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दिल्ली-एनसीआर में पराली से सिर्फ चार फीसदी प्रदूषण, बाकी के लिए स्थानीय कारक जिम्मेदार
Fri, 16 Oct 2020 01:22 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 16 Oct 2020 01:22 AM IST
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प्रकाश जावड़ेकर
- फोटो : एएनआई
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दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के साथ ही सियासी खींचतान भी शुरू हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर में इस साल अब तक पराली से महज चार फीसदी ही वायु प्रदूषण हुआ है, बाकी 96 फीसदी के लिए स्थानीय कारक जिम्मेदार हैं।
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जावड़ेकर ने हालांकि पंजाब सरकार से भी अपने यहां पराली जलाने पर अंकुश लगाने की अपील की। वहीं, केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करते हुए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, सिर्फ पल्ला झाड़ने से समस्या का हल नहीं निकलेगा।
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दिल्ली-एनसीआर में बृहस्पतिवार को वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस दौरान केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 50 निरीक्षण टीमों को हरी झंडी दिखाकर फील्ड पर रवाना किया। ग्रैप के तहत ये टीमें दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हॉटस्पाट्स पर वायु प्रदूषण की निगरानी करेंगी और रिपोर्ट तैयार करेंगी।
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इस मौके पर जावड़ेकर ने कहा, कोरोना वॉरियर्स की ही तरह प्रदूषण की लड़ाई लड़ने वाले इन योद्धाओं का भी हमें सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण के कारणों में बायोमास जलने, कुड़े का निष्पादन, टूटी सड़कें, धूल, निर्माण कार्य और इमारतें ढहाने की गतिविधियां जैसे स्थानीय कारक मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा, इस साल पराली से महज 4 फीसदी वायु प्रदूषण हो रहा है। लेकिन पिछली साल पंजाब में पराली जलाए जाने के कारण दिल्ली के लोगों पर सांसों का संकट हुआ था। मैं इस बार भी पंजाब सरकार से अपील करता हूं कि वह अपने यहां पराली जलाने से रोकने के लिए सख्त व आवश्यक कदम उठाए जिससे दिल्ली-एनसीआर के लोगों पर मुसीबत न बढ़े।
बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में बृहस्पतिवार को दिल्ली एनसीआर की वायु गुणवत्ता बहुत खराब स्तर पर जाने से सख्त नियमों को लागू कर दिया गया है। इनके तहत बिजली के जनरेटरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
केजरीवाल बोले- पल्ला झाड़ने से हल नहीं होगा
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जावड़ेकर के दावे पर पलटवार करते हुए ट्वीट किया, सिर्फ पल्ला झाड़ लेने से मुसीबत का हल नहीं निकलेगा। मैं पूछता हूं कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले 15 दिनों में अचानक प्रदूषण कैसे बढ़ा अगर पराली से सिर्फ 4 फीसदी वायु प्रदूषण हुआ।
उन्होंने अगले ट्वीट में कहा, 15 दिन पहले तक हवा साफ थी। यह हर साल की कहानी है। इस दौरान प्रदूषण के स्थानीय कारकों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई जिससे हवा की गुणवत्ता इतनी बिगड़ती।
आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा ने कहा, सीपीसीबी का खुद का अनुमान था कि 2019 में पराली से 44 फीसदी वायु प्रदूषण हुआ। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भी माना कि पंजाब हरियाणा में चरम पर जलाई गई पराली से ही 44 फीसदी प्रदूषण हुआ। फिर जावड़ेकर जी किस आधार पर ऐसा दावा कर रहे हैं।
गाजियाबाद के लोनी की हवा सबसे खराब
दिल्ली एनसीआर में बृहस्पतिवार को बिगड़ी वायु गुणवत्ता में सबसे बुरा हाल गाजियाबाद के लोनी का था। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 458 दर्ज किया गया, जबकि गाजियाबाद के ही वसुंधरा में सूचकांक 438 रहा। इसके अलावा दिल्ली के आनंद विहार, आईटीओ, वजीरपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 310 के पार चला गया।