्कीम में मान्यता प्राप्त वाले अस्पतालों को शामिल करने के लिए इंसेंटिव देने की योजना बनाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रोत्साहन राशि के चलते ज्यादा से मान्यता प्राप्त अस्पताल बीमा योजना में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि किसी भी एक पैकेज में बोर्ड से मान्यता प्राप्त अस्पतालों को 15 प्रतिशत की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि बिना मान्यता वाले अंस्पतालों को 10 फीसदी इंसेटिव दिया जाएगा।
सीईओ ने बताया कि मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह से स्वैच्छिक है। बोर्ड अस्पतालों को किसी तरह की सलाह नहीं देता है केवल वेबसाइट के जरिए ही गाईडेंस दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जो अस्पताल को गुणवत्ता को लेकर चिंतित होते हैं, वे ही उनसे संपर्क करते हैं। उन्होंने बताया कि देश के कुल मान्यता प्राप्त और सर्टिफाइड अस्पतालों की संख्या 1750 है। वह बताते हैं कि देश में अस्पतालों को यह मान्यता 3 साल के लिए मिलती है, जिसके बाद उसे रिन्यु करवाना पड़ता है। रिन्यु प्रक्रिया में फिर से उन्हीं मानकों का पालन करना पड़ता है, अगर कोई कमी मिलती है, तो मान्यता रद्द भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि यह मान्यता ग्रुप स्तर पर न देकर अलग-अलग आवेदन करना पड़ता है।
आयुष्मान भारत में मिलेगा इंसेंटिव
आयुष्मान भारत के सीईओ इंदु भूषण ने बताया स्कीम में मान्यता प्राप्त वाले अस्पतालों को शामिल करने के लिए इंसेंटिव देने की योजना बनाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रोत्साहन राशि के चलते ज्यादा से मान्यता प्राप्त अस्पताल बीमा योजना में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि किसी भी एक पैकेज में बोर्ड से मान्यता प्राप्त अस्पतालों को 15 प्रतिशत की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि बिना मान्यता वाले अंस्पतालों को 10 फीसदी इंसेटिव दिया जाएगा।
आयुष्मान भारत में 8000 प्राइवेट अस्पताल
इंदु भूषण के मुताबिक हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि हम निजी अस्पतालों के जरिए से बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत में अभी तक तकरीबन 8 हजार प्राइवेट अस्पताल शामिल हो चुके हैं, जिनमें मेदान्ता जैसे बड़े अस्पताल भी शामिल हैं। वहीं बोर्ड से मान्यता वाले 2000 एंट्री लेवल अस्पताल भी इस योजना में शामिल हैं। आयुष्मान भारत के सूत्रों का कहना है कि अभी केवल उन्हीं अस्पतालों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहे हैं तो स्पेशियलिटी या सुपर स्पेशियलिटी कैटेगरी के हैं, जिनमें कार्डियो, नेफ्रो और न्यूरो शामिल हैं। साथ ही, प्राइवेट अस्पतालों को योजना में शामिल करने से पहले बकायदा स्थानीय स्तर उनकी जांच की जा रही है कि अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए संसाधन हैं या नहीं।
बड़े-बड़े ब्रांड भी हुए शामिल
सूत्रों ने बताया कि अभी तक प्राइवेट अस्पतालों में मैक्स, रॉकलैंड, फोर्टिस, मेदान्ता जैसे बड़े अस्पताल भी शामिल हो चुके हैं। उनका कहना है कि लेकिन यह ग्रुप स्तर की बजाय व्यक्तिगर स्तर पर ही शामिल हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना में ग्रुप स्तर पर शामिल होने का कोई प्रावधान नहीं है। जो प्राइवेट अस्पताल इसमें शामिल होना चाहते हैं उन्हें राज्य स्तर पर ही आवेदन करना होगा। सूत्रों का कहना है कि आयुष्मान भारत में अभी और एक लाख साठ हजार बैडों की जरूरत है।
आयुष्मान भारत योजना 23 अक्टूबर को झारखंड से शुरू होगी, जिसकी शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। इसके अलावा कुछ राज्यों में पहले इसका पायलेट शुरू हो चुका है। इस योजना के तहत आने वाले हर परिवार को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराया जाएगा। इसके प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार करेंगी। केंद्र सरकार 60 फीसद, राज्य सरकार 40 फीसद खर्च उठाएगी। इसके तहत अस्पताल में भर्ती लाभार्थी को परिवहन भत्ता भी दिया जाएगा।
इंदु भूषण के मुताबिक हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि हम निजी अस्पतालों के जरिए से बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत में अभी तक तकरीबन 8 हजार प्राइवेट अस्पताल शामिल हो चुके हैं, जिनमें मेदान्ता जैसे बड़े अस्पताल भी शामिल हैं। वहीं बोर्ड से मान्यता वाले 2000 एंट्री लेवल अस्पताल भी इस योजना में शामिल हैं। आयुष्मान भारत के सूत्रों का कहना है कि अभी केवल उन्हीं अस्पतालों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहे हैं तो स्पेशियलिटी या सुपर स्पेशियलिटी कैटेगरी के हैं, जिनमें कार्डियो, नेफ्रो और न्यूरो शामिल हैं। साथ ही, प्राइवेट अस्पतालों को योजना में शामिल करने से पहले बकायदा स्थानीय स्तर उनकी जांच की जा रही है कि अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए संसाधन हैं या नहीं।
बड़े-बड़े ब्रांड भी हुए शामिल
सूत्रों ने बताया कि अभी तक प्राइवेट अस्पतालों में मैक्स, रॉकलैंड, फोर्टिस, मेदान्ता जैसे बड़े अस्पताल भी शामिल हो चुके हैं। उनका कहना है कि लेकिन यह ग्रुप स्तर की बजाय व्यक्तिगर स्तर पर ही शामिल हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना में ग्रुप स्तर पर शामिल होने का कोई प्रावधान नहीं है। जो प्राइवेट अस्पताल इसमें शामिल होना चाहते हैं उन्हें राज्य स्तर पर ही आवेदन करना होगा। सूत्रों का कहना है कि आयुष्मान भारत में अभी और एक लाख साठ हजार बैडों की जरूरत है।
आयुष्मान भारत योजना 23 अक्टूबर को झारखंड से शुरू होगी, जिसकी शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। इसके अलावा कुछ राज्यों में पहले इसका पायलेट शुरू हो चुका है। इस योजना के तहत आने वाले हर परिवार को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराया जाएगा। इसके प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार करेंगी। केंद्र सरकार 60 फीसद, राज्य सरकार 40 फीसद खर्च उठाएगी। इसके तहत अस्पताल में भर्ती लाभार्थी को परिवहन भत्ता भी दिया जाएगा।